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जयंतीभाई मनानी : ब्राह्मणवाद के खिलाफ पूर्णकालिक प्रचारक

वह आजीवन गतिशील रहे। देश भर में विभिन्न राजनीतिक मुद्दों को लेकर वे ओबीसी, दलितों और आदिवासियों से मिलते व उनके बीच एकता बनाने की कोशिश करते थे। उनका व्यक्तित्व वैचारिक रूप से व्यापक हो चुका था। लेकिन वे अन्य सामाजिक मुद्दों को जानना और देखना चाहते थे। यहां तक कि उन्हें भी जो उनकी विचारधारा के बिल्कुल खिलाफ होता। अपने मित्र और सहयोगी को याद कर रहे हैं अर्जुन पटेल :

जयंतीभाई मनानी के अचानक निधन की सूचना पाकर मैं आवाक रह गया था। देवेंद्र भाई पटेल और मैं घंटों अपने केबिन में उनके महान गुणों को याद करते रहे। उनके चुनौती  भरे कार्यभारों को याद करते रहे, जो वे छोड़े गए हैं और जिन्हें हमें पूरा करना है। हमने उनके चाहने वालों को उनके निधन की सूचना दिया।

भुलाए न जा सकने वाले संबंधों की शुरूआत

व्यक्तिगत तौर पर मैंने अपना सबसे करीबी दोस्त और वैचारिक मार्गदर्शक खो दिया। 1990 के दशक में मैं पहली बार उनसे गुजरात में बामसेफ की एक मीटिंग में मिला था। उस समय  बामसेफ अनुसूचित जातियों, जनजातियों, ओबीसी और अल्पसंख्यकों के बीच सक्रिय हो चुका था। उन दिनों मंडल कमीशन की रिपोर्ट सबसे ज्वलंत मुद्दा था।

पूरा आर्टिकल यहां पढें जयंतीभाई मनानी : ब्राह्मणवाद विरोधी पूर्णकालिक प्रचारक

 

लेखक के बारे में

अर्जुन पटेल

अर्जुन पटेल सेंटर फॉर सोशल स्टडीज, सूरत के सेवानिवृत्त प्रोफेसर व सामाजिक कार्यकर्ता है। गुजरात में 1990 के दशक से सक्रिय प्रो. पटेल की प्रकाशित कृतियों में ‘सोशल मूवमेंट इन इंडिया : फ्रॉम चार्वाक टू कांशीराम’, ‘दलित एक्सेडस इन गुजरात’, ‘रिजर्वेशन : आर्गुमेंट्स, काउंटर आर्गुमेंट्स एंड कांसिपिरेसीज’, ‘दलित आइडेंटिटी : ओरिजिन, फार्मूलेशन एंड डवलपमेंट’, ‘कास्ट इन चेंजिग सोसाइटी: ए स्टडी ऑफ कोली कम्युनिटी’, कांशीराम्स पालिटिक्स ऑफ ट्रांसफॉरमेंशन ऑफ सोशल सिस्टम’, ‘ऑन दी इलेक्शन रिजल्ट’, ‘ऑन दी इंडियन कॉनस्ट्यूशन’, ‘पालिटिक्स ऑफ कम्यूनल रायट्स, ‘ऑन दी क्रीमीलेय़र’, ‘ऑन सोशल जस्टिस’, ‘ऑन वीमेंस रिजर्वेशन’ और ‘बहुजन मूवमेंट: प्राब्लम्स एंड चैलेंजेज' शामिल हैं।  

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