h n

विश्लेषण

-

क्लिक करें :

India talks Ambedkar but social justice isn’t on her agenda

 उपरोक्त सामग्री अभी सिर्फ हिंदी में उपलब्ध है। अगर आप इसका अंग्रेजी अनुवाद करना चाहते हैं तो कृपया संपर्क करें। गुणवत्तापूर्ण अनुवादों को हम आपके नाम के साथ प्रकाशित करेंगे।  Email : editor@forwardpress.in


[फारवर्ड  प्रेस भारत के  सामाजिक व सांस्कृतिक रूप से दबाए गए तबकों – यथा, अन्य पिछडा वर्ग, अनुसूचित जनजातियों, विमुक्त घुमंतू जनजातियों, धर्मांतरित अल्पसंख्यकों से संबंधित मुद्दों को आवाज देने लिए प्रतिबद्ध है। यह एक द्विभाषी (अंग्रेजी-हिंदी) वेबसाइट है। हम हर सामग्री  हिंदी व अंग्रेजी में प्रकाशित करते हैं, ताकि इन्हें यथासंभव देश-व्यापी पाठक वर्ग मिल सके। लेखक व स्वतंत्र पत्रकार अपने लेख दोनों में से किसी एक भाषा में भेज सकते हैं।

फारवर्ड प्रेस के इस अभियान का सुचारू रूप से संचालन के लिए ऐच्छिक योगदान करने के इच्छुक अनुभवी अनुवादकों का  स्वागत है]

मुखपृष्ठ पर जाने के लिए यहां क्लिक करें :

 

लेखक के बारे में

बी.पी. महेश चंद्र गुरू

डॉ. बी. पी. महेश चन्द्र गुरु मैसूर विश्वविद्यालय के जनसंचार व पत्रकारिता विभाग में प्राध्यापक हैं. गुरू मीडिया के पहले दलित –बौद्ध प्रोफ़ेसर हैं, जिन्होंने पिछले तीन दशकों से न सिर्फ पत्रकारिता पढ़ाने का काम किया है, बल्कि कर्नाटक और देश के महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर भी रहे हैं। वे कर्नाटक राज्य सेवा आयोग तथा लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) में सदस्य रहे हैं तथा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की समितियों में भी शामिल रहे हैं। अंग्रेजी और कन्नड़ में उनकी 10 से अधिक किताबें प्रकाशित हुई हैं। प्रोफ़ेसर गुरु दलित –बहुजन चेतना से जुड़े आन्दोलनों और विमर्शों में शामिल रहे हैं

संबंधित आलेख

समाजवाद : लोहिया बनाम जगदेव प्रसाद
डॉ. लोहिया, पेरियार ई.वी. रामासामी और जगदेव प्रसाद – तीनों ने ही समाजवाद को भारतीय सामाजिक यथार्थ के अनुसार परिभाषित किया, लेकिन सांस्कृतिक और...
एक दिन द्वारका भारती के शहर होशियारपुर में
बीते 4 सितंबर, 2026 को होशियारपुर की यात्रा का मकसद पंजाब में दलित साहित्य के प्रतिनिधि साहित्यकार द्वारका भारती से साक्षात्कार था, लेकिन हमारे...
‘जयंती-2’ : आरक्षण-विरोधी समय में सामाजिक न्याय आंदोलन की सिनेमाई अभिव्यक्ति
फिल्म में पायल की कहानी आरक्षण पर सीधे बहस किए बिना भी उस बहस की बुनियाद पर सवाल रखती है। अवसर केवल दरवाजा खुलने...
लुंबिनी : प्राचीन भारत का ऐतिहासिक-सांस्कृतिक साक्ष्य
यह असोक स्तंभ साफ तौर पर घोषणा करता है– “हिद बुधे जाते शाक्यमुनि ति।” अर्थात् यहां शाक्यमुनि (बुद्ध) पैदा हुए थे। इससे रूम्मनदेई के...
सामाजिक न्याय की राजनीति और जगदेव प्रसाद
जगदेव प्रसाद की सबसे बड़ी विडंबना यही है कि जिन्हें व्यापक शोषित समाज की आवाज के रूप में पढ़ा जाना चाहिए, उन्हें कई बार...