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भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक प्रारंभिक आंदोलन जिसे आज तक चुहाड़ के अपशब्द से मुक्ति नहीं मिली

पश्चिम बंगाल के पुरूलिया जिले के जंगल महल में आदिवासियों द्वारा शोषक अंग्रेजों के खिलाफ छेड़े गये व्यापक जन विद्रोह को आज क्यों याद नहीं किया जाता? क्या यह ऐसा इसलिए है क्योंकि बंगाल के तथाकथित सवर्ण भद्रजन उन लोगों के नायकत्व को स्वीकार नहीं करना चाहते हैं जिन्हें वे आजतक पारंपरिक रूप से असभ्य, जंगली और शैतान मानते हैं

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महिषासुर एक जननायक’

महिषासुर : मिथक व परंपराए

बहुजन साहित्य की प्रस्तावना 

दलित पैंथर्स : एन ऑथरेटिव हिस्ट्री : लेखक : जेवी पवार 

जाति के प्रश्न पर कबीर

चिंतन के जन सरोकार

लेखक के बारे में

अभिजीत गुहा

अभिजीत गुहा विद्यासागर विश्वविद्यालय के नृवंशशास्त्र विषय के पूर्व अध्यापक व इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलपमेंट स्टडीज, कोलकाता में पूर्व वरिष्ठ आईसीएसएसआर फेलो रहे हैं। वे 'नेशन बिल्डिंग इन इंडियन एंथ्रोपोलॉजी : बियांड द कोलोनियल एनकाउंटर' (रूटलेज/मनोहर, 2003) पुस्तक के लेखक हैं।

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