देवाशीष जरारिया : मध्यप्रदेश में दलित राजनीति का नया चेहरा

मध्य प्रदेश में बसपा के युवा नेता देवाशीष जरारिया ने कांग्रेस की सदस्यता स्वीकार कर ली है। उनके इस फैसले से बसपा की उम्मीदों को झटका लगा है तो कांग्रेस के लिए यह सकारात्मक खबर है। फारवर्ड प्रेस की खबर :

मध्य प्रदेश की राजनीति लंबे समय तक सवर्ण वर्चस्व के गिरफ्त में रही है, लेकिन बहुजन वर्ग से दमदार युवा नेतृत्व के उभार से यह वर्चस्व अब ढीला पड़ने लगा है। इसी कड़ी में एक नाम देवाशीष जरारिया का है।

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव नजदीक आ गये हैं, लेकिन खास बात यह है कि हर दिन राज्य की राजनीति में दिलचस्प उथल-पुथल भी देखने को मिल रहे हैं। हालांकि राज्य में कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ही स्पष्ट रूप से दो बड़े दल हैं और दोनों ही अपनी-अपनी जीत की दावेदारी कर रहे हैं, लेकिन बसपा और अन्य क्षेत्रीय दलों की सक्रियता ने कांग्रेस-भाजपा की नींद हराम कर दी है। भाजपा जहां डेढ़ दशक से सत्तारूढ़ है तो कांग्रेस लंबे अंतराल के बाद अपनी वापसी के सपने संजो रही है।

इसी सिलसिले में कांग्रेस ने मध्यप्रदेश के जिग्नेश मेवाणी कहे जाने वाले ‘देवाशीष जरारिया’ को अपने साथ जोड़ने में सफलता हासिल की है। देवाशीष जरारिया मध्यप्रदेश में दलित राजनीति में एक बड़े युवा चेहरे के रूप में पहचाने जाते हैं और युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हैं।

कौन हैं देवाशीष जरारिया

देवाशीष जरारिया मध्यप्रदेश में अनुसूचित जाति, जनजाति कर्मचारी संगठन (अजाक्स) के महासचिव डॉ. पी.सी. जाटव के बेटे हैं। 26 साल के देवाशीष जरारिया दिल्ली में रहकर आईएएस की तैयारी करते हैं। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के लिए इन्होंने 6 लाख युवाओं को जोड़ने का रिकार्ड बनाया है। मूलत: ग्वालियर के रहने वाले देवाशीष युवाओं के बीच इसलिए ज्यादा लोकप्रिय हैं कि उन्होंने कई टीवी चैनलों पर भाजपा के संबित पात्रा और कुछ तेजतर्रार एंकरों की बोलती बंद कर दी थी।

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देवाशीष के कांग्रेस से जुड़ने के पीछे मध्य प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का कांग्रेस से गठबंधन न करना बताया जा रहा है। मध्य प्रदेश में बतौर बसपा के युवा टीम के लीडर देवाशीष बीते कुछ महीनों से लगातार सुर्खियों में बने हुए थे। वह अक्सर देश के बड़े टेलीविजन चैनलों में बतौर बसपा प्रवक्ता के रुप में हिस्सा लेते रहे हैं। ऐसे में देवाशीष का कांग्रेस से जा मिलना बसपा के लिए एक झटका माना जा रहा है, क्योंकि ग्वालियर-चंबल के जिस इलाके से वे आते हैं वहां बसपा का खासा आधार है।

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राजनैतिक विश्लेषक मानते हैं कि देवाशीष मध्यप्रदेश की राजनीति में दलित समाज का एक प्रमुख और स्वीकार्य चेहरा बन चुके हैं इसलिए भी कांग्रेस ने बिना मौका गंवाए उन्हें पार्टी में शामिल कर लिया। मध्य प्रदेश में जहां दलित समुदाय की आबादी 15.6 फीसद है वहीं अनुसूचित जाति के लिए 35 विधानसभा सीटें आरक्षित हैं, ऐसे में देवाशीष का कांग्रेस से जुड़ना, कांग्रेस के लिए काफी सकारात्मक माना जा रहा है।

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  • दिग्विजय सिंह ने किया कांग्रेस में शामिल

  • बसपा प्रमुख की उम्मीदों पर फिर सकता है पानी

  • आंबेडकरवाद मेरे खून में है : देवाशीष

देवाशीष सोशल मीडिया पर भी काफी सक्रिय भूमिका में हैं। फेसबुक और ट्विटर पर हजारों की संख्या में उनकी अपनी फैन फॉलोइंग है। दूसरी तरफ देखें तो इस घटना से भाजपा की मुश्किलें काफी बढ़ने वाली हैं, क्योंकि देवाशीष ‘अबकी बार आदिवासी सरकार’ का नारा देनेवाले जयस प्रमुख हीरालाल अलावा को अपना अच्छा दोस्त कहते हैं। देवाशीष आदिवासी और दलित गंठजोड़ पर काफी बल देते हैं और सूबे की राजनीति में इसे महत्वपूर्ण कड़ी मानते हैं।

एक मुखर वक्ता के रूप में उभरे हैं देवाशीष जरारिया, खासा चर्चित रहा है न्यूज चैनलों पर इनका हस्तक्षेप

हाल ही में आदिवासी अस्मिता के मुद्दों पर कार्य करने वाला जयस नामक संगठन भी चुनाव लड़ने की बात कह चुका है। इसके प्रमुख डॉ. हीरालाल अलावा ने राज्य में आदिवासी प्रभाव वाली 80 विधानसभा सभा सीटों पर चुनाव लड़ने की बात कही है। माना जाता है कि मध्यप्रदेश में सत्ता के सिंहासन तक पहुंचने का रास्ता आदिवासी प्रभाव वाले इलाकों से ही गुजरता है।

आनंद राय ने मिलवाया कांग्रेस महासचिव से

व्यापमं घोटाले का पर्दाफाश करने वाले व्हिसलब्लोअर डॉ. आनंद राय ने पिछले दिनों इंदौर में अपने निवास पर मध्यप्रदेश की राजनीतिक क्षिजित पर चमकने वाले तीन युवाओं– आदिवासी नेता हीरालाल अलावा, बुदनी में सक्रिय अर्जुन आर्य और देवाशीष जरारिया की मुलाकात कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह से करायी। दिग्विजय सिंह ने उसी दिन डॉ. आनंद राय सहित इन तीनों युवाओं को भी कांग्रेस में आने का न्यौता दिया।

देवाशीष ने क्यों थामा कांग्रेस का दामन

बीते दिनों देशभर में हुए दलित आंदोलन के बाद तेजी से उभरे देवाशीष जरारिया का मानना है कि पिछले 15 सालों से मध्यप्रदेश की सत्ता पर काबिज भाजपा दलितों-आदिवासियों के साथ न्यायपूर्ण रवैया नहीं अपनाई, जिससे इन दोनों वर्गों का काफी नुकसान हुआ है। अत: भाजपा को सत्ता से बाहर करने के लिए ही उन्होंने कांग्रेस का दामन थामा। देवाशीष के अनुसार, “मध्य प्रदेश में बसपा के लोग भी चाहते थे कि बसपा का कांग्रेस के साथ गठबंधन हो ताकि राज्य में भाजपा को सत्ता से बाहर किया जा सके, लेकिन मायावती ने पिछले दिनों विधानसभा चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी कर दी, जिससे गठबंधन की सारी उम्मीदें खत्म हो गयीं।”

मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव को लेकर अपने दल के उम्मीदवारों की पहली सूची जारी करने के दौरान संवाददाताओं के सवालों का जवाब देतीं बसपा प्रमुख मायावती

देवाशीष ने अपने फेसबुक अकाउंट पर कांग्रेस में शामिल होने का मकसद बताते हुए लिखा है कि मध्य प्रदेश की जनता को 15 साल के भाजपा के शासन से मुक्ति दिलाने और दलित-आदिवासी वर्गों को इंसाफ दिलाने के लिए वे कांग्रेस में गए हैं। उन्होंने मध्यप्रदेश में मायावती के अकेले चुनाव लड़ने के फैसले को गलत बताते हुए कहा कि बसपा की यूपी वाली सियासत यहां नहीं चल सकती। उनका आक्रोश है कि बसपा ने पिछले 20 सालों से मध्य प्रदेश में बेहतर लीडरशिप खड़ी नहीं की। वे कहते हैं कि राज्य में उन्होंने दलितों की लड़ाई लड़ी है इसलिए लोग उन पर भरोसा करेंगे।

फेसबुक पर बसपा सुप्रीमो के प्रति अपने रवैया को भी उन्होंने बयां किया है। उन्होंने लिखा है, “बसपा में मेरी यात्रा एक खेत के खरपतवार की ही रही, जिसे एक दिन एक झटके में उखाड़ कर फेंक दिया गया। 23 जुलाई की प्रेस नोट के बाद यही दवाब हर पल महसूस करता रहा, बहुत प्रयासो के बाद भी पार्टी में वापसी की उम्मीदें धूमिल होती रही और 16 सितंबर की बहनजी की प्रेस कॉन्फ्रेंस से लग गया कि हमारी आवश्यकता पार्टी के अंदर नही है। बसपा के साथ लगभग 2 वर्षो का सफर में पार्टी से कम लेकिन पार्टी के समर्थकों से बेहद प्यार और आशीर्वाद मिला, उसी हिम्मत से अब तक का सफर तय हुआ।”

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देवाशीष लिखते हैं कि “मेरे कांग्रेस में जाने की खबर से हजारों बसपा के साथियों का दिल टूटा है, खासकर उत्तर प्रदेश के साथी मुझसे बेहद नाराज हैं और मुझपर अभद्र टिप्पणी कर रहे हैं। मैं आपके इस स्वाभाविक गुस्से को पूर्ण रुप से स्वीकार करता हूं। लेकिन मध्य प्रदेश के संदर्भ में लिया गया मेरा यह निर्णय उचित और परिस्थितियों के अनुरुप है। मध्य प्रदेश की जनता को 15 साल के भाजपा के शासन से मुक्ति दिलाना और अपने भाइयों को इंसाफ दिलाना मेरा मकसद रहेगा। मैं बसपा के राजनीतिक प्लेटफॉर्म से अलग हुआ हूं, न कि सामाजिक रुप से आंबेडकरवाद से। रही बात सामाजिक पथ की तो बाबा साहेब हमारे खून में हैं उसके बारे में कहने-बोलने की आवश्यकता नहीं है। देवाशीष कांग्रेस में कमजोरों, वंचितों की आवाज बनकर उभरेगा, ये मेरा वादा है। जय भीम जय भारत।”

प्रदेश में तकरीबन 25 विधानसभा सीटें ऐसी हैं जहां बसपा प्रभावी है। साल 2013 में मध्यप्रदेश में बसपा ने 227 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे। हालांकि पार्टी केवल चार सीटें जीतने में ही सफल रही थी। देवाशीष राज्य में बसपा के स्टार प्रचारक बतौर स्थापित हो रहे थे। सभी जिलों में युवाओं के बीच वे लोकप्रिय चेहरा बन चुके हैं। देवाशीष जैसे युवा नेताओं के कांग्रेस में शामिल होने से राज्य का दलित वोटर खासकर युवा जरूर प्रभावित होगा।

(कॉपी संपादन : राजन/एफपी डेस्क)


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