पुलवामा हमला : वीरगति को प्राप्त जवानों की आधिकारिक सूची

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले में 14 फरवरी 2019 को हुए आतंकी हमले के बाद पूरे देश में युद्धोन्माद फैलाने की कोशिश की जा रही है। इसमें विभिन्न मीडिया संस्थान भी शामिल हैं। इसके लिए भ्रामक तथ्यों का सहारा लिया जा रहा है। इनमें शहीदों की संख्या व सूची भी शामिल है

[एक व्यक्ति की अनेक पहचानें होती हैं; जो उसके देश, राज्य, गांव, शिक्षा, पेशा, पंथ, विश्वास आदि अनेक चीजों से जुड़ी होती हैं। मसलन, किसी व्यक्ति की पहचान भारतीय या अमेरिकी के रूप में हो सकती है; बिहार या कर्नाटक के निवासी के रूप हो सकती है; मैट्रिकुलेट या ग्रेजुएट के रूप हो सकती है; हिंदू या पारसी के रूप में हो सकती है; कबीर पंथी, नास्तिक या आस्तिक के रूप में हो सकती है; इंजीनियर या बावर्ची के रूप में हो सकती है। एक भारतीय के रूप में इन्हीं में से एक पहचान जाति की भी है, जिसे मिट जाना चाहिए। लेकिन, दुर्भाग्यवश यह हमारी सबसे महत्वपूर्ण पहचान के रूप में बरकरार है। यह घाव छुपाने से नहीं मिटने वाला –प्रबंध संपादक]

  • एफपी डेस्क

फारवर्ड प्रेस द्वारा 15 फरवरी, 2019 को प्रकाशित खबर ‘पुलवामा आतंकी हमला : शहादत में गैर-ब्राह्मणों के लिए सौ फीसदी आरक्षण!’ को लेकर सोशल मीडिया पर आरोपों-प्रत्यारोंपों का दौर जारी है। कई लोगों ने फारवर्ड प्रेस पर गलत सूचना देने का आरोप लगाते हुए कहा है कि शहीद हुए जवानों में कई ब्राह्मण भी हैं। फारवर्ड प्रेस ने इस संबंध में पुन: पड़ताल की और पाया कि आरोप लगाने वालों के दावे में आंशिक सच्चाई है। वीरगति को प्राप्त हुए जवानों में कई नहीं, लेकिन एक ब्राह्मण अवश्य हैं। उनका नाम पंकज कुमार त्रिपाठी है। गरीब परिवार में जन्मे पंकज कुमार त्रिपाठी कांस्टेबल (53 बटालियन) के पद पर तैनात थे। हालांकि, इससे फारवर्ड प्रेस द्वारा उठाए गए मसले पर कोई गुणात्मक फर्क नहीं पड़ता। फारवर्ड प्रेस ने अपनी पिछली खबर में जो बात कही थी, उसका मुख्य आशय यह था कि देश के लिए जान देने वाले जवान गरीब व सामाजिक रूप से वंचित तबकों के हैं। पिछड़े, आदिवासी, दलित और गरीब सिख-राजपूत हैं। जबकि, बड़े पद और पुरस्कारों पर सामाजिक रूप से विशेषाधिकार प्राप्त तबकों, विशेषकर ब्राह्मणों का कब्जा है। यह मुख्य तर्क निस्संदेह अकाट्य है। फारवर्ड प्रेस की पिछली खबर के शीर्षक में ‘सौ फीसदी’ की जगह ‘अनठानवें’ फीसदी कर देने पर बात अधिक तथ्यात्मक हो जाएगी।

फारवर्ड प्रेस ने अपनी पिछली खबर में सरकारी न्यूज एजेंसी प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (पीटीआई) के हवाले से विभिन्न समाचार माध्यमों द्वारा प्रसारित सूचनाओं पर भरोसा किया था, और इसका स्पष्ट उल्लेख भी खबर में किया था। जबकि, शहीदों की जो सूची पीटीआई ने जारी की थी, वही गलत थी। इतने संवदेनशील मसले पर सरकारी न्यूज एजेंसी द्वारा शहीदों की गलत सूची प्रसारित किया जाना आश्चर्यजनक है। हमने अपनी पड़ताल में पाया कि पीटीआई ही नहीं, बल्कि कथित देशभक्ति के जुनून में विभिन्न मीडिया संस्थानों द्वारा गलत सूचनाएं प्रसारित की जा रही हैं। साथ ही राजनीतिक दलाें से जुड़े बड़े लोग युद्धोन्माद फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। इन संगठनों द्वारा मीडिया संस्थाओं काे लगातार फर्जी तथ्य व युद्धोन्मुख बौद्धिक खुराक उपलब्ध करवाई जा रही है।

दूसरी ओर, पीटीआई ने जो सूची पहले जारी की; उसके अनुसार, 42 जवान वीरगति को प्राप्त हुए थे। फारवर्ड प्रेस ने पिछली खबर में पीटीआई द्वारा बताई गई वही संख्या और सूची प्रकाशित की थी।

यह भी पढ़ें : पुलवामा आतंकी हमला : शहादत में गैर-ब्राह्मणों के लिए सौ फीसदी आरक्षण!

लेकिन, जब पाठकों की ओर से फारवर्ड प्रेस में प्रकाशित सूची पर सवाल उठाए गए, तो यह जानने के लिए कि कितने जवान शहीद हुए हैं? उनके नाम क्या हैं? तथा क्या पंकज कुमार त्रिपाठी नामक जवान शहीदों में शामिल हैं? हमने सीआरपीएफ के केंद्रीय मुख्यालय में जाकर उसके जनसंपर्क पदाधिकारी गिरीश चंद्र दास से व्यक्तिगत तौर पर मुलाकात की।  

पुलवामा हमले में शहीद हुए सभी 40 जवानों की एक्सक्लूसिव तस्वीर। फारवर्ड प्रेस को यह तस्वीरें सीआरपीएफ ने आधिकारिक तौर पर उपलब्ध करवाई है। विभिन्न समाचार माध्यमों में प्रसारित हो रही तस्वीरों व शहीदों की सूची में अनेक प्रकार की गड़बड़ियां हैं।

सीआरपीएफ के अधिकारी ने हमें बताया कि कुल 40 जवान शहीद हुए हैं, (उपरोक्त तस्वीरों को जूम करके देखें) इनमें पंकज कुमार त्रिपाठी भी शामिल हैं। उनका पार्थिव शरीर उनके परिजनों को भेजा जा चुका है। सीआरपीएफ के अधिकारियों ने मीडिया संस्थानों (फारवर्ड प्रेस नहीं) में प्रकाशित की जा रही भ्रामक खबरों पर नाराजगी भी जताई तथा कहा कि इससे अनावश्यक भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है। उन्होंने बताया कि मीडिया में गलत जवानों के नाम शहीद के रूप में प्रसारित किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि पांच जवान घायल हैं और अब वे सभी मौत के मुंह से बाहर हैं।

यह भी पढ़ें : भारत रत्न : द्विजों के लिए 85 फीसदी आरक्षण

उन्होंने फारवर्ड प्रेस को शहीद हुए जवानों की आधिकारिक सूची उपलब्ध करवाई, जो निम्नांकित है। सूची में 40 में 26 की सामाजिक पृष्ठभूमि (जाति) की जानकारी हमने अपनी ओर से सरनेम व स्थानीय संवाददाताओं द्वारा उपलब्ध करवाई गई जानकारी के आधार पर जोड़ी है।

पुलवामा आतंकी हमले में शहीद जवानों की सीआरपीएफ केंद्रीय मुख्यालय, दिल्ली द्वारा जारी सूची व उनकी जाति

पद/नामबटालियनजाति समूह
1. हेड कांस्टेबल (चालक) जयमल सिंह76 बटालियनसिक्खअल्पसंख्यक
2. हेड कांस्टेबल नसीर अहमद76 बटालियनमुसलमानअल्पसंख्यक
3. कांस्टेबल सुखजिंदर सिंह76 बटालियनसिक्खअल्पसंख्यक
4. कांस्टेबल रोहताश लांबा76 बटालियनअनुसूचित जनजातिआदिवासी
5. कांस्टेबल तिलक राज76  बटालियन--
6. कांस्टेबल बीरेंद्र सिंह*45 बटालियन--
7. कांस्टेबल भगीरथ सिंह*45 बटालियन--
8. हेड कांस्टेबल अवधेश कुमार यादव45 बटालियनयादवओबीसी
9. कांस्टेबल नितिन सिंह राठौर3 बटालियनराजपूतसवर्ण
10.कांस्टेबल रतन कुमार ठाकुर45 बटालियननाईअति पिछड़ा वर्ग
11. कांस्टेबल मनोज कुमार बेहरा82 बटालियनचमारदलित
12.हेड कांस्टेबल संजय कुमार सिन्हा176 बटालियनकुर्मीओबीसी
13.हेड कांस्टेबल रामवकील176 बटालियनअनुसूचित जातिदलित
14.कांस्टेबल शिवचंद्रन सी92 बटालियन--
15.कांस्टेबल सुदीप विश्वास98 बटालियनअनुसूचित जातिदलित
16.कांस्टेबल श्याम बाबू115 बटालियन--
17.कांस्टेबल अजीत कुमार आजाद115 बटालियन--
18.हेड कांस्टेबल संजय राजपूत115 बटालियनराजपूतसवर्ण
19.कांस्टेबल कौशल कुमार रावत115 बटालियनअनुसूचित जातिदलित
20.कांस्टेबल जीत राम92 बटालियनअनुसूचित जातिदलित
21.कांस्टेबल अमित कुमार92 बटालियनयादवओबीसी
22. कांस्टेबल विजय कुमार मौर्य92 बटालियनकुशवाहाओबीसी
23. कांस्टेबल कुलविंदर सिंह92 बटालियनसिक्खअल्पसंख्यक
24.हेड कांस्टेबल विजय शोरंग82 बटालियनअनुसूचित जनजातिआदिवासी
25. कांस्टेबल वसंत कुमार वीवी82 बटालियन--
26.कांस्टेबल गुरू एच82 बटालियन--
27. कांस्टेबल सुब्रमणियम जी82 बटालियन--
28.असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर मोहन लाल110 बटालियन--
29.हेड कांस्टेबल नारायण लाल118 बटालियन--
30.कांस्टेबल मनिंद्र सिंह75 बटालियनसिक्खअल्पसंख्यक
31.कांस्टेबल रमेश यादव61 बटालियनयादवओबीसी
32.हेड कांस्टेबल प्रसन्ना कुमार साहू61 बटालियनवैश्यओबीसी
33.हेड कांस्टेबल हेम राज मीणा61 बटालियनअनुसूचित जनजातिआदिवासी
34.हेड कांस्टेबल बबला शांतरा35 बटालियनमहिश्वओबीसी
35.कांस्टेबल अश्विनी कुमार कोचि35 बटालियनअनुसूचित जनजातिआदिवासी
36.कांस्टेबल प्रदीप यादव21 बटालियनयादवओबीसी
37.कांस्टेबल पंकज कुमार त्रिपाठी53 बटालियनब्राह्मणसवर्ण
38. कांस्टेबल प्रदीप सिंह*115 बटालियन--
39.हेड कांस्टेबल एम बाशुमातरे98 बटालियन--
40.कांस्टेबल महेश कुमार118 बटालियन--

(कॉपी संपादन : एफपी/प्रेम बरेलवी)


फारवर्ड प्रेस वेब पोर्टल के अतिरिक्‍त बहुजन मुद्दों की पुस्‍तकों का प्रकाशक भी है। एफपी बुक्‍स के नाम से जारी होने वाली ये किताबें बहुजन (दलित, ओबीसी, आदिवासी, घुमंतु, पसमांदा समुदाय) तबकों के साहित्‍य, सस्‍क‍ृति व सामाजिक-राजनीति की व्‍यापक समस्‍याओं के साथ-साथ इसके सूक्ष्म पहलुओं को भी गहराई से उजागर करती हैं। एफपी बुक्‍स की सूची जानने अथवा किताबें मंगवाने के लिए संपर्क करें। मोबाइल : +917827427311, ईमेल : info@forwardmagazine.in

फारवर्ड प्रेस की किताबें किंडल पर प्रिंट की तुलना में सस्ते दामों पर उपलब्ध हैं। कृपया इन लिंकों पर देखें

आरएसएस और बहुजन चिंतन 

मिस कैथरीन मेयो की बहुचर्चित कृति : मदर इंडिया

बहुजन साहित्य की प्रस्तावना 

दलित पैंथर्स : एन ऑथरेटिव हिस्ट्री : लेखक : जेवी पवार 

महिषासुर एक जननायक’

महिषासुर : मिथक व परंपराए

जाति के प्रश्न पर कबी

चिंतन के जन सरोकार

 

About The Author

Reply