e n

क्षमा करें, इस अंग्रेजी लेख का हिंदी अनुवाद अनुपलब्ध है

फारवर्ड प्रेस वेब पोर्टल के अतिरिक्‍त बहुजन मुद्दों की पुस्‍तकों का प्रकाशक भी है। एफपी बुक्‍स के नाम से जारी होने वाली ये किताबें बहुजन (दलित, ओबीसी, आदिवासी, घुमंतु, पसमांदा समुदाय) तबकों के साहित्‍य, सस्‍क‍ृति व सामाजिक-राजनीति की व्‍यापक समस्‍याओं के साथ-साथ इसके सूक्ष्म पहलुओं को भी गहराई से उजागर करती हैं। एफपी बुक्‍स की सूची जानने अथवा किताबें मंगवाने के लिए संपर्क करें। मोबाइल : +919968527911, ईमेल : info@forwardmagazine.in

फारवर्ड प्रेस की किताबें किंडल पर प्रिंट की तुलना में सस्ते दामों पर उपलब्ध हैं। कृपया इन लिंकों पर देखें :

बहुजन साहित्य की प्रस्तावना 

 जाति के प्रश्न पर कबी

महिषासुर : मिथक और परंपराएं

चिंतन के जन सरोकार 

महिषासुर : मिथक व परंपराए

About The Author

Haribhau Rathod

Haribhau Rathod is the national president of Rashtriya Banjara Kranti Dal and a former MP and MLC.

Related Articles

राजस्थान : मतदाता से दावेदार बने बावरी समाज के राजनीतिक आत्मविश्वास की कहानी
बावरी (दलित) समुदाय की चार महिला विधायकों के विधानसभा पहुंचने का प्रभाव केवल चुनावी राजनीति तक सीमित नहीं रहा। दोनों जिलों में पंचायत चुनावों...
बिहार : भरत तिवारी एनकाउंटर पर चढ़ा जाति का रंग
हालिया एनकाउंटर में मारे गए व्यक्ति का नाम भरत तिवारी है, जो ब्राह्मण जाति का है। एक ब्राह्मण की हत्या के बाद ब्राह्मण नेताओं...
किस ‘प्रशासनिक’ कारण से नहीं दिए जा रहे डॉ. आंबेडकर के नाम पर पुरस्कार?
पुरस्कार से प्रोत्साहन का संचार होता है। शायद दलितों के बीच काम करने वालों को प्रोत्साहन की राजनीतिक जरूरत नहीं रह गई है। उनके...
संगठित होने के बजाय बिखराव की राह पर आंबेडकरवादी संगठन
यदि शासक बनना है तो सबसे पहले काम यह करना होगा कि बहुजन जातियों में एकता लानी होगी, कम-से-कम बहुजन नेता आपस में एकजुट...
वर्ग-जाति अंतर्संबंध और सामाजिक न्याय आंदोलन की चुनौतियां
फुले, पेरियार और आंबेडकर के आंदोलन केवल पहचान के आंदोलन नहीं थे। उनके केंद्र में मनुष्य की गरिमा, बराबरी और अधिकार का प्रश्न था।...