
बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविन्द देश के नये राष्ट्रपति होंगे। 19 जून को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने उनके उम्मीदवारी की घोषणा की है। इस मामले में विपक्ष के सियासी उम्मीदों को झटका लगा। पहले यह माना जा रहा था कि आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत भाजपा की ओर से देश के सर्वोच्च पद के लिए उम्मीदवार होंगे और उनके मुकाबले विपक्ष एकजुट होगा। लेकिन भाजपा ने विपक्ष से एकजुट होने का संभावित मौका भी छीन लिया। वैसे यह महज संयोग नहीं है कि बीते 5 मई को पश्चिमी उत्तरप्रदेश के सहारनपुर जिले के शब्बीरपुर में दलितों का घर फ़ूंके जाने के बाद राष्ट्रीय स्तर पर दलितों का आक्रोश झेल रही भाजपा ने उत्तरप्रदेश के ही एक दलित को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया है।

बताते चलें कि महाराणा प्रताप जयंती मनाने के बहाने बाबा साहब डा भीम राव आंबेडकर के खिलाफ़ नारा लगाने को लेकर शब्बीरपुर गांव में दलितों और राजपूत समाज के लोगों के बीच तीखी नोंक-झोंक हो गयी थी। इस दौरान सुमित राणा नामक एक नौजवान घायल हो गया था, जिसकी बाद में मौत हो गयी थी। प्रतिशोध में राजपूत समाज के लोगों ने दलितों का घर जला दिया और व्यापक तौर पर नुकसान पहुंचाया था। इस क्रम में संत रविदास की प्रतिमा को नुकसान पहुंचाया गया था। इस मामले में 9 मई को भीम आर्मी के आह्वान पर सहारनपुर में बड़ी संख्या में दलितों ने विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान पुलिस के साथ नोंक-झोंक के बाद पूरे सहारनपुर में हिंसा हुई। इस मामले में भीम आर्मी के संस्थापक अधिवक्ता चंद्रशेखर आजाद उर्फ़ रावण को गिरफ़्तार किया जा चुका है और इसके विरोध में बीते 18 जून को बड़ी संख्या में दलित एक महीने के भीतर दूसरी बार जंतर-मंतर पर जुटे।

खैर वर्ष 1994 में राज्यसभा सांसद बनने से पहले रामनाथ कोविन्द मुख्य रुप से वकालत करते थे। हालांकि इससे पहले राजनीति में उनकी पहचान तब बनी जब वे 1977 में प्रधानमंत्री बने मोरारजी देसाई के निजी सचिव बने। वर्ष 1994 से लेकर 2006 तक राज्यसभा का सदस्य रहने वाले श्री कोविन्द को बाद में बीजेपी ने बिहार का राज्यपाल बनाया। सियासी गलियारे में उन्हें मुख्य रुप से राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का समर्थक बताया जाता है। बताया जा रहा है कि उन्हें आगे कर संघ ने एक तीर से दो निशाना साधा है। पहला यह कि राष्ट्रपति पद पर संघ का कब्जा होने के साथ ही देश में दलितों और पिछड़ों को संघ से जोड़ने की कवायद।
बहरहाल रामनाथ कोविन्द देश के दूसरे दलित राष्ट्रपति होंगे। 1997 में कांग्रेस और संयुक्त मोर्चा ने केरल के वरिष्ठ सांसद रहे के आर नारायणन को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया था। तब कांग्रेस की इस सियासी चाल का भाजपा ने भी समर्थन किया था। हालांकि तब शिवसेना ने अलग रुख अख्तियार करते हुए भूतपूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त रहे टी एन शेषण को उम्मीदवार बनाया और मतदान की नौबत आयी थी। तब श्री नारायणन को कुल 9,56,290 मत और शेषण को केवल 50,631 मत मिले थे।
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