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भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक प्रारंभिक आंदोलन जिसे आज तक चुहाड़ के अपशब्द से मुक्ति नहीं मिली

पश्चिम बंगाल के पुरूलिया जिले के जंगल महल में आदिवासियों द्वारा शोषक अंग्रेजों के खिलाफ छेड़े गये व्यापक जन विद्रोह को आज क्यों याद नहीं किया जाता? क्या यह ऐसा इसलिए है क्योंकि बंगाल के तथाकथित सवर्ण भद्रजन उन लोगों के नायकत्व को स्वीकार नहीं करना चाहते हैं जिन्हें वे आजतक पारंपरिक रूप से असभ्य, जंगली और शैतान मानते हैं

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महिषासुर एक जननायक’

महिषासुर : मिथक व परंपराए

बहुजन साहित्य की प्रस्तावना 

दलित पैंथर्स : एन ऑथरेटिव हिस्ट्री : लेखक : जेवी पवार 

जाति के प्रश्न पर कबी

चिंतन के जन सरोकार

लेखक के बारे में

अभिजीत गुहा

अभिजीत गुहा कोलकाता के इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलपमेंट स्टडीज में वरिष्ठ आईसीएसएसआर फेलो हैं। वे शांतनु पांडा के साथ ‘क्रिमिनल ट्राइब टू प्रिमिटिव ट्राइबल ग्रुप एंड द रोल ऑफ़ वेलफेयर स्टेट: द केस ऑफ़ लोधास इन वेस्ट बंगाल’ (2015) शीर्षक पुस्तक के सहलेखक हैं।

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