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Abdullah Mansoor

‘पसमांदा जन आंदोलन 1998’ : मुस्लिम समाज में जातिवाद और हक की जद्दोजहद की दास्तान
मौजूदा सामाजिक और राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में यह किताब और भी अधिक प्रासंगिक हो जाती है। पसमांदा समाज के...
अशराफ़िया अदब को चुनौती देती ‘तश्तरी’ : पसमांदा यथार्थ की कहानियां
तश्तरी, जो आमतौर पर मुस्लिम घरों में मेहमानों को चाय-नाश्ता पेश करने, यानी इज़्ज़त और मेहमान-नवाज़ी का प्रतीक...
कुठांव : सवर्ण केंद्रित नारीवाद बनाम बहुजन न्याय का स्त्री विमर्श का सवाल उठाता उपन्यास
अब्दुल बिस्मिल्लाह का उपन्यास ‘कुठांव’ हमें यही बताता है कि बहुजन और पसमांदा महिलाओं का संघर्ष सिर्फ पुरुषों...
हिजाब और अशराफ़िया पितृसत्ता
पूरी अशराफ़िया राजनीति ज़ज़्बाती मुद्दों की राजनीति रही है। सैकड़ों सालों से यह अपनी संस्कृति, अपनी भाषा, अपने...
सामाजिक अस्पृश्यता और बहिष्करण से लड़ते हलालखोर
नकाब और बुर्के के ऊपर अशराफ राजनीति बहुत सरगर्म रहती है पर ये हलालखोर औरतें नकाब लगाकर कैसे...