बहुजन आजाद पार्टी : इंजीनियरों के घर झगड़ा भारी

आईआईटी के दलित और ओबीसी युवा इंजीनियरों की बहुजन आजाद पार्टी अपने अस्तित्व में आने के पहले ही विवादों में घिर गयी है। इसके संस्थापक सदस्य विक्रांत वत्सल को पार्टी से बाहर कर दिया गया है। पूरी कमान अब नवीन के हाथों में है। उनके उपर भी गंभीर आरोप लग रहे हैं। नवल किशोर कुमार की रिपोर्ट

‘बाप’ से विक्रांत वत्सल बाहर, नवीन गुट के हाथों में पार्टी

कुछ दिन पहले ही एक खबर ने पूरे देश में खलबली मचा दी थी। खबर थी कि पारंपरिक राजनीतिक दलों के मुकाबले अब आईआईटी से पास आउट युवा अपनी लाखों की नौकरी छोड़कर राजनीति करेंगे। खबर के अनुसार आईआईटी के पचास युवाओं ने बहुजन आजाद पार्टी यानी ‘बाप’ का गठन किया है और वे अगले वर्ष होने वाले लोकसभा चुनाव में तो नहीं लेकिन 2020 में बिहार में होने वाले चुनाव में भाग लेंगे।

देश भर में इस खबर को हाथों-हाथ लिया गया। बहुजन युवाओं को इस खबर ने खासा उत्साहित किया था। कुछ तो बहुजन आजाद पार्टी को पारंपरिक राजनीतिक दलों का ‘बाप’ कहने लगे थे।

कुछ दिनों में ही टूट गयी दोस्ती, पार्टी का हुआ बंटाधार : नवीन कुमार और विक्रांत वत्सल अपने साथियों के साथ

दरअसल दलित बहुजन युवाओं को इस खबर के कारण उत्साहित होने की एक बड़ी वजह यह भी रही कि भीम आर्मी के शीत निद्रा में चले जाने के बाद वे मायूस हो चले थे। चंद्रशेखर रावण पर रासुका लगाकर उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने रावण को ही जेल में नहीं रखा बल्कि भीम आर्मी को भी  हाइबरनेशन में जाने के लिए मजबूर कर दिया। बसपा प्रमुख मायवती ने भी भीम आर्मी को बदनाम करने में कोई कसर नहीं छोडी। ऐसे में बहुजन आजाद पार्टी से एक बड़ी उम्मीद लाजमी थी।

खैर यह बीते समय की बात हो गयी है। ताजा खबर यह है कि बहुजन आजाद पार्टी बनने के पहले ही टूट चुकी है। सोशल मीडिया पर इसकी छवि को बट्टा तो लगा ही है, उन्हें भी इसका मलाल हो रहा है जो ‘बाप’ से उम्मीद लगाये बैठे थे। हालत यह हो गयी है कि अभी ही यह दो गुट में बंट चुकी है। एक गुट का नेतृत्व विक्रांत वत्सल कर रहे हैं जो  इस पार्टी के स्वंभु संस्थापक हैं। प्रारंभ वे इसी रूप में मीडिया के सम्मुख प्रकट हुए थे। जबकि दूसरा गुट नवीन कुमार के जिम्मे है। चे-गवेरा की टोपी पहने इस नौजवान ने खुद को बहुजन आजाद पार्टी का सर्वेसर्वा घोषित कर लिया है और विक्रांत वत्सल को कथित रूप से अपनी पार्टी से निकाल बाहर किया है। आप कह सकते हैं कि इनकी छोटी सी कहानी में वे सारे मसाले मौजूद हैं, जो जार्ज-शरद-नीतीश  के लंबे उपन्यास में रहे हैं!

दोनों गुट लगा रहे हैं एक-दूसरे पर आरोप

सोशल मीडिया पर दोनों गुटों के बीच जारी जंग को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। विक्रांत वत्सल अपने आरोप में कहते हैं कि नवीन कुमार ने पार्टी फंड में आने वाले पैसे का इस्तेमाल निजी कार्यों के लिए किया है। उनके मुताबिक करीब 11 करोड़ रुपए की धनराशि बहुजन आजाद पार्टी के फंड में आयी। वे नवीन कुमार पर अपने परिजनों के साथ मिलकर पार्टी और फंड हड़पने का आरोप भी लगाते हैं। वे कहते हैं कि नवीन कुमार ने अपने दो रिश्तेदार (भाई और बहनोई) के साथ मिलकर साजिश रची। जिसका विरोध करने पर नवीन ने उन्हें ही पार्टी से बाहर कर दिया।

नवीन कुमार अब हैं बहुजन आजाद पार्टी के सर्वेसर्वा

पहले उनके सहयोगी और अब विरोधी नवीन कुमार जवाबी हमले में आरोपों की झड़ी लगाते हैं। उनका आरोप है कि  विक्रांत पार्टी से प्रति महीने तीस हजार रुपए वेतन मांग रहे थे। उनके मुताबिक विक्रांत के पास दिल्ली में तीन फ्लैट हैं। इनमें से एक फ्लैट के लिए लिये गए लोन की किस्त जमा करने के लिए उन्हें हर महीने पैसे की दरकार होती है। वे चाहते हैं कि पार्टी इस लोन की भरपाई करे।  नवीन कहते हैं कि पहले दो महीने तो उन्होंने किसी तरह अपनी जेब से विक्रांत को पैसे दिये। लेकिन जब उनके पास पैसे नहीं रहे तो उन्होंने अपने हाथ खड़ा कर दिया। तब विक्रांत ने मनगढ़ंत आरोप लगाया।

नवीन के सहयोगी और कथित कोषाध्यक्ष अखिलेश सरकार इस बारे में बताते हैं कि विक्रांत ने इसके पहले भी कई मौकों पर पार्टी फंड में मिली धनराशि का दुरूपयोग किया। उन्होंने बताया कि पार्टी चलाने के लिए जनसहयोग हेतु बैंक खातों का विवरण सोशल मीडिया पर जारी किया गया। इनमें से एक खाता विक्रांत वत्सल का भी था। लेकिन उनके खाते में पैसा जमा होते ही विभिन्न बैंकों द्वारा पैसे निकाल लिए जाते हैं। इसके अलावा वे यह भी आरोप लगाते हैं कि विक्रांत पार्टी फंड के पैसे को निजी पैसे की तरह व्यवहार में लाना चाहते थे।

अब अलग-अलग ‘बाप’

गौर तलब है कि बहुजन आजाद पार्टी का गठन औपचारिक तौर पर नहीं हुआ है। इसके गठन हेतु निर्वाचन आयोग को आवेदन दिया गया है। लेकिन ताजा विवाद के कारण गठन भी खटाई में पड़ गया है। हालांकि दोनों गुटों ने अपने-अपने स्तर से इस पार्टी को जिंदा रखने की बात कही है। सोशल मीडिया पर इस संबंध में दोनों गुटों द्वारा दावे किये जा रहे हैं। मसलन एक ओर बिना निर्वाचन आयोग की मान्यता के ही विक्रांत वत्सल सोशल मीडिया पर अगले वर्ष होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए संदेश जारी कर रहे हैं कि जो व्यक्ति बहुजन आजादी पार्टी के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ना चाहते हैं, वे संपर्क करें। वहीं नवीन कुमार का गुट भी पीछे नहीं है। वे भी विभिन्न राज्यों में अपनी ईकाइयां बना रहे हैं।

बहरहाल, इन घटनाओं से बहुजन आजाद पार्टी को लेकर बन रही उम्मीदों को झटका तो लगा ही है। इसके लिए बाप का कौन गुट जिम्मेवार है और कौन पाक साफ, यह तो विक्रांत वत्सल और नवीन कुमार ही बता सकते हैं। संख्या बल और राजनीतिक सक्रियता को देखें तो फिलहाल नवीन गुट बेहतर स्थिति में लगता है, लेकिन चुनावों तक क्या होगा, यह तो समय ही बताएगा।


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