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हमारे नायक

‘बाबा साहब की किताबों पर प्रतिबंध के खिलाफ लड़ने और जीतनेवाले महान योद्धा थे ललई सिंह यादव’
बाबा साहब की किताब ‘सम्मान के लिए धर्म परिवर्तन करें’ और ‘जाति का विनाश’ को जब तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने जब्त कर लिया तब ललई सिंह यादव रामस्वरूप वर्मा जी के पास आए। वे बहुत...
जननायक को भारत रत्न का सम्मान देकर स्वयं सम्मानित हुई भारत सरकार
17 फरवरी, 1988 को ठाकुर जी का जब निधन हुआ तब उनके समान प्रतिष्ठा और समाज पर पकड़ रखनेवाला तथा सामाजिक न्याय की राजनीति करने वाला कोई नेता नहीं था। वे वीपी सिंह को प्रधानमंत्री...
जगदेव प्रसाद की नजर में केवल सांप्रदायिक हिंसा-घृणा तक सीमित नहीं रहा जनसंघ और आरएसएस
जगदेव प्रसाद हिंदू-मुसलमान के बायनरी में नहीं फंसते हैं। वह ऊंची जात बनाम शोषित वर्ग के बायनरी में एक वर्गीय राजनीति गढ़ने की पहल लेते हैं। शोषितों की निछक्का पार्टी और सामाजिक क्रांति को मूल...
समाजिक न्याय के सांस्कृतिक पुरोधा भिखारी ठाकुर को अब भी नहीं मिल रहा समुचित सम्मान
प्रेमचंद के इस प्रसिद्ध वक्तव्य कि “संस्कृति राजनीति के आगे चलने वाली मशाल है” को आधार बनाएं तो यह कहा जा सकता है कि बिहार की राजनीति में जो परिघटना 90 के दशक में घटती...
गुरु घासीदास की सतनाम क्रांति के दो सौ साल बाद
गुरु घासीदास जातिवाद और अछूत प्रथा के जड़-मूल से उन्मूलन के पक्षधर थे। वे मूर्ति पूजा, मंदिर और...
‘मनखे मनखे एक समान’ का नारा देने वाले गुरु घासीदास
गुरु घासीदास ने बुद्ध, कबीर और रैदास के द्वारा शुरू किए गए आंदोलन को आगे बढ़ाते हुए शोषित...
ऐतिहासिक रिपोर्ट : बंबई में जब विभिन्न विचारधाराओं के लोगों ने दी थी डॉ. आंबेडकर को श्रद्धांजलि
डॉ. आंबेडकर का निधन 6 दिसंबर, 1956 काे हुआ। बंबई सीआईडी की तत्कालीन रपटों में यह उल्लेखित है...
मुंगेरी लाल के ‘हसीन’ सपने सच हुए
यह विडंबना ही है कि मुंगेरी लाल के सामाजिक योगदान और राजनीतिक महत्‍व पर कभी किसी नेता या...
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