जब वितमंत्री से रामजेठमलानी ने किये तीखे सवाल

अरुण जेटली द्वारा दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल के खिलाफ मानहानि मामले की सुनवाई के दौरान केजरीवाल के वकील राम जेठमलानी ने तीखे सवाल किये। आइये देखते हैं क्या थे वे सवाल और जेटली के जवाब :

अरुण जेटली और राम जेठमलानी

गत 21 दिसंबर, 2015 को वित्त मंत्री अरुण जेटली ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के पांच अन्य नेताओं के विरुद्ध दिल्ली उच्च न्यायालय में दीवानी और दिल्ली के पटियाला हाउस स्थित जिला न्यायालय में अपराधिक मानहानि के दो अलग-अलग प्रकरण दायर किये. ये प्रकरण आप द्वारा आयोजित एक प्रेस वार्ता के सिलसिले में लगाये गए, जिसमें यह आरोप लगाया गया था कि दिल्ली क्रिकेट संघ के अध्यक्ष बतौर जेटली भ्रष्टाचार में लिप्त थे। आरोप मुख्यतः 2003 व 2015 के बीच दिल्ली के फिरोजशाह क्रिकेट स्टेडियम के पुनर्निर्माण का ठेका ऐसी कम्पनियों को देने, जो केवल कागज़ पर अस्तित्व में थीं, और इस परियोजना की लागत में बेतहाशा बृद्धि को लेकर लगाये गए थे। इसके पहले, सीबीआई ने दिल्ली सरकार के प्रमुख सचिव राजेंद्र कुमार के कार्यालय पर छापा डाला था।केजरीवाल ने दावा किया कि छापे का उद्देश्य ऐसे दस्तावेजों को जब्त करना था, जो जेटली के खिलाफ जा सकते थे. केजरीवाल के नेतृत्व वाली सरकार, जेटली के विरुद्ध जांच कर रही थी. वरिष्ठ अधिवक्ता राम जेठमलानी, अरविन्द केजरीवाल और उनके सह-आरोपियों का बचाव कर रहे हैं. यहाँ हम जेठमलानी द्वारा दिल्ली उच्च न्यायलय में जेटली, जो स्वयं वकील हैं, के 6 मार्च 2017 को किये गए प्रति-परिक्षण का लिप्यांतर प्रस्तुत कर रहे हैं :

आपको केजरीवाल से कोई दुश्मनी नहीं है?

मुझे कोई निजी दुश्मनी नहीं है लेकिन मुझे उनका नहीं पता. एक बार वो डीडीसीए के प्रेसीडेंट का चुनाव लड़े और हार गए। यहां तक कि लोकसभा चुनाव में उन्होंने मेरे खिलाफ जमकर प्रचार किया

बिशन सिंह बेदी और अरविंद केजरीवाल

आप अमृतसर चुनाव की बात कर रहे हैं? क्या ये सही नहीं कि पहली बार आप गुजरात के अलावा कहीं और से चुनाव लड़ना चाहते थे?

जेटली के वकीलों ने विरोध किया लेकिन जेटली : हां

आप अमृतसर से चुनाव लड़ रहे थे तो भी गुजरात से राज्यसभा सदस्य थे?

हां

 क्या ये आपका पहला लोकसभा चुनाव था?

हां, मैं पहली बार लड़ा था।

तो आप पहली बार लोकतंत्र में अपनी ग्रेट रेपूटेशन का टेस्ट कर रहे थे?

चुनावों में कई फैक्टर होते हैं सिर्फ प्रत्याशी के रेपूटेशन का सवाल नहीं होता। याद रहे कि केजरीवाल भी 2014 लोकसभा का चुनाव वाराणसी में 3.50 लाख वोटों से हारे थे।

मेरी सलाह मानिए, जो पूछा जा रहा है, वही जवाब दीजिए क्या आप एक लाख से ज्यादा वोटों से हारे

सही है

अरुण जेटली दिल्ली और जिला क्रिकेट असोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष हैं

आप लोकसभा चुनाव लड़े जबकि राज्यसभा में दो साल बचे हुए थे?

राज्यसभा के कार्यकाल में चार साल बचे थे।

इसकी क्या वजह है कि बिशन सिंह बेदी ने आपके खिलाफ पीएम को गंभीर शिकायत दी?

मैं ऐसोसिएशन का अध्यक्ष था और बेदी को चीफ कोच बनाया गया था। उनका कार्यकाल खत्म हो गया था इसके बावजूद मैं नरमी दिखाता रहा।

क्या आपने बेदी की चिट्ठी देखी?

मुझे याद नहीं है. जब पीएम ने शपथ ली तो मैं बीसीसीअई और डीडीसीए दोनों से अलग हो गया।

क्या पीएम ने आपको ये लैटर दिखाया था? क्या आप इसे पढ़कर बता सकते हैं कि इसमें क्या गलत लिखा है?

इस लैटर में मेरे बारे में लिखी बातों से मैं इनकार करता हूं। मैंने वित्त मंत्री या संसद सदस्य रहते वक्त कभी भी मंत्रालय या विभाग का सहारा नहीं लिया। मैंने कंपनी अफेयर्स का मंत्रालय संभाला लेकिन कभी भी डीडीसीए संबंधी कोई फाइल या कागजात मेरे सामने नहीं आए। ना ही मैंने इससे संबंधी कोई सवाल पूछा। इसलिए हितों के टकराव का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता।

मिस्टर जेटली मैंने ये नहीं पूछा कि आपने लैटर के बाद क्या कियाये जानना चाहते हैं इसमें कौन सी बात गलत है?

मैंने साफ जवाब दिया है कि कोई हितों का टकराव नहीं था।

डीडीसीए के घोटाले में अरुण जेटली की कथित संलिप्तता को को प्रेस कांफ्रेंस में बताते आप के नेता

आप जानते हैं कि लेटर में लिखी बातें उस वक्त की हैं जब आप एसोसिएशन का हिस्सा थे?

जहां तक मेरी जानकारी है, ये बातें झूठी हैं। मैं बीसीसीआई और डीडीसीए से लिंक खत्म करना चाहता था. 2014 के किसी वक्त में एसोसिएशन से जुड़ा था लेकिन वो कोई पद नहीं था बल्कि एक तरह से बिना कार्यभार वाला काम था। मेरे आग्रह पर वो भी खत्म हो गया।

क्या आपके पास एग्जीक्यूटिव कमेटी के सदस्य के अधिकार थे?

एकदम नहीं बता सकता लेकिन मैंने कभी एग्जीक्यूटिव कमेटी की मीटिंग में हिस्सा नहीं लिया।

आपने मीटिंग में हिस्सा नहीं लिया ?

मैं याद कर रहा हूं कि एक बार मैं मीटिंग में गया था और इसके बाद मैंने इससे अलग करने का आग्रह किया था।

अब आपने ये लैटर पढ़ लिया इसमें क्या ऐसा फैक्ट है जिससे गुस्सा होकर आपने मुझ पर कारवाई शुरु की?

नहीं

क्या पीएम को आपके इरादे पता थे ? क्या आपने उन्हें बताया कि लेटर में लगे आरोपों पर आप अपनी रेपूटेशन को बनाए रखेंगे?

ये लैटर जनवरी 2014 का है जबकि मैंने कानूनी कार्रवाई दिसंबर 2015 में  की. मैं 2014 में सूचना प्रसारण विभाग का प्रभारी बना। मई 2014 में मैं प्रभारी नहीं था। अब मैं फाइनेंस एंड कोरपोरेट अफेयर्स मंत्रालय का प्रभारी हूं.

 आपको पीएम ने वित्त मंत्र बने रहने दिया क्योंकि आपने ये भरोसा दिया था कि इन आरोपों पर आप न्यायिक कारवाई करेंगे?

मैं इस बात को नकारता हूं।

क्या आप पत्रकार मधु किश्वर को जानते हैं?

मैं ऐसा नहीं समझता।

उन्होंने एक लैटर लिखा था कि जेटली और उनके परिवार ने डीडीसीए से रुपया कंपनियों में भेजा है?

मुझे नहीं पता ये उन्होंने कब कहा।

अरुण जेटली के इस्तीफे की मांग करते हुए आप का प्रदर्शन

ये दिसंबर 2015 का एक ट्वीट है और केजरीवाल ने सिर्फ इसे रिट्वीट किया था

केजरीवाल ने गंभीर और दुर्भावनापूर्ण  झूठ बोलने का काम किया कि मेरी पत्नी और बेटी के लिंक फर्जी कंपनियों से हैं। ये काफी निचले दर्जे का काम था।

आपने शुरुआत करने वाली किश्वर को देखने की जरूरत नहीं की?

पब्लिक लाइफ में रहने वाले लोगों के लिए सोशल मीडिया पर गैरजिम्मेदाराना बयान आते रहते हैं। लेकिन जब कोई मुख्यमंत्री ऐसे बयानों को अपनाता है तो ये गंभीर अपराध हो जाता है क्योंकि फिर ये बयान सही माने जाते हैं। बार-बार इन झूठे आरोपों को लगाने पर मैं कानूनी कार्रवाई को मजबूर हो गया।

रामजेठमलानी ने डीडीसीए और बेदी के आरोपों पर अखबार में छपी खबरों को पढा?

इनसे मेरा कोई लेना देना नहीं ये 2015 के हैं, जबकि मैने डीडीसीए अध्यक्ष पद 2013 में छोड़ दिया.

रामजेठमलानी ने फिर सीताराम येचूरी का ट्वीट सुनाया जो केजरीवाल ने रिट्वीट किया मधु किश्वर का ट्वीट पढ़ा जिसे भी केजरीवाल ने रिट्वीट किया

ये ट्विट काफी मानहानि वाला है और मुख्यमंत्री के रिट्विट करने से झूठी बातों को और भी बल मिलता है।
अब इस मामले में अगली सुनवाई 15 मई को होगी।

इस मामले में कोर्ट में सोमवार को जिरह शुरू हुई थी। उस दौरान वरिष्ठ वकील रामजेठमलानी की तरफ से अरुण जेटली के लिए 52 सवाल रखे गए।  इनमें से 30 केस से जुड़े सवाल लगे, एक-तिहाई सवालों को कोर्ट की तरफ से अयोग्य करार दिया गया। कम से कम दो घंटे तक चली उस बहस में जेटली को यह समझाने के लिए कहा गया कि वह किस तरह अपनी प्रतिष्ठा को पहुंची ठेस के लिए कह रहे हैं कि ‘उसकी भरपाई नहीं हो सकती? और उसे आंका नहीं जा सकता।’ और कहीं यह मामला ‘खुद को महान समझने’ का तो नहीं है। पूर्व बीजेपी नेता राम जेठलमलानी इस केस को केजरीवाल की तरफ से लड़ रहे हैं और उन्होंने बिना किसी संकोच के जेटली से इस सवाल के जवाब की मांग की कि मानहानि का दावा क्यों? इस मामले पर अरुण जेटली का कहना था कि पूरे राजनीतिक जीवन में आलोचना को लेकर कुछ नहीं कहा, लेकिन इस बार मुझे कोर्ट आकर मानहानि का केस करना पड़ा, क्योंकि इस बार मेरी निष्ठा और सच्चाई पर सवाल खड़े किए गए।

एनडीटीवी से साभार


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