ओबीसी को भी संबोधित करेंगे राहुल गांधी

राहुल गांधी आगामी 11 जून को ओबीसी अधिवेशन को संबोधित करेंगे। इससे पहले वह 6 जून को मध्य प्रदेश के मंदसौर में किसानों को संबोधित करेंगे। गत 23 अप्रैल को उन्होंने दलित समाज के सम्मेलन को संबोधित किया था। क्या है कांग्रेस की ‘ओबीसी’ नीति? बता रहे हैं प्रेम बरेलवी :

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने 2019 के आम चुनावों की तैयारी प्रारम्भ कर दी है। इसके तहत वह रणनीतिक रूप से उन राज्यों में प्रमुखता से ध्यान दे रहे हैं, जिन राज्यों में आगामी लोकसभा से पहले विधानसभा चुनाव होने की संभावना है।

कांग्रेस के संगठन महासचिव अशोक गहलोत इसके लिए राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा और छत्तीसगढ़ में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/ओबीसी वर्ग के लोगों के साथ-साथ किसानों को एकजुट करने का काम कर रहे हैं। हालांकि, इस अभियान की शुरुआत संविधान बचाओ अभियानके नारे के साथ 23 अप्रैल को दलित रैली को संबोधित करके कांग्रेस अध्यक्ष कर चुके हैं। दलित रैली के बाद किसान रैली तथा ओबीसी अधिवेशन के संबोधन की तैयारी से लगता है कि 2019 के लोकसभा चुनाव की शुरुअात उन्हीं मुद्दों से करना चाहते हैं, जो मुद्दे उस वर्ग के हैं, जिसको विकास का भरोसा देकर नरेंद्र मोदी ने सत्ता हासिल की थी। फिलहाल वह पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष तथा अपनी माँ सोनिया गांधी के साथ उनके इलाज के लिए विदेश में हैं।

एक रैली के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी (फाइल फोटो)

ओबीसी के पहले किसान रैली  

कांग्रेस सूत्रों की मानें तो राहुल गांधी विदेश से 6 जून से पहले ही स्वदेश लौट आएंगे। क्योंकि, 6 जून को वह मध्य प्रदेश के मंदसौर में किसानों की रैली को संबोधित करेंगे।

इसके बाद 11 जून को वह दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में पिछड़ा वर्ग से जुड़े एक अधिवेशन को संबोधित करेंगे। इस अधिवेशन का आयोजन कांग्रेस के ओबीसी प्रकोष्ठ की ओर से किया जाएगा। कांग्रेस के ओबीसी विभाग के अध्यक्ष ताम्रध्वज साहू के अनुसार, ओबीसी वर्ग के अखिल भारतीय अधिवेशन को संबोधित करने के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष ओबीसी समाज के मुद्दों पर वक्तव्य देंगे। इस दौरान ओबीसी वर्ग भी अपने मुद्दों को उनके समक्ष रखेगा। कार्यक्रम का ब्यौरा जल्द तैयार कर लिया जाएगा।

इसके अलावा, इन दिनों मध्य प्रदेश अध्यक्ष और सांसद कमलनाथ का भी एक पत्र वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने राहुल से राज्य में 26 जून को पार्टी के पूर्व नेता और मुख्यमंत्री रहे सुभाष यादव की पुण्यतिथि कार्यक्रम में शामिल होने की गुज़ारिश की है। इस कार्यक्रम में राहुल गांधी जाएंगे या नहीं, इस बात की फिलहाल कोई जानकारी नहीं है। लेकिन, इस पर चर्चा ज़रूर गरमा गयी है। हिंदी समाचार समाचार पत्र दैनिक भास्कर के अनुसार, इस चिट्ठी में कमलनाथ ने राहुल को बरसी पर आमंत्रित करते हुए लिखा, “स्व. सुभाष यादव मध्यप्रदेश के पूर्व उप मुख्यमंत्री और प्रमुख ओबीसी नेता रहे हैं। 26 जून को खरगोन जिले के कसरावत में उनकी बरसी का कार्यक्रम है। मध्य प्रदेश में बड़ी संख्या में ओबीसी वर्ग के लोग रहते हैं, इस कार्यक्रम में भी भारी संख्या में लोगों के शामिल होने का अनुमान है। चुनाव के मद्देनजर यह निमाड़-मालवा क्षेत्र का महत्वपूर्ण कार्यक्रम होगा, जिसमें 61 असेंबली सीटें आती हैं। आपसे निवेदन है कि ‘संविधान बचाओ-देश बचाओ’ नाम के इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में शामिल हों।”

सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस के किसी बड़े नेता ने कमलनाथ से यह चिट्ठी लिखवाई और उसके बाद पत्र मीडिया में सार्वजनिक कर दिया। इसके बाद कांग्रेस में हड़कंप मच गया। हालांकि, अभी किसी का नाम सामने नहीं आया है।

भाजपा ने उठाये सवाल

वहीं, कमलनाथ की चिट्ठी पर भाजपा ने आरोप लगाया कि कमलनाथ द्वारा राहुल गांधी को लिखे पत्र से उजागर होता है कि कमलनाथ स्व. सुभाष यादव को केवल वोट बैंक का कारण मानते हैं। भाजपा प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल ने कहा है कि कांग्रेस उनके पुत्र अरुण यादव सचिन यादव और पूरे यादव समाज का अपमान कर रही है। वह स्व. सुभाष यादव की श्रद्धांजलि सभा को भी वोट बैंक का कारण मानती है। यह सरासर स्व. सुभाष यादव का भी अपमान है। उन्होंने कहा कि पिछड़े वर्ग का लगातार अपमान और भेदभाव करने वाली कांग्रेस की असलियत गाहे-बगाहे उजागर हो ही जाती है। कमलनाथ की अध्यक्षता में कांग्रेस के ही पिछड़े वर्ग के नेताओं का अपमान लगातार हो रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

फिलहाल, राजनीतिक गलियारों में राहुल गांधी के द्वारा पिछड़ा वर्ग के इस अधिवेशन को लेकर सुगबुगाहट शुरू हो गई है। उल्लेखनीय है कि देश में ओबीसी बड़ा वोट बैंक है और पार्टी इसको भुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती। 2014 के चुनावों में भाजपा को ओबीसी मतदाताओं ने बड़ी संख्या में समर्थन दिया था।

भाजपा की आरक्षण विरोधी नीति को ऐसे जवाब देगी कांग्रेस

उत्तर प्रदेश कांग्रेस के ओबीसी प्रकोष्ठ के मुख्य प्रवक्ता डॉ. अनूप पटेल ने इस बारे में बताया कि कांग्रेस का ओबीसी प्रकोष्ठ पहले से बना हुआ था। इसे फिर नये सिरे से संगठित किया गया है। अभी जो 11 जून को ओबीसी अधिवेशन होगा, उसमें पार्टी से यह मांग की जाएगी कि मुख्य कार्यकारिणी के साथ-साथ पार्टी के अंदर भी और टिकट वितरण में भी आबादी के हिसाब से ओबीसी वर्ग के लोगों को जगह मिलनी चाहिए। तभी हम ओबीसी आरक्षण के साथ छेड़छाड़ करने वाली मोदी सरकार को जवाब दे सकेंगे। क्योंकि ओबीसी वर्ग के लिए निर्धारित आरक्षण से मोदी सरकार छेड़छाड़ कर रही है। जिस तरीके से आरक्षण को महत्वहीन बनाने की साजिश की जा रही है, उससे ओबीसी वर्ग अपने हक़ से वंचित होगा। हाल ही में विश्वविद्यालय स्तर पर निकलने वाली रिक्तियों के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने जो विगागीय स्तर पर भर्तियां करने का रोस्टर सिस्टम वाला फैसला सुनाया था, उससे दलित/आदिवासी/ओबीसी का बड़ा नुकसान होगा। पहले किसी विश्वविद्यालय में अगर 50 पदों पर रिक्तियां निकलती थीं, तो उसमें से कम से कम 13 पद ओबीसी के आवेदकों के लिए, कम से कम 7 पद अनुसूचित जाति के आवेदकों के लिए तथा कम से कम 3 पद अनुसूचित जनजाति के आवेदकों के लिए आरक्षित होते थे। अब उन्हीं 50 रिक्तियों को विभागों के हिसाब से बांट दिया जाएगा। ऐसे में आरक्षित वर्गों के लिए किसी विभाग में एक पद रिक्त होगा, किसी में दो, किसी में तीन-चार, तो उसमें इन वर्गों से संबंध रखने वाले बच्चों को मौका ही नहीं मिलेगा। मान लीजिए किसी विभाग में 10 रिक्तियां निकलीं, तो उसमें दो ओबीसी के अभ्यर्थी आ पाएंगे। एक पद पर एससी का अभ्यर्थी भर्ती हो पाएगा और एसटी का तो पता ही नहीं। कहीं पांच रिक्तियां निकलती हैं तो ओबीसी से एक बच्चा ही आ पाएगा, एससी/एसटी को मौका ही नहीं मिलेगा। यानी इस सरकार में ओबीसी आरक्षण को पूरी तरह से कमजोर किया जा रहा है। हालांकि, जनता के विरोध के कारण केंद्र सरकार बैकफुट पर आयी और उसने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

अनूप बताते हैं कि डीओपीटी (डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग) जो मंत्रालय है, जिसे प्रशासनिक एवं कार्मिक मामलों का मंत्रालय कहते हैं। भाजपा सांसद जितेंद्र सिंह इसके मंत्री हैं। उस विभाग ने दो साल में दो-तीन बार नोटिस जारी किया है कि बैकलॉग की जो रिक्तियां थीं, अब वो भरी नहीं जाएंगी। सवाल यह है कि बैकलॉग किसका बचा है? वह ओबीसी का बचा है और अब उसको भरा नहीं जा रहा है। तो यह सब होने से नुकसान किसका होगा? ओबीसी वर्ग का होगा। सबसे बड़ी बात यह है कि मोदी जब लोकसभा चुनाव के लिए मैदान में उतरे थे, तो उन्होंने यह कहा था कि वह ओबीसी के बेटे हैं। जबकि ओबीसी का सबसे अधिक नुकसान उन्होंने ही किया है। दूसरी बात, एक ही वर्ग के आरक्षण को बांटकर यह ओबीसी में ही फूट डालने की चाल चल रहे हैं। यानी ओबीसी के खिलाफ ओबीसी को ही खड़ा करना चाहते हैं। और कांग्रेस यह नहीं होने देगी।

 

(कॉपी एडिटर : नवल)


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