ताकि कोई पत्थर न मार सके, सामाजिक कार्यकर्ताओं से बांड भरवा रहे नीतीश

लोकतंत्र में जनता को विरोध करने का अधिकार है। यह अधिकार विपक्षी दलों को भी हासिल है। लेकिन बिहार में इस अधिकार के हनन की कोशिशें की जा रही हैं। लोग विरोध न कर सकें, इसके लिए सरकार बांड भरवा रही है। इससे जुड़े तमाम पहलुओं के बारे में बता रहे हैं नवल किशोर कुमार :

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इन दिनों राज्य के सभी जिलों में अपने ही कार्यों की समीक्षा करने के लिए यात्रायें कर रहे हैं। खास बात यह है कि वे जिन जिलों में जा रहे हैं, वहां के सामाजिक कार्यकर्ताओं से पांच लाख रुपए का बांड अदालतों में भरवाया जा रहा है। ऐसा यह सुनिश्चित करने के लिए किया जा रहा है ताकि मुख्यमंत्री का कोई विरोध न कर सके। जाहिर तौर पर बांड विराेधी दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं से भरवाया जा रहा है।

नीतीश कुमार

पहले भी जनता का सामना करने से डरते रहे हैं नीतीश

यह पहली बार नहीं है जब नीतीश कुमार बिहार में ही अपनी सुरक्षा को लेकर इस तरह का कदम उठाते रहे हैं। इससे पहले वर्ष 2012 में विकास यात्रा के दौरान कई जिलों में स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों ने लोगों को काला कपड़ा पहन कर मुख्यमंत्री की सभा में शामिल होने पर रोक लगाया था। यहां तक कि छात्राओं के काले दुपट्टे भी उन दिनों उतरवा लिये जाते थे। इसके पीछे खगड़िया में हुई एक घटना थी जिसमें लोगों ने काला कपड़ा दिखाकर नीतीश कुमार का विरोध किया था।

नंदन गांव की घटना

बीते 12 जनवरी 2018 को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के काफिले पर बक्सर के डुमरांव थाने के नंदन गांव के दलित लोगों ने पत्थर बरसाया था। बिहार पुलिस के मुताबिक इस घटना में डेढ़ दर्जन पुलिसकर्मियों को चोट लगी थी। वहीं मुख्यमंत्री को एसएसजी (स्पेशल सिक्यूरिटी ग्रुप) जवानों ने बॉडी सुरक्षा देकर बचाया था।

बीते 12 जनवरी को नंदन गांव में सीएम के काफिले पर पथराव के बाद पुलिसिया कार्रवाई के खिलाफ प्रदर्शन करते भाकपा माले के सदस्य

इस घटना के बाद बिहार पुलिस ने नंदन गांव के लोगों पर जमकर कहर ढाया। जोनल आईजी नैयर हसनैन खां के मुताबिक इस मामले में अबतक 35 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। डेढ़ सौ से अधिक अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। हसनैन खां के अनुसार मुख्यमंत्री पर यह हमला एक सुनियोजित साजिश थी। इसके पीछे वह तर्क देते हैं कि पत्थरबाजी के दौरान जिस तरह का पत्थर इस्तेमाल किया गया, उस तरह के पत्थर गांव में नहीं थे। पत्थरबाजी के लिए पत्थर पहले से ही गांव में एकत्रित किये गये थे।

पक्ष-विपक्ष आमने-सामने

इस घटना को लेकर राजनीति भी खूब की जा रही है। विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने इसे जनता का विरोध और नीतीश सरकार की असफलता करार दिया है। साथ ही उन्होंने पुलिस द्वारा नंदन गांव के दलिातें पर ढाये जा रहे कहर की आलोचना की। उन्होंने कहा है कि नीतीश कुमार आत्ममुग्धता के शिकार हैं। सच्चाई यह है कि उनके राज में बिहार में विकास हुआ ही नहीं है। जो है वह सब केवल मीडिया की देन है।

विपक्ष के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव और उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी

वहीं उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी इस घटना के लिए राजद को जिम्मेवार माना है। उनके मुताबिक राजद नेताओं ने जनता को मुख्यमंत्री पर पथराव करने के लिए उकसाया।

जबकि राजद के वरिष्ठ नेता व पूर्व सांसद जगदानंद सिंह ने नंदन गांव का दौरा करने के बाद बताया कि पूरी घटना के मूल में राज्य सरकार की विफलता है। नंदन गांव के दलित मुख्यमंत्री से अपने गांव चलकर विकास की असलियत देखने की मांग कर रहे थे। जबकि मुख्यमंत्री नंदन गांव के ही एक जाति विशेष टोले में हुए रंग-रोगण का मुआयना करने गये थे। जगदानंद सिंह के अनुसार जनता आक्रोशित नहीं होती यदि स्थानीय प्रशासन ने उन्हें मुख्यमंत्री से गुहार लगाने से नहीं रोका होता। मुख्यमंत्री भी उनकी बात सुने बगैर आगे बढ़ गये। इसके बाद स्थानीय प्रशासन ने नंदन गांव के दलितों पर लाठीचार्ज कर दिया। इससे बात बिगड़ गई।

नंदन गांव में दलितों से मिलते राजद के वरिष्ठ नेता व पूर्व सांसद जगदानंद सिंह

पथराव की घटना से पहले ही भरवाया जा रहा है बांड

बक्सर में जनता के आक्रोश के चरम पर पहुंचने के बाद राज्य सरकार और उसका तंत्र सचेत हो गया है। अब सामाजिक कार्यकर्ताआें और विरोधी नेताओं से बांड भरवाया जा रहा है। एक बांड अजीत कुशवाहा से भरवाया गया। अजीत भाकपा माले के राज्य कमिटी के सदस्य हैं। बीते 11 जनवरी को न्यायालय अनुमंडल दंडाधिकारी, जगदीशपुर द्वारा एक मुकदमा दर्ज किया गया। इसमें लिखा है – “ऐसी गुप्त जानकारी प्राप्त हुई है कि आपलोगों के द्वारा संभावित माननीय मुख्यमंत्री यात्रा के दौरान बाधा उत्पन्न करने एवं विधि व्यवस्था भंग करने की योजना बना रहे हैं, जिससे शांति भंग होने की संभावना है। मुझे विश्वास है कि आपलोगों के द्वारा उक्त अवधि में शांति भंग करके विधि व्यवस्था की समस्या उत्पन्न कर सकते हैं। मुकदमे से संबंधित एक नोटिस में लिखा गया है कि शांति व्यवस्था बनाये रखने हेतु आप लोगों के विरूद्ध धारा 107 की कार्रवाई प्रारंभ की जाती है तथा आपलोगों को आदेश दिया जाता है कि आप दिनांक 13 जनवरी 2018 को 11 बजे पूर्वाह्न तक अनुमंडल न्यायालय में हाजिर होकर शांति बनाये रखने हेतु पांच लाख रुपए का बंध पत्र दाखिल करें।”

एसडीओ कोर्ट, जगदीशपुर द्वारा जारी नोटिस

अजीत कुशवाहा ने नहीं भरा बांड

जगदीशपुर एसडीओ कोर्ट द्वारा जारी नोटिस के बारे में अजीत कुशवाहा ने बताया कि राज्य सरकार जनता से विरोध का अधिकार छीन लेना चाहती है। उन्होंने बताया कि स्थानीय प्रशासन ने उन्हें नोटिस जारी कर पांच लाख रुपए का बांड भरने का निर्देश दिया था। उन्होंने कहा कि एक दिन पहले उन्होंने घोषणा किया था कि उनकी पार्टी मुख्यमंत्री के दौरे का विरोध करेगी। बांड भरने के संबंध में उन्होंने कहा कि उन्होंने एसडीओ कोर्ट के निर्देश को नहीं माना।

अजीत कुशवाहा : भाकपा माले के राज्य कमेटी के सदस्य

सत्तापक्ष का जवाब

मुख्यमंत्री की यात्रा के पहले सामाजिक कार्यकर्ताओं से बांड भरवाने के संबंध में पूछने पर जनता दल यूनाईटेड के प्रदेश प्रवक्ता नीरज कुमार बताते हैं कि प्रशासन की यह सामान्य प्रक्रिया है। दशहरा, होली, ईद और स्वतंत्रता दिवस आदि के मौकों पर प्रशासन एहतियात के तौर पर उन लोगों के खिलाफ 107 के तहत मुकदमा दर्ज करती है, जिनसे शांति व्यवस्था भंग होने की संभावना रहती है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जनता से डरते हैं, यह बेमानी बात है।

बहरहाल बिहार भाकपा माले के राज्य सचिव कुणाल के मुताबिक नीतीश कुमार देश के पहले ऐसे मुख्यमंत्री हैं जो जनता से इस कदर डरते हैं। यह उनकी विफलता है। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में विरोध करना हर किसी का अधिकार है। सरकार विरोध को खत्म कर देना चाहती है।


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