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संघ को बेचैन करेगी अठावले की मुहिम

पार्टी के विस्तार से उत्साहित नेताओं ने पिछले 12 अगस्त को दिल्ली के कॉस्टीट्यूशन क्लब में उत्तर भारतीय कार्यकर्ता सम्मलेन आयोजित किया, जिसमें पार्टी के मुखिया अठावले के अलावा राखी सावंत की उपस्थिति महत्वपूर्ण रही

पीछले दिनों रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इण्डिया में विभिन्न क्षेत्रों के लोगों के शामिल होने की खबरें आईं। सेना के रिटायर्ड अफसर से लेकर बॉलीवुड के कलाकार तक आरपीआई में शामिल हुए। फिल्म अभिनेत्री राखी सावंत के पार्टी में आने से पार्टी सुप्रीमो और राज्यसभा सांसद रामदास अठावले खासे उत्साहित दिख रहे हैं और दावा कर रहे हैं कि उदित नारायण और फिल्मी दुनिया की अन्य हस्तियां भी पार्टी में शामिल हो सकती हैं। हालांकि अठावले इस बात से भी इंकार नहीं करते कि पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की जरूरत है।

पार्टी के विस्तार से उत्साहित नेताओं ने पिछले 12 अगस्त को दिल्ली के कॉस्टीट्यूशन क्लब में उत्तर भारतीय कार्यकर्ता सम्मलेन आयोजित किया, जिसमें पार्टी के मुखिया अठावले के अलावा राखी सावंत की उपस्थिति महत्वपूर्ण रही। पिछले लोकसभा चुनाव में महाराष्ट्र में शिवसेना-भाजपा गठबंधन की जीत में अठावले और उनकी पार्टी की भूमिका निर्णायक रही थी और इसीलिए वे विधानसभा चुनावों में सीटों में 15 प्रतिशत की हिस्सेदारी मांग रहे हैं।

अठावले सहित दलित नेताओं के भाजपा गठबंधन में शामिल होने को आम्बेडकर की विचारधारा से जुड़े बहुत से लोग एक अनपेक्षित कदम बताते रहे हैं, जिससे, उनके अनुसार, भगवा ताकतें मजबूत होंगी। भाजपा के द्वारा आरपीआई को दी जा रहे तवज्जो को प्रेक्षक, कांग्रेस और बसपा के दलित आधार को कमजोर करने की उसकी रणनीति के तौर पर भी देखते हैं। स्वयं अठावले के वक्तव्य और उत्साह इसकी गवाही देते हैं। वे फारवर्ड प्रेस से कहते हैं, ‘कभी हाथी आरपीआई का चुनाव चिह्न था। उत्तरप्रदेश से आरपीआई के चार सांसद होते थे, हम उसी जमीन पर उत्तर भारत में खड़े हो रहे हैं, हाथी चुनाव चिह्न को हम वापस हासिल करेंगे।’ प्रसिद्ध दलित लेखिका उर्मिला पवार अठावले के एनडीए में जाने को अलग ढंग से देखती हैं। वे कहती हैं ‘अठावले वहां भी दलित हित का ख्याल रखेंगे, वहां उनका जाना दूसरे दलित नेताओं के जाने से भिन्न है।’ अठावले भी पवार की इस उम्मीद पर खरे उतरते दिखते हैं। वे अपनी पार्टी के आंदोलनकारी चरित्र को बनाए रखने का संकेत देते हुए देशभर में भूमि आंदोलन छेडऩे की बात कर रहे हैं, जिसकी घोषणा उन्होंने 12 अगस्त को कार्यकर्ता सम्मलेन में की भी। यदि पार्टी इस दिशा में सक्रिय होती है तो इसमें कोई शक नहीं कि संघ परिवार को अपना उच्च जाति आधार खिसकता दिखेगा।

 

(फारवर्ड प्रेस के सितम्बर 2014 अंक में प्रकाशित)


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संजीव चन्दन

संजीव चंदन (25 नवंबर 1977) : प्रकाशन संस्था व समाजकर्मी समूह ‘द मार्जनालाइज्ड’ के प्रमुख संजीव चंदन चर्चित पत्रिका ‘स्त्रीकाल’(अनियतकालीन व वेबपोर्टल) के संपादक भी हैं। श्री चंदन अपने स्त्रीवादी-आंबेडकरवादी लेखन के लिए जाने जाते हैं। स्त्री मुद्दों पर उनके द्वारा संपादित पुस्तक ‘चौखट पर स्त्री (2014) प्रकाशित है तथा उनका कहानी संग्रह ‘546वीं सीट की स्त्री’ प्रकाश्य है। संपर्क : themarginalised@gmail.com

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