कर्पूरी ठाकुर जिन वर्गों को ‘मनहीन, तनहीन और धनहीन’ कहकर संबोधित करते थे, शायद वे जानते थे कि इन वर्गों की पहली और सबसे बड़ी समस्या उनकी ‘मनहीनता’ है। अर्थात् आत्मविश्वास और सामाजिक चेतना का...
शिवनंदन पासवान ने जिस दौर में राजनीति में प्रवेश किया, वह बिहार और देश की राजनीति के लिए उथल-पुथल का समय था। समाजवादी आंदोलन सड़क से संसद तक अपनी जगह बना रहा था। उन्होंने शुरू...
तुकाराम तात्या पडवळ ने धर्म तथा जाति-आधारित शोषण को करीब से देखा था। धर्म के नाम पर पुजारी अनपढ़ लोगों को किस तरह से लूटते हैं, इसका उन्हें करीबी अनुभव था; और इस संबंध में...
मैंने जो भी थोड़ा बहुत शोधकार्य किया है, उससे मुझे कम-से-कम चार अग्रणी भारतीय वैज्ञानिकों से डॉ. बी.आर. आंबेडकर की मेल-मुलाकातों और उनके बीच संवाद के दस्तावेजी सबूत मिले हैं। ये वैज्ञानिक थे– डॉ. मेघनाद...