सवर्ण आरक्षण : जानने योग्य बातें

गरीब सवर्णों को दस फीसदी आरक्षण देने के फैसले पर अभी से सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, सरकार द्वारा संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 में बदलाव की बात कही जा रही है। आखिर इन अनुच्छेदों में ऐसा क्या है, जिनके कारण सरकार को बदलाव के लिए मजबूर होना पड़ रहा है

बीती 7 जनवरी 2019 को केंद्रीय मंत्रिपरिषद ने गरीब सवर्णों को नौकरियाें में दस फीसदी आरक्षण देने के निर्णय को स्वीकृति दे दी है। इसे लागू करने के लिए एक संशोधन विधेयक केंद्र सरकार द्वारा 8 जनवरी को लोकसभा में पेश किया जाएगा। 

आइए, जानें सवर्ण आरक्षण से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातें।

  • सरकारी नौकरियों में गरीब सवर्णों को दस फीसदी आरक्षण मिले, इस संबंध में केंद्रीय मंत्रिपरिषद ने 7 जनवरी 2019 की बैठक में स्वीकृति दी।
  • इसके लिए सरकार संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 में संशोधन करेगी।
  • संविधान की समीक्षा व आरक्षण संबंधी प्रावधानों को लेकर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) सुप्रीमो मोहन भागवत ने 2015 में बिहार में विधानसभा चुनाव के पूर्व ही बात कही थी। तभी से यह मामला सुर्खियों में रहा है कि भाजपा सरकार संविधान के साथ छेड़छाड़ करना चाहती है।
  • सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 15 में संशोधन की बात कही है। वर्तमान में इस अनुच्छेद के अनुसार – “राज्य, किसी नागरिक के विरुद्ध केवल धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, जन्मस्थान या इनमें से किसी के आधार पर कोई विभेद नहीं करेगा।”
  • इसी अनुच्छेद में दो और उपबंध जोड़े गए हैं। इसके तहत 15(4) और 15(5) के जरिए सामाजिक और शैक्षणिक दृष्टि से पिछड़े वर्ग या अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए विशेष प्रावधान की व्यवस्था की गई है।  
  • सनद रहे कि इसमें कहीं भी ‘आर्थिक’ शब्द का उल्लेख नहीं है।
  • भारतीय संविधान में आरक्षण के प्रावधान के पीछे आधार यह रहा है कि वे सभी, जिन्हें उत्पादन के संसाधनों और अवसरों से दूर रखा गया है; साथ ही जिन्हें पढ़ने के अवसर से भी दूर रखा गया, सरकार उन्हें आरक्षण देगी।
  • इसके जरिए ही भारतीय संविधान में आबादी के अनुरूप अनुसूचित जाति के लिए 15 फीसदी और अनुसूचित जनजाति के लिए 7.5 फीसदी आरक्षण का अधिकार 1952 में ही दे दिया गया, जब संविधान को देश में लागू किया गया।
  • यह आरक्षण सरकारी सेवाओं और शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश के लिए दिया गया।

  • नब्बे के दशक में जब देश में मंडल कमीशन की अनुशंसाओं के अनुरूप अन्य पिछड़ा वर्ग को आबादी (1931 में हुए जनगणना के आधार पर) का आधा यानी 27 फीसदी आरक्षण दिया गया। पहले यह केवल सरकारी नौकरियों के लिए था। बाद में 2003 में उच्च शिक्षा में ओबीसी को आरक्षण का अधिकार मिला।
  • हालांकि, 1993 में इंदिरा साहनी बनाम भारत सरकार मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण की अधिकतम सीमा 50 फीसदी निर्धारित कर रखी है।
  • वर्तमान में आरक्षण की अधिकतम सीमा 49.5 फीसदी है। इसमें अनुसूचित जनजाति के लिए 7.5 फीसदी, अनुसूचित जाति के लिए 15 फीसदी और ओबीसी को मिलने वाला 27 फीसदी आरक्षण शामिल है।
  • अब भाजपा सरकार यदि गरीब सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण देना चाहती है, तो उसे संविधान में संशोधन करना पड़ेगा।
  • इसके लिए उसे अनुच्छेद 15 और 16 में सामाजिक और शैक्षणिक के साथ आर्थिक शब्द का उल्लेख करना पड़ेगा।
  • पूर्व में जब पी.वी. नरसिम्हा राव की सरकार थी, तब गरीब सवर्णों को आरक्षण देने की बात कही गई थी। लेकिन, तब सुप्रीम कोर्ट ने इसी आधार पर इसे खारिज कर दिया था कि आर्थिक आधार पर आरक्षण संविधान की मूल भावना का उल्लंघन है।

राज्यसभा में बोलते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (तस्वीर साभार : राज्यसभा टीवी)

(कॉपी संपादन : प्रेम बरेलवी)


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