h n

अयोध्या में साजिश कर रही भाजपा, बिकाऊ है भीम आर्मी : मायावती

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में विश्व हिंदू परिषद और शिवसेना के कार्यक्रम के आयोजन के संबंध में बसपा प्रमुख ने कहा है कि यह भाजपा की साजिश है। वहीं उन्होंने भीम आर्मी पर बिकाऊ होने का आरोप लगाया है। फारवर्ड प्रेस की खबर :

बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने 24 नवंबर 2018 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अयोध्या में भाजपा साजिश कर रही है। लखनऊ में संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार अपना वादा पूरा नहीं कर पाई है, इसलिए फिर से राम मंदिर को मुद्दा बना रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि राम मंदिर पर आजकल जो भी विश्व हिंदू परिषद व शिवसेना कर रही है, वह भाजपा की ही साजिश है।

बसपा प्रमुख ने कहा कि मोदी सरकार को सत्ता में रहते हुए लगभग पांच साल पूरे होने वाले हैं और लोकसभा का आम चुनाव भी नजदीक आ गया है, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने सत्ता में आने से पहले जो वादे किए थे, उन्होंने पूरे नहीं किए हैं। इसलिए प्रधानमंत्री व भाजपा दोनों को महसूस होने लगा है कि इस बार डगर आसान नहीं है। उन्हें भी लगने लगा है कि सत्ता में आना मुश्किल है, इसलिए फिर से राम मंदिर को मुद्दा बना रहे हैं। इसमें नया कुछ भी नहीं है। राम मंदिर को हमेशा से वे लोग चुनावी मुद्दा बनाते रहे हैं। सोची-समझी रणनीति के तहत अपनी कमियों व विफलताओं आदि पर जनता का ध्यान बांटने के लिए उत्तर प्रदेश के अयोध्या में पर्दे के पीछे से खासकर अपने साधु-संतों, आरएसएस व शिवसेना आदि को आगे करके वहां बड़े पैमाने पर राम मंदिर निर्माण कराने का अभियान चलाए हुए है, जबकि यह मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में लंबित पड़ा है।

बसपा प्रमुख मायावती

बसपा प्रमुख ने कहा कि मेरा मानना है कि चूंकि मामला कोर्ट में है, इसलिए कोर्ट के जरिए ही निपटाना चाहिए और यही बेहतर होगा।

संवाददाता सम्मेलन में बसपा प्रमुख ने भीम आर्मी पर बिकाऊ होने का आरोप लगाया। उन्होंने इसके संस्थापक चंद्रशेखर के उस बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है कि जिसमें उन्होंने मायावती को प्रधानमंत्री के रूप में समर्थन देने की बात कही थी। उन्होंने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि भीम आर्मी और बहुजन यूथ फाॅर मिशन 2019 जैसे संगठन विपक्ष के इशारे पर भोले-भाले लोगों को बहकाने का काम कर रहे हैं। ऐसे संगठन बसपा के बढ़ते कदम में रोड़ा हैं।

उन्होंने कहा कि बसपा को पता चला है कि ऐसे संगठन कठपुतली हैं और साजिशन यह सब कुछ हो रहा है। इसलिए हम सभी को सतर्क रहना होगा, क्योंकि उन सबों का निशाना दलित काॅलोनियों में रहने वाले भोले-भाले लोग हैं। बसपा के कार्यकर्ताओं को इन संगठनों से सावधान रहने की जरूरत है, क्योंकि ऐसे संगठन हमारे नाम पर लोगों की भावनाओं के साथ खेल रहे हैं। उन्होंने कहा कि बसपा सभी धर्मों व जातियों की पार्टी है। साथ ही उन्होंने भीम आर्मी को किसी भी प्रकार का चंदा व सहयोग नहीं देने की अपील की है।

(कॉपी संपादन : प्रेम/एफपी डेस्क)


फारवर्ड प्रेस वेब पोर्टल के अतिरिक्‍त बहुजन मुद्दों की पुस्‍तकों का प्रकाशक भी है। हमारी किताबें बहुजन (दलित, ओबीसी, आदिवासी, घुमंतु, पसमांदा समुदाय) तबकों के साहित्‍य, संस्कृति, सामाज व राजनीति की व्‍यापक समस्‍याओं के सूक्ष्म पहलुओं को गहराई से उजागर करती हैं। पुस्तक-सूची जानने अथवा किताबें मंगवाने के लिए संपर्क करें। मोबाइल : +917827427311, ईमेल : info@forwardmagazine.in

फारवर्ड प्रेस की किताबें किंडल पर प्रिंट की तुलना में सस्ते दामों पर उपलब्ध हैं। कृपया इन लिंकों पर देखें 

दलित पैंथर्स : एन ऑथरेटिव हिस्ट्री : लेखक : जेवी पवार 

महिषासुर एक जननायक

महिषासुर : मिथक व परंपराए

जाति के प्रश्न पर कबी

चिंतन के जन सरोकार

लेखक के बारे में

कुमार समीर

कुमार समीर वरिष्ठ पत्रकार हैं। उन्होंने राष्ट्रीय सहारा समेत विभिन्न समाचार पत्रों में काम किया है तथा हिंदी दैनिक 'नेशनल दुनिया' के दिल्ली संस्करण के स्थानीय संपादक रहे हैं

संबंधित आलेख

पसमांदा केवल वोट बैंक नहीं, अली अनवर ने जारी किया एजेंडा
‘बिहार जाति गणना 2022-23 और पसमांदा एजेंडा’ रपट जारी करते हुए अली अनवर ने कहा कि पसमांदा महाज की लड़ाई देश की एकता, तरक्की,...
‘हम पढ़ेंगे लिखेंगे … क़िस्मत के द्वार खुद खुल जाएंगे’  
दलित-बहुजन समाज (चमार जाति ) की सीमा भारती का यह गीत अब राम पर आधारित गीत को कड़ी चुनौती दे रहा है। इस गीत...
अयोध्या में राम : क्या सोचते हैं प्रयागराज के दलित-बहुजन?
बाबरी मस्जिद ढहाने और राम मंदिर आंदोलन में दलित-बहुजनों की भी भागीदारी रही है। राम मंदिर से इन लोगों को क्या मिला? राम मंदिर...
सरकार के शिकंजे में सोशल मीडिया 
आमतौर पर यह माना जाने लगा है कि लोगों का ‘प्यारा’ सोशल मीडिया सरकार का खिलौना बन गया है। केंद्र सरकार ने कानूनों में...
जातिवादी व सांप्रदायिक भारतीय समाज में लोकतंत्र सफल नहीं हो सकता
डॉ. आंबेडकर को विश्वास था कि यहां समाजवादी शासन-प्रणाली अगर लागू हो गई, तो वह सफल हो सकती है। संभव है कि उन्हें यह...