h n

महात्मा जोतिबा फुले को याद किया

महान समाज सुधारक जोतिबा फुले की 123वीं पुण्यतिथि के अवसर पर स्थानीय सैनी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में एक समारोह का आयोजन किया गया

नारनौल (हरियाणा) : महान समाज सुधारक जोतिबा फुले की 123वीं पुण्यतिथि के अवसर पर स्थानीय सैनी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में एक समारोह का आयोजन किया गया। इस मौके पर सैनी सभा के वरिष्ठ उपप्रधान जयराम आढ़ती ने महात्मा फुले के चित्र पर पुष्प अर्पित करके विधिवत् रूप से कार्यक्रम की शुरुआत की। स्कूल के प्राचार्य चौधरी सुरेशपाल की अध्यक्षता में कार्यक्रम की शुरुआत हुई। समारोह के मुख्य अतिथि जयराम आढ़ती ने अपने संबोधन में विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे महात्मा जोतिबा फुले के जीवन से प्रेरणा लेते हुए समाज का उत्थान करने में अपना सहयोग करें।

सभा के मीडिया प्रभारी रामचंद्र सैनी ने बताया कि फुले की पुण्यतिथि के अवसर पर स्कूल में पढने वाले आर्थिक रूप से कमजोर 40 छात्र-छात्राओं को स्कूल की तरफ से स्वेटर भी वितरित किए गए। वहीं, महात्मा जोतिबा फुले विकास मंच जिला महेन्द्रगढ़ ने भी स्थानीय वाल्मीकि मंदिर में जोतिबा फुले को याद किया। कार्यक्रम को महात्मा जोतिबा फुले विकास मंच के जिला अध्यक्ष जयप्रकाश सैनी, रामसिंह सैनी, संजय अमन तथा डॉ. सुशील शीलू ने भी संबोधित किया।


फारवर्ड प्रेस वेब पोर्टल के अतिरिक्‍त बहुजन मुद्दों की पुस्‍तकों का प्रकाशक भी है। एफपी बुक्‍स के नाम से जारी होने वाली ये किताबें बहुजन (दलित, ओबीसी, आदिवासी, घुमंतु, पसमांदा समुदाय) तबकों के साहित्‍य, सस्‍क‍ृति व सामाजिक-राजनीति की व्‍यापक समस्‍याओं के साथ-साथ इसके सूक्ष्म पहलुओं को भी गहराई से उजागर करती हैं। एफपी बुक्‍स की सूची जानने अथवा किताबें मंगवाने के लिए संपर्क करें। मोबाइल : +919968527911, ईमेल : info@forwardmagazine.in

लेखक के बारे में

संजय मान

संबंधित आलेख

पहुंची वहीं पे ख़ाक जहां का खमीर था
शरद यादव ने जबलपुर विश्वविद्यालय से अपनी राजनीति की शुरुआत की थी और धीरे-धीरे देश की राजनीति के केंद्र में आ गए। पिता ने...
मंडल आयोग की सिफारिशें लागू करवाने में शरद यादव की भूमिका भुलाई नहीं जा सकती
“इस स्थिति का लाभ उठाते हुए मैंने वी. पी. सिंह से कहा कि वे मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू करने की घोषणा तुरंत...
शरद यादव : रहे अपनों की राजनीति के शिकार
शरद यादव उत्तर प्रदेश और बिहार की यादव राजनीति में अपनी पकड़ नहीं बना पाए और इसका कारण थे लालू यादव और मुलायम सिंह...
सावित्रीबाई फुले : पहली मुकम्मिल भारतीय स्त्री विमर्शकार
स्त्रियों के लिए भारतीय समाज हमेशा सख्त रहा है। इसके जातिगत ताने-बाने ने स्त्रियों को दोहरे बंदिशों मे जकड़ रखा था। उन्हें मानवीय अधिकारों...
आधुनिक भारत के पुरोधा डॉ. मुख्तार अहमद अंसारी
अपनी खिदमात के जरिए डॉ. अंसारी लगातार समाज को जोड़ते रहे। थोड़े ही दिनो में उनकी बातों को पूरे देश में सम्मानपूर्वक सुना जाने...