मराठी के आंबेडकरवादी साहित्य का इतिहास

अतीत साक्षी है कि महाराष्ट्र में दलित साहित्य 1950 के पहले ही जन्म ले चुका था। डॉ. आंबेडकर ने इसकी वैचारिक बुनियाद को पुख्ता किया और आज यह कथित तौर पर मुख्य धारा के साहित्य को चुनौती दे रहा है। पढ़ें दलित साहित्य से लेकर आंबेडकरवादी साहित्य बनने की कहानी, बता रहे हैं दलित पैंथर्स के संस्थापकों में से एक जे. वी. पवार :

बाबा साहेब डॉ. बी.आर. आंबेडकर ने अपने सभी अनुयायियाें काे पेन (कलम) एवं ब्रेन (दिमाग) नामक हथियाराें का समुचित प्रयाेग कर आंदाेलन काे मजबूत करने और तीव्र गति देने की सलाह दी थी। यह संदेश देते समय उनकी निगाह में रूस की क्रांति भी विद्यमान थी। इस रूसी  क्रांति को वैचारिक प्रेरणा देने वालों में रूसाे और वॉल्तेयर भी शामिल थे। इन दोनों के विचारों से डॉ. आंबेडकर भी अच्छी तरह परिचित थे, लेकिन यहां एक बात विशेष बात पर गाैर करने लायक है कि डॉ. आंबेडकर ने स्पष्टता से रूसाे के विचाराें के बजाए वॉल्तेयर की विचारधारा काे ज्यादा अहमियत दी थी। वे अक्सर सवाल दागा करते थे कि भारतवर्ष में एक भी वॉल्तेयर क्याें पैदा नहीं हाे पाया?

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