सत्ता बदलते ही बिहार में दलितों पर अत्याचार बढ़ा

बीते 25 नवंबर को भागलपुर के नवगछिया इलाके के झंडापुर गांव में एक दलित के घर में घुसकर तीन लोगों की नृशंस हत्या कर दी गयी। जवान बेटी को अर्द्धनग्न कर तबतक पीटा गया जबतक कि वह बेहोश नहीं हो गयी। पुलिस के मुताबिक इस घटना का गवाह कोई नहीं है। लेकिन क्या यह केवल सामान्य अपराध की घटना है या बिहार में सत्ता के बदले समीकरण का असर, बता रहे हैं नवल किशोर कुमार :

बिहार में सत्ता से राजद को बेदखल और हार के बावजूद सत्ता पर भाजपा को काबिज हुए अभी छह महीने नहीं हुए हैं। पूरे प्रदेश में दलितों पर अत्याचार की  घटनाओं में तेजी आयी है। विपक्ष इसे राज्य सरकार की विफलता करार दे रहा है तो सत्ता पक्ष कानून का राज होने का चिरपरिचित राग अलाप रहा है।

नहीं था एम्बूलेंस तो बिंदी कुमारी को ठेलागाड़ी पर लादकर ले जाया गया प्राथमिक अस्पताल (साभार हिन्दुस्तान, भागलपुर संस्करण)

बीते 25 नवंबर को बिहार के भागलपुर जिले के नवगछिया इलाके के झंडापुर गांव के दलित टोले में एक और नरसंहार को अंजाम दिया गया।

यह वहीं भागलपुर जिला है जहां अस्सी के दशक मं अंखफोड़वा कांड हुआ था। इसी कांड के आधार पर प्रकाश झा ने गंगाजल नामक फिल्म बनायी थी जिसमें पुलिस वाले आरोपियों की आंख में तेजाब डालते दिखाये गये हैं। बाद में स्थानीय लोगों ने भी तेजाब डालना शुरू कर दिया था।

एक दर्जन हथियारबंद अपराधियों ने झंडापुर दलित टोले में कनिक राम के घर में घुसकर उसकी पत्नी देवी और पुत्र छोटू की नृशंस हत्या कर दी।

अपराधियों ने कनिक राम(55 वर्ष) और उसके पुत्र छोटू(12 वर्ष) के सिर पर कुल्हाड़ी से वार किया और उनके सिर को ईंट-पत्थरों से कूच दिया।

कनिक राम की बेटी बिन्दी कुमारी(17 वर्ष) को अगले सुबह लोगों ने अर्द्धनग्न अवस्था में बेहोश पाया। जबकि उसकी मां मीना देवी (48 वर्ष) की लाश बगल में पड़ी थी और उसके कपड़े खून से रंगे पड़े थे। अपराधियों ने उसके पूरे शरीर को कुल्हाड़ी से काट डाला था और उसकी आंखें निकाल ली थी।

मृतकों के परिजनों को ढाढस बंधाते पूर्व विधानसभा अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी

पुलिस के मुताबिक बिन्दी कुमारी को पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया है। चिकित्सकीय जांच में उसके साथ बलात्कार की पुष्टि नहीं की गयी है। इसके अलावा मृतक परिवार के घर से किसी भी समान की लूट से भी पुलिस ने इन्कार किया है।

मृतक के बेटों को मिले बॉडीगार्ड

भागलपुर रेंज के डीआईजी विकास वैभव ने इस घटना के बारे में पूछने पर बताया कि मामले की जांच की जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि कनिक राम के दो बेटों संतोष राम और अखिलेश राम को सुरक्षा के लिहाज से बॉडीगार्ड उपलब्ध कराया गया है।

अपराधियों के सामने जनता से लेकर पुलिस तक की घिग्घी बंद

इतनी नृशंस घटना क्यों घटी? इस सवाल को लेकर 15 दिनों से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी स्थानीय पुलिस के पास कोई जवाब नहीं है।

मामले के अनुसंधान में जुटे नवगछिया के एसडीपीओ मुकुल रंजन ने दूरभाष पर फारवर्ड प्रेस को तफसील से बताया। उनका कहना है कि जिस दलित बस्ती में इस वारदात को अंजाम दिया गया, वहां 60 से अधिक घर हैं। मृतकों का घर बस्ती के बीच में है। किसी भी स्थानीय ग्रामीण ने इस बारे में कोई जानकारी नहीं होने की बात कही है।

दिनांक 11 जुलाई 2017 को रातोंरात सरकार में शामिल होने के पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ सुशील कुमार मोदी

एसडीपीओ स्वयं सवाल उठाते हैं कि यह कैसे हो सकता है कि अपराधी घर में घुसकर तीन-तीन लाेगों की हत्या कर देते हैं और पड़ोसियों को पता नहीं चलेगा। वह भी तब जबकि मृतक परिवार इंदिरा आवास में रहता था। पड़ोसियों के घर के दीवार उसके घर से जुड़े हैं।

वे यह भी कहते हैं कि अपराधियों ने जिस तरीके से वारदात को अंजाम दिया है, उसके मुताबिक संख्या में अधिक होने के बावजूद उन्हें कम से कम एक घंटा लगा होगा।

इस पूरी घटना को लेकर पुलिस पर राजनीतिक दबाव है। इससे इन्कार नहीं किया जा सकता है।

दुर्गा माता की कृपा होगी तो कसूरवार जरूर पकड़े जायेंगे

घटना के बारे में पूछने पर झंडापुर ओपी के प्रभारी जवाहरलाल सिंह ने बताया कि अनूपलाल सिंह नामक एक व्यक्ति को शक के आधार पर गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। लेकिन अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि हत्या क्यों की गयी। बाद में उन्होंने कहा कि वे अपनी तरफ से हत्या के कारणों की तलाश करने को पूरी मेहनत कर रहे हैं। अगर दुर्गा माता की कृपा होगी तो कारण भी पता चल जाएगा और अपराधी भी पकड़े जायेंगे।

1982 में भुमिहार टोले में बनाया गया था ओपी

दरअसल झंडापुर गांव भुमिहार बहुल गांव है। जबकि आसपास के गांवों में दलितों और पिछड़े वर्ग के लोगों की संख्या अधिक है। लेकिन इनमें से अधिकांश या तो सीमांत किसान हैं या फिर भूमिहीन खेत-मजदूर। मजदूरी को लेकर हिंसक संघर्ष यहां बहुत पहले से होता रहा है।

हिंसक संघर्ष को देखते हुए बिहार सरकार ने वर्ष 1982 में ही झंडापुर में ओपी(उप थाना) बनाया था। लेकिन यह उप थाना दलित बस्ती में न होकर भुमिहार टोले में स्थापित है। यह पूरा इलाका बिहपुर थाना के इलाके में आता है।

गांव वाले घटना के बारे में कोई बात नहीं बताते हैं, लेकिन वे यह जरूर कहते हैं कि उप थाना यदि दलितों के टोले में होता तो उनकी रक्षा हो सकती थी।

उदय नारायण चौधरी ने कहा – भाजपा के सरकार में शामिल होने से सवर्ण हुए बेखौफ

झंडापुर दलित टोले में हुए नरसंहार ने विपक्षी राजनेताओं को आकर्षित किया। इनमें सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ओर के नेता भी शामिल रहे।

सत्ता पक्ष की ओर से पूर्व विधानसभा अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी, भाजपा के पूर्व सांसद शाहनवाज हुसैन, बिहपुर के पूर्व विधायक शैलेन्द्र कुमार ने दलित टोला जाकर मामले की जानकारी ली। उदय नारायण चौधरी ने फारवर्ड प्रेस से दूरभाष पर कहा कि जबसे भाजपा सत्ता में आयी है, सवर्ण जाति के लोगों की दबंगई बढ़ गई है।

बीते 10 दिसंबर को छपरा के डूमरसन इलाके में उद्घाटन के तुरंत बाद तोड़ दी गयी आंबेडकर की मूर्ति

वहीं मुख्य विपक्षी दल राजद के त्रिपाठी नाथ, रामजी मांझी, सत्येंद्र पासवान और गुलाम रब्बानी के नेतृत्व में एक शिष्टमंडल ने घटनास्थल का दौरा किया। भाकपा माले के एक शिष्टमंडल ने भी मातमपुर्सी की। दलित टोले का दौरा करने वालों में पप्पू यादव भी शामिल रहे।

दौरा करने वाले अधिकांश नेताओं(सत्ता पक्ष को छोड़कर) ने घटना के लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया। वहीं भाकपा माले के नेताओं ने इस मामले में स्थानीय सामंती ताकतों को परोक्ष रूप से कसूरवार बताया।

दलितों की सबसे बड़ी समस्या है सामंतों का वर्चस्व

मृतक कनिक राम के बड़े बेटे संतोष राम ने दूरभाष पर बताया कि वह पश्चिम बंगाल में दिहाड़ी मजदूर है। घटना की जानकारी मिलने के बाद वह जब घर पहुंचा तब उसने आसपास के लोगों से पूछा। किसी ने कुछ नहीं बताया। संतोष के मुताबिक गांव में बेरोजगारी है। भुमिहार टोले के लोगों के पास जमीन है। वे हमलोगों से अपने खेतों में काम करवाना चाहते हैं, लेकिन वाजिब मजदूरी नहीं देते हैं। इसलिए गांव के दलित या तो मछली बेचकर अपना पेट पालते हैं या फिर बड़े शहरों में दिहाड़ी मजदूरी कर।

घटना की वजह कहीं मजदूरी तो नहीं? यह पूछने पर संतोष ने कहा कि उसे इस बात की जानकारी नहीं है कि आखिर किन कारणों से उसके माता-पिता और भाई की हत्या व बहन को बुरी तरह से जख्मी किया गया। लेकिन यह सच है कि पूरे इलाके में स्थानीय भुमिहार जाति के लोगों की दबंगई चलती है।

सत्ता में बदला समीकरण, बदल रहे हालात

बहरहाल पांच महीने पहले भाजपा के राज्य सरकार में साझेदार बनने का एक सामाजिक असर बिहार के गांवों में देखने को मिल रहा है। बीते 13 दिसंबर को  चंपारण के मैनाटांड इलाके में दबंग लोगों ने करीब पचास एकड़ जमीन पर लगी फसल को लूट लिया और जमीन पर कब्जा कर लिया।

इस जमीन पर लंबे समय से दलित खेती करते रहे हैं। लूटने और कब्जा करने के क्रम में दबंगों ने ताबड़तोड़ फायरिंग की और करीब एक किलोमीटर दूर थाना में पुलिस कान में तेल डालकर सोयी रही। इस घटना में करीब डेढ़ दर्जन लोग घायल हुए हैं।

इस संबंध में भाकपा माले के राज्य सचिव कुणाल ने स्थानीय विधायक व बिहार सरकार के गन्ना विकास मंत्री फिरोज उर्फ खुर्शीद आलम पर दबंगों को संरक्षण देने का आरोप लगाया है।

इस घटना से पहले 10 दिसंबर की रात में छपरा जिले के डूमरसन इलाके के कर्ण कुदरिया गांव में असामाजिक तत्वों ने बाबा साहब डॉक्टर भीम राव आंबेडकर की प्रतिमा को तोड़ दिया। प्रतिमा का अनावरण कुछ घंटों पहले सारण प्रमंडल के कमिश्नर नर्मदेश्वर लाल ने किया था।


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