h n

सत्ता द्वारा की गयी आलोचना हमारे लिए इज़्ज़त की बात है : राजकमल झा

इंडियन एक्सप्रेस के प्रधान संपादक राजकमल झा ने रामनाथ गोयनका सम्मान समारोह के दौरान मौजूदा दौर में रीढ़विहीन हो चली पत्रकारिता और उस पर अंकुश लगाने के लिए आतुर सत्ता को एक साथ आइना दिखाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने अपने धन्यवाद भाषण में राजकमल झा के द्वारा दिया गया भाषण आप भी पढ़ें

rajkamal-jha1
राजकमल झा

मोदी जी, आपके शब्दों के लिए बहुत आभार। आपका यहाँ होना एक मज़बूत सन्देश है। हम उम्मीद करते हैं कि अच्छी पत्रकारिता उस काम से तय की जाएगी जिसे आज की शाम सम्मानित किया जा रहा है, जिसे रिपोर्टर्स ने किया है, जिसे एडिटर्स ने किया है। अच्छी पत्रकारिता सेल्फी पत्रकार नहीं परिभाषित करेंगे जो आजकल कुछ ज़्यादा ही नज़र आ रहे हैं, जो हमेशा आपने आप से अभिभूत रहते हैं, अपने चेहरे से, अपने विचारों से जो कैमरा को उनकी तरफ रखते हैं, उनके लिए सिर्फ एक ही चीज़ मायने रखती है, उनकी आवाज़ और उनका चेहरा। आज के सेल्फी पत्रकारिता में अगर आपके पास तथ्य नहीं हैं तो कोई बात नहीं, फ्रेम में बस झंडा रखिये और उसके पीछे छुप जाइये।

आपके भाषण के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया सर, आपने साख/भरोसे की ज़रूरत को अंडरलाइन किया। ये बहुत ज़रूरी बात है जो हम पत्रकार आपके भाषण से सीख सकते हैं। आपने पत्रकारों के बारे में बहुत अच्छी बातें कही जिससे हम थोड़ा नर्वस भी हैं। आपको ये विकिपीडिया पर नहीं मिलेगा, लेकिन मैं इंडियन एक्सप्रेस के एडिटर की हैसियत से कह सकता हूँ कि रामनाथ गोयनका ने एक रिपोर्टर को नौकरी से निकाल दिया जब उन्हें एक राज्य के मुख्यमंत्री ने बताया कि आपका रिपोर्टर बड़ा अच्छा काम कर रहा है। इस साल मैं 50 का हो रहा हूँ और मैं कह सकता हूँ कि इस वक़्त जब हमारे पास ऐसे पत्रकार हैं जो रिट्वीट और लाइक के ज़माने में जवान हो रहे हैं, जिन्हें पता नहीं है कि सरकार की तरफ से की गयी आलोचना हमारे लिए इज़्ज़त की बात है।

इस साल हमारे पास इस अवार्ड के लिए 562 एप्लीकेशन आयीं। ये अब तक की सबसे ज़्यादा एप्लीकेशन हैं। ये उन लोगों को जवाब है जिन्हें लगता है कि अच्छी पत्रकारिता मर रही है और पत्रकारों को सरकार ने खरीद लिया है। अच्छी पत्रकारिता मर नहीं रही, ये बेहतर और बड़ी हो रही है। हाँ, बस इतना है कि बुरी पत्रकारिता ज़्यादा शोर मचा रही है जो 5 साल पहले नहीं मचाती थी।

https://www.youtube.com/watch?v=KIOC8bKT4m8

अंग्रेजी से अनुवाद – सुरेश कुमार पाण्डेय

एक सोच जो सबसे अलग हो” ब्लॉग से साभार


 बहुजन साहित्य से संबंधित विस्तृत जानकारी के लिए फॉरवर्ड प्रेस की किताब “बहुजन साहित्य की प्रस्तावना” पढ़ें. किताब मंगवाने के लिए ‘द मार्जिनलाइज्ड’ प्रकाशन से संपर्क करें (फ़ोन:9968527911, ई-मेल: themarginalisedpublication@gmail.com) . अमेजन से ऑनलाइन मंगवाने के लिए  क्लिक करें: बहुजन साहित्य की प्रस्तावना

लेखक के बारे में

राजकमल झा

राजकमल झा इंडियन एक्सप्रेस के प्रधान संपादक हैं।

संबंधित आलेख

अठारहवीं लोकसभा के पहले सत्र का हासिल
राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान कोई घंटा ख़ाली नहीं गया जब संविधान का ज़िक्र न हुआ हो। इस दौरान...
हाथरस हादसे की जाति और राजनीति
सूरजपाल सिंह नारायण साकार हरि उर्फ भोले बाबा जाति से जाटव है। उसके भक्तों में भी अधिकांश या तो जाटव हैं या फिर अति-पिछड़े...
पश्चिमी उत्तर प्रदेश : चुनाव में अगर ऐसा होता तो क्या होता, मगर वैसा होता तो क्या होता?
एनडीए यहां पर अपनी जीत को लेकर अति-आत्मविश्वास में था जबकि इंडिया गठबंधन के कार्यकर्ता तक़रीबन हतोत्साहित थे। हालात ऐसे थे कि चुनाव सिर...
‘दी इन्कार्सरेशंस’ : भीमा-कोरेगांव के कैदी और भारत का ‘डीप स्टेट’
अल्पा शाह ने पिछले 4 सालों से जेल में बंद दिल्ली में अंग्रेजी के प्रोफेसर और दलितों-आदिवासियों-पिछड़ों के अधिकारों के लिए लड़नेवाले एक्टिविस्ट हैनी...
लल्लनटॉप प्रकरण : द्विज हिंदूवादी पत्रकारिता की खुली पोल
जब तक न्यूज़रूम का लोकतांत्रिकरण नहीं होगा, तब तक कोई मुसलमान और कोई दलित-बहुजन, द्विवेदी की तरह सामने बैठकर नाना पाटेकर का इंटरव्यू लेने...