h n

दलित-बहुजन पेज 3, दिसंबर 2015

दलित और स्त्रीवादी चिंतक विमल थोरात ने कहा कि 'दलितों के प्रति समाज में जो रवैया है, उसे असहिष्णुता की बजाय क्रूरता कहा जाना चाहिए’

 dls

दलित लेखक संघ की पहल

दिल्ली : दलित लेखक संघ के तत्वावधान में एक विचार गोष्ठी का आयोजन 15 नवंबर को कनॉट पैलेस, नयी दिल्ली में सम्पन्न हुआ। वक्ताओं ने ‘आरक्षण: दलित-पिछड़ों की भागीदारी’ और ‘बढ़ती असहिष्णुता का जिम्मेदार कौन?’ विषयों पर अपने विचार रखे। दलित और स्त्रीवादी चिंतक विमल थोरात ने अपने वकतव्य में कहा कि ‘दलितों के प्रति समाज में जो रवैया है, उसे असहिष्णुता की बजाय क्रूरता कहा जाना चाहिए।’ अशोक वाजपेयी ने कहा कि ‘हम अभी तक साप्रदायिकता को बहुत कम करके आंक रहे थे। साप्रदायिकता पर विमर्श में जब तक उपेक्षितों की बात शामिल नहीं होगी तब तक सामाजिक विषमताएं समाप्त नहीं होंगी।’ गोष्ठी में मुरली मनोहर प्रसाद सिंह, केपी चौधरी, डा. रतन लाल, अनिता भारती, संजीव कुमार, संजीव चंदन, उमराव सिंह जाटव, डा. सुधीर सागर, सूरजपाल चौहान, मामचंद रिवाडिया आदि ने भी अपनी बात रखी। अध्यक्षता कर रहे कर्मशील भारती ने कहा कि ‘यह समय जागने का है और परिवर्तन के लिए अनुकूल भी है क्योंकि अनेक लेखक संगठन एक साथ हुए हैं। इस ऊर्जा को सहेजकर आगे बढऩा चाहिए।’

 

9ef4a71c-6cb0-4f43-9060-af771e1cd2da
लोकमत मराठी ( दैनिक ) में बलिराजा और वामन की छपी तस्वीर, जिसके खिलाफ राज्य के ओबीसी-दलितों ने विरोध किया

मराठी दैनिक का विरोध

नागपुर : प्रमुख मराठी दैनिक ‘लोकमत’ धुलिया संस्करण में 12 नवंबर को बलि-वामन की तस्वीर छपने का विरोध विदर्भ सहित महाराष्ट्र के ओबीसी संगठनों और व्यक्तियों ने किया। गौरतलब है कि राज्य का पिछड़ा-दलित तबका ‘बलि राजा’ को अपना आदर्श मानता है और दिवाली के दौरान बलिराजा का उत्सव मनाता है। इस वर्ष भी विदर्भ सहित पूरे महाराष्ट्र में यह उत्सव आयोजित हुआ। वर्धा में अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद् द्वारा रावण-दहन का विरोध प्रशासन को ज्ञापन देकर किया गया। परिषद् के जिला सचिव चंद्रशेखर मडावी ने कहा कि अगले वर्ष से हम रावणदहन नहीं होने देगें।

IMG-20151123-WA0016
रावण दहन के खिलाफ ज्ञापन देतें आदिवासी कार्यकर्ता

 

लेखक के बारे में

एफपी डेस्‍क

संबंधित आलेख

मान्यवर कांशीराम किसी से नहीं संभल रहे हैं
राहुल गांधी कांग्रेस की राजनीतिक प्रकृति से भिन्न दलितों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति पर बेहद स्पष्ट रूप से बोलते हैं। लेकिन महज प्रतिनिधियों की...
बिहार : समाजवाद की कब्र पर भगवा झंडे की धमक
भाजपा ने चारों ओर से नीतीश को घेरने का पूरा इंतजाम कर लिया था। नीतीश कुमार के दिमागी हालत को भी भाजपा ने हथियार...
सामाजिक और राजनीतिक विमर्शों में नीतीश कुमार व उनकी सियासत 
यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या यह दौर वास्तव में ‘सुशासन’ का था, जैसा कि स्थापित मीडिया और सत्ता समर्थक वर्ग बार-बार प्रचारित...
‘वर्ष 2012 के रेगुलेशन से अधिक व्यापक व प्रभावकारी है नया रेगुलेशन’
ओबीसी बच्चों के साथ भी भेदभाव होता है। भारत की किसी यूनिवर्सिटी में ब्राह्मण और क्षत्रिय छात्रों के साथ जातीय भेदभाव का कोई आरोप...
ब्राह्मण नहीं, श्रमण थे आयुर्वेद के प्रतिपादक (पहला भाग)
श्रमणों की तरह, चिकित्सक भी ज्ञान के साधक थे। वे घूमते-फिरते, रोग का कारण तथा उसके लिए नई औषधि, उपचार और चिकित्सा ज्ञान प्राप्त...