शरद-नीतीश के बीच कुश्ती तय, 19 को होगी पहली भिड़ंत

देखना दिलचस्प होगा कि आगामी 19 अगस्त को पटना की धरती पर होने वाले राजनीतिक संग्राम का फलाफल जदयू में टूट के रूप में सामने आता है या नहीं। इसके अलावा यह भी महत्वपूर्ण होगा कि नीतीश कुमार को उनके ही मांद में ललकारने वाले शरद यादव को वह सफलता मिलती है या नहीं जिसका भरोसा उन्हें बिहार की जनता ने हाल ही उनके तीन दिवसीय यात्रा के दौरान दिया है

बिहार की राजनीति में एक बार फिर से भूचाल आना तय हो गया है। जाहिर तौर पर इस भूचाल के पहले एक महासंग्राम भी होना है। दिलचस्प यह है कि इस बार भूचाल के केंद्र में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और राज्यसभा सांसद सह पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद यादव होंगे। इससे भी महत्वपूर्ण यह कि राजद प्रमुख लालू प्रसाद भी परोक्ष रूप से अहम हिस्सा होंगे। दरअसल आगामी 19 अगस्त को जदयू (नीतीश गूट) और जदयू(शरद गूट) की राष्ट्रीय कार्यकारिणी अलग-अलग बैठकें होंगी। दोनों बैठकों का आयोजन स्थल पटना ही होगा। सूत्रों की मानें तो अपने गूट की बैठक में नीतीश कुमार शरद यादव को जदयू से बाहर का रास्ता दिखा सकते हैं तो दूसरी ओर शरद यादव उन्हें जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से बर्खास्त कर सकते हैं।

इस बीच राजद प्रमुख लालू प्रसाद ने बुधवार को पटना में संवाददाताओं से बातचीत में शरद यादव को खुलकर अपना समर्थन तो दिया ही, साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि श्री यादव सामाजिक न्याय के जाने-माने नेता हैं और यदि वे चाहें तो राजद में उनका स्वागत है। राजद उन्हें उनकी प्रतिष्ठा के मुताबिक सम्मान देगा। लालू प्रसाद ने यह भी कहा कि शरद जी के साथ आने से देश में सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ लड़ाई को मजबूती मिलेगी।

इसके पहले बुधवार को ही नई दिल्ली में शरद यादव ने संवाददाता सम्मेलन का आयोजन कर एक तरह से इसकी पुष्टि कर दी कि वे चुप नहीं बैठने वाले हैं। जदयू से निलंबित राज्यसभा सांसद अली अनवर के साथ प्रेस को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि देश में साझी संस्कृति को महफूज रखने के लिए समान विचारधाराओं वाले दलों के नेताओं को 17 अगस्त को होने वाले सम्मेलन के लिए आमंत्रित किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि आज देश में वे शक्तियां राज कर रही हैं जो रोहित वेमूला जैसे प्रतिभावान नौजवान को आत्महत्या के लिए मजबूर कर रहे हैं। वेमूला ने मरने से पहले कहा था कि दलित परिवार में जन्म लेना ही मेरा गुनाह है। शरद यादव ने लिंचिंग की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि आज पूरे देश में इंसान को दूसरे इंसान के खिलाफ भड़काया जा रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों को उन्होंने सम्मेलन में आमंत्रित किया है उनमें नीतीश कुमार भी शामिल हैं। वहीं सूत्रों की मानें तो इस सम्मेलन में राजद प्रमुख लालू प्रसाद भी शामिल हो सकते हैं

संवाददाता सम्मेलन में शरद यादव ने हालांकि अपने किसी रणनीति का खुलासा नहीं किया। बिहार को लेकर अपनी रणनीतियों का भी खुलासा करने से परहेज करते हुए उन्होंने कहा कि बिहार में जनादेश का अपमान किया गया है। वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पहले ही कह चुके हैं कि शरद यादव कहीं भी जाने के लिए स्वतंत्र हैं। अपने विरोधियों के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए उन्होंने राज्यसभा सांसद अली अनवर के अलावा बिहार में अपने दल के 21 नेताओं को पार्टी से निकाल दिया है। सूत्रों की मानें तो आगामी 19 अगस्त को राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में शरद यादव को औपचारिक तौर पर निकाला जायेगा।

इस पूरे मामले में राजनीतिक पेंच यहां फंसा है कि दोनों के अपने-अपने दावे हैं। मसलन नीतीश कुमार जिनका अपनी पार्टी की बिहार इकाई पर पूरा नियंत्रण है  तो दूसरी ओर 14 राज्यों में जदयू के संगठन पर शरद यादव का कब्जा है। बताया जा रहा है कि शरद यादव विभिन्न राज्यों के प्रदेश अध्यक्षों के समर्थन के आधार पर नीतीश कुमार को ही जदयू से बर्खास्त करने की घोषणा कर सकते हैं।

बहरहाल शरद यादव के सम्मेलन में नीतीश कुमार के विरोधियों की जमघट लगेगी। जिन प्रमुख नेताओं के इस सम्मेलन में भाग लेने की संभावना है उनमें जदयू के निलंबित सासंद अली अनवर के अलावा केरल से राज्यसभा सांसद वीरेंद्र कुमार, दलित चिंतक रतनलाल भी शामिल होंगे।

देखना दिलचस्प होगा कि आगामी 19 अगस्त को पटना की धरती पर होने वाले राजनीतिक संग्राम का फलाफल जदयू में टूट के रूप में सामने आता है या नहीं। इसके अलावा यह भी महत्वपूर्ण होगा कि नीतीश कुमार को उनके ही मांद में ललकारने वाले शरद यादव को वह सफलता मिलती है या नहीं जिसका भरोसा उन्हें बिहार की जनता ने हाल ही उनके तीन दिवसीय यात्रा के दौरान दिया है। इसके अलावा यह भी देखना महत्वपूर्ण होगा कि वर्तमान में भाजपा के साथ मिलकर चल रही सरकार की सेहत पर इसका कैसा असर पड़ेगा। वजह यह कि विधायकों की संख्या के लिहाज से राजद और कांग्रेस गठबंधन भी सत्ता से बहुत दूर नहीं है। मौजूदा परिस्थति में उसे केवल 11 विधायकों की आवश्यकता है। हाल ही में बहुमत प्रस्ताव के दौरान नीतीश कुमार के खिलाफ 111 मत पड़े थे। बिहार में सरकार बनाने के लिए न्यूनतम 122 विधायक होने आवश्यक हैं।


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