कांग्रेस रख रही है ओबीसी के हितों का ख्याल : अनूप पटेल

हाल में जीते दो-दो राज्यों छत्तीसगढ़ व राजस्थान के मुख्यमंत्रियों भूपेश बघेल व अशोक गहलोत को क्रमश: अपने-अपने प्रदेशों की जिम्मेदारी सौंपी है। साथ ही राजस्थान में सचिन पायलट को उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी दी गई है। ये सभी ओबीसी समुदाय से हैं

देश में लोकसभा चुनाव होने हैं। देश के बहुसंख्यकों यानी अन्य पिछड़ा वर्ग के वोटों पर सभी राजनीतिक दलों की निगाहें हैं। कांग्रेस का भी कहना है कि वह ओबीसी की हितैषी है। इस संबंध में फारवर्ड प्रेस ने उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता अनूप पटेल से बातचीत की। प्रस्तुत है बातचीत का संपादित अंश :

फारवर्ड प्रेस (फा.प्रे.) : उत्तर प्रदेश में कांग्रेस पार्टी खुद को मौजूदा हालात में किस स्थिति में देख रही है?

अनूप पटेल (अ.प) : कांग्रेस जड़ों को मजबूत करने में जुट गई है और वह सभी 80 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारने की रणनीति पर काम कर रही है। चौंकाने वाले रिजल्ट के लिए तैयार रहें।

फा.प्रे. : चौंकाने वाले रिजल्ट से आपका क्या आशय है? क्या कांग्रेस की आगामी लोकसभा चुनाव में सीटें अप्रत्याशित रूप से बढ़ेंगी?

अ.प. : बता दूं कि कांग्रेस आगामी लोकसभा चुनाव व 2022 में संभावित उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर ही रणनीति बना रही है और उस आधार पर ही लोकसभा व विधान सभा चुनावों में अप्रत्याशित जीत का दावा किया जा रहा है।

फा.प्रे. : अपनी रणनीति के बारे में थोड़ा खुलासा करें?

अ.प. : उत्तर प्रदेश में 2017 के विधानसभा चुनाव में पार्टी की करारी हार के बाद से कांग्रेस अपनी कमियों को सुधारने में जुटी है और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राज बब्बर के नेतृत्व में युवाओं को पार्टी में जगह व तवज्जो दी जा रही है। ओबीसी सेल, एससी सेल, सेवा दल व महिला कांग्रेस का पुनर्गठन कर हम लोग लगातार जिलास्तर व मंडल स्तर पर कार्यकर्ताओं में जोश भर रहे हैं। कांग्रेस के दो वरिष्ठ युवा नेताओं ज्योतिरादित्य सिंधिया व प्रियंका गांधी वाड्रा को क्रमश: पश्चिमी व पूर्वी उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी देने से भी युवाओं में जोश का संचार हुआ है। युवाओं के जगने भर की देर है, परिणाम का उलटफेर होना तय है।

फा.प्रे. : उत्तर प्रदेश में प्रमुख क्षेत्रीय पार्टियों सपा और बसपा के बिना कांग्रेस का यह दावा अतिश्योक्ति नहीं लगता है?

अ.प. :  बिल्कुल नहीं। हम अपने पुराने जनाधार को फिर से वापस लाने भर का प्रयास कर रहे हैं और जिस दिन इसमें सफलता मिल गई हमारे दावे हकीकत में बदलती हुई दिखायी देंगे। जहां तक सपा और बसपा का सवाल है तो हम लोग चाहते थे कि ये दोनों पार्टियां भी महागठबंधन में शामिल हों लेकिन कुछ कारणों से ऐसा नहीं हो पाया। लेकिन बता दूं कि हमारी लड़ाई और सपा-बसपा की लड़ाई संवैधानिक मूल्यों को बचाने के साथ-साथ बीजेपी-आरएसएस रंगों में रंगे जाने से रोकने के लिए है, इसलिए चुनावी रूप में प्रतिद्वंद्वी के रूप में जरूर हैं लेकिन मकसद हम सभी का एक है। साम्प्रदायिक पार्टी को सत्ता से बेदखल करना ही उद्देश्य है।

उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता अनूप पटेल

फा.प्रे. : इसका मतलब यह तो नहीं कि सपा-बसपा व कांग्रेस चुनावी मैंदान में नूरा-कुश्ती करती हुई दिखायी देगी?

अ.प. : बिल्कुल नहीं। हम उद्देश्य की बात कर रहे थे। जहां तक चुनाव की बात है तो हम पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतरेंगे और लोकसभा की सभी 80 सीटों पर प्रत्याशी उतारेंगे। अपने पुराने जनाधार को हासिल करना कांग्रेस का मुख्य उद्देश्य है और इसमें सफलता मिलने के साथ ही सिंगल लार्जेस्ट पार्टी बनने से कांग्रेस को कोई नहीं रोक सकता है।

फा.प्रे. : उत्तर प्रदेश में पुराने जनाधार को पाना क्या संभव है?

अ.प.: कांग्रेस ने युवाओं पर भरोसा जताया है और अब पार्टी के युवाओं के कंधे पर यह महती जिम्मेदारी है कि वह पार्टी को कैसे अपने खोए जनाधार को फिर से वापस लाने के लिए प्रयास करते हैं। साथ ही ओबीसी समुदाय को पार्टी से जोड़ने के लिए भी लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
फा.प्रे.: ओबीसी समुदाय के लिए कांग्रेस क्या कुछ खास कर रही है?

अ.प. : राज बब्बर जी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने ओबीसी सेल को रिवाइव करने के उद्देश्य से पुनर्गठन किया है। युवा नेता राहुल सचान व सत्यवीर चौधरी को कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी है। इसके साथ-साथ ओबीसी सेल के राष्ट्रीय प्रभारी अनिल सैनी इस सिलसिले में पिछड़ों की कई मीटिंग कर चुके हैं। जिला स्तर पर मीटिंग कर जिलावार कमेटी गठित कर दी गई है और जल्द ही वहां कार्यकारिणी भी गठित की जानी है। इसके साथ-साथ बीते 2 अक्टूबर को जन-भागीदारी मार्च शुरू कर 75 जिलों में लगभग 15,000 किलोमीटर की यात्रा करने के बाद बीते 30 जनवरी को राजघाट पर इसका समापन किया गया है। इस यात्रा के दौरान पार्टी को ओबीसी समुदाय सहित अन्य लोगों का काफी समर्थन मिला है और उस आधार पर ही हमारा मानना है कि हम पुराने जनाधार को पाने में सफल रहेंगे।

फा.प्रे. : ओबीसी समुदाय के वोट हासिल करने के लिए यूं तो हर पार्टी लगी हुई है। ऐसे में कांग्रेस खुद को कैसे अलग पा रही है और उसे कैसे लगता है कि ओबीसी समुदाय उस पर ही भरोसा करेगा?

अ.प. : बिल्कुल सही सवाल किया आपने। आज की तारीख में हर राजनीतिक दल ओबीसी समुदाय के वोट हासिल करने में जुटी हुई है लेकिन कांग्रेस इन सभी से इस मामले में अलग है कि वह इस समुदाय को केवल तवज्जो देने की बात नहीं करती बल्कि तवज्जो दे रही है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी जी भी कई मौकों पर दोहरा चुके हैं कि ओबीसी समाज को पूरा प्रतिनिधित्व मिलेगा। उन्हें उनका जितना हक बनता है, उतना मिलेगा। हकमारी नहीं होने दी जाएगी। पिछड़ा वर्ग व किसान वर्ग मौजूदा सरकार से ठगा महसूस कर रहे हैं और यही वजह है कि वे लोग आशा के साथ कांग्रेस की तरफ देख रहे हैं। जहां तक कांग्रेस की बात है वह ओबीसी समुदाय को तवज्जो दे रही है। मिसाल के तौर पर हाल में जीते दो-दो राज्यों छत्तीसगढ़ व राजस्थान के मुख्यमंत्रियों भूपेश बघेल व अशोक गहलोत को क्रमश: अपने-अपने प्रदेशों की जिम्मेदारी सौंपी है। साथ ही राजस्थान में सचिन पायलट को उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी दी गई है। ये सभी ओबीसी समुदाय से हैं। इसके साथ-साथ लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे भी दलित समुदाय से हैं। जनता इस बात को समझ रही है कि उचित प्रतिनिधित्व ओबीसी समाज को अगर कोई पार्टी देने वाली है तो वह कांग्रेस है। इन सभी बातों को ध्यान में रखकर ही कांग्रेस को भरोसा है कि वह पुराने जनाधार को पाने में सफल होगी।

6 फरवरी 2019 को दिल्ली स्थित कांग्रेस के राष्ट्रीय मुख्यालय में कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा से ओबीसी के मुद्दे पर विचार-विमर्श करते अनूप पटेल

फा.प्रे. : केंद्र व उत्तर प्रदेश में सत्तासीन भाजपा पर आपका क्या कहना है?

अ.प. : देखिए, झूठे वायदे कर यह पार्टी सत्ता में आयी थी। जनता इस बात को समझ चुकी है। पहले यही मोदी जी सवा छह करोड़ गुजराती की बात करते थे और अब सवा सौ करोड़ भारतवासी की बात करते हैं जबकि वास्तविकता क्या है, यह जनता समझ चुकी है। हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने जब कार्यभार संभाला उसके बाद गुजरात में चुनाव हुए और वहां पार्टी थोड़े से ही बहुमत में आने से रह गई। उसके बाद कर्नाटक में चुनाव हुए और वहां कांग्रेस सत्ता में फिर से वापस आयी। छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश व राजस्थान का रिजल्ट भी कांग्रेस के पक्ष में आया है। इन परिणामों से कार्यकर्ता उत्साहित हैं और यही पार्टी की वह पूंजी है जिसके आधार पर पार्टी सिंगल लार्जेस्ट पार्टी के रूप में चुनाव बाद आने का दावा कर रही है।

(कॉपी संपादन : एफपी डेस्क)


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