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दूसरों को राह दिखा रहे हैं नस्लीय भेदभाव झेलने वाले दिल्ली के एससीपी रॉबिन हिबू

अरूणाचल प्रदेश के अपतानी जनजाति में जन्मे रॉबिन हिबू आज दिल्ली में विशेष पुलिस महानिदेशक हैं। एक समय उन्हें ब्रह्मापुत्र मेल में फौजियों ने बहादुर कहकर अपमानित किया था। पढ़ें, रॉबिन हिबू से खास बातचीत

संघर्ष और चुनौतियों का सामना कर फर्श से अर्श तक का सफर कोई आसान काम नहीं होता है। मुहावरों, कहावतों में इस तरह की बहुत सी बातें सुनने-पढ़ने को मिलती है लेकिन इसे चरितार्थ करने वाला विरले ही होता है। ऐसा ही एक नाम है अरूणाचल प्रदेश के अपतानी जनजाति परिवार में जन्मे रॉबिन हिबू का। 1993 में भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के लिए नियुक्त वे प्रथम अरूणाचलवासी हैं। वे आज दिल्ली पुलिस के विशेष पुलिस महानिदेशक हैं।

रॉबिन हिबू के जीवन की कहानी या फिर कहिए कि सफलता की कहानी किसी सरल रेखा की तरह नहीं रही। अरूणाचल प्रदेश के लोअर सुबनसिरी जिले के होन्ग गांव में जन्मे रॉबिन का बचपन गुरबत में बीता। उनका परिवार गांव में लकड़ियां काटता और मछलियों के तालाब से गाद निकालकर जीवन-यापन करता था। बचपन से ही पढ़ने में कुशाग्र बुद्धि के रॉबिन हिबू ने कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखा। आईपीएस के लिए चुने जाने से पहले उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से समाज शास्त्र में एम.ए. की डिग्री हासिल की।

रॉबिन हिबू : फर्श से अर्श तक का सफर

फारवर्ड प्रेस से खास बातचीत में रॉबिन हिबू ने कहा कि उन्हें अपने गृह राज्य अरुणाचल प्रदेश से दिल्ली आने व यहां रहने के दौरान जिस तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा, वह कम कष्टकारक नहीं था। अपने ही देश में कई मर्तबा लोगों द्वारा विदेशी जैसा व्यवहार किया गया। शुरुआती घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि पूर्वोत्तर के लोगों को तब किस नजरिए से देखा जाता था, इसकी बानगी उनके साथ हुई एक घटना है।

उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए पूर्ववर्ती गृहमंत्री राजनाथ सिंह से सम्मान प्राप्त करते रॉबिन हिबू]

आपबीती सुनाते हुए रॉबिन हिबू ने कहा कि पहली बार दिल्ली जाने के लिए ब्रह्मपुत्र मेल में सीट रिजर्व कराया लेकिन साथ की सीटों पर सफर कर रहे फौजियों ने उन पर ताना कसने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। उनकी रिजर्व सीट तक खाली करवा ली और उन्हें अपने समान के साथ बदबूदार बाथरूम के दरवाजे के बाहर सड़ांध के बीच यात्रा को मजबूर होना पड़ा।

रॉबिन हिबू बताते हैं कि इस घटना से वे काफी विचलित हुए लेकिन चाहकर भी अपना विरोध कहीं नहीं दर्ज करवा पाए। शुभचिंतकों तक ने भूल जाने की ही सलाह दी लेकिन उनके मन में यह बात सालती रही कि गलत का विरोध आखिर क्यों नहीं की? यही वजह है कि जब आईएएस बनकर वह थोड़ा सक्षम हुए तो उन्होंने पूर्वोत्तर के लोगों खासतौर से वहां के युवकों, युवतियों के लिए ‘हेल्पिंग हैंड’ नामक संस्था के जरिए मदद करने का बीड़ा उठाया। छोटी-मोटी समस्याओं के अलावा इस संस्था के माध्यम से पूर्वोत्तर के उन नौजवानों को कोचिंग दिलाने का बीड़ा उठाया है जो सिविल सेवा परीक्षा या ऐसे ही प्रतियोगी परीक्षा पास करने के लिए कैरियर बनाना चाहते हैं।

अरूणाचल प्रदेश से पहले आईपीएस रॉबिन हिबू

रॉबिन हिबू के मुताबिक, उनकी कोशिश रहती है कि जिस तरह की परेशानियों का सामना उनकी पीढ़ी के लोगों ने किया, उस तरह की परेशानियां आने वाली पीढ़ियों को नहीं झेलनी पड़े। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर के राज्यों व उनके दूरदराज के गांवों में आज भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। लोगों को जरूरत की चीजों तक के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है।

बहरहाल, रॉबिन हिबू आज भी अपने गृह प्रदेश अरूणाचल प्रदेश और अपने गांव से सक्रिय रूप से जुड़े हैं। वे बताते हैं कि उन्होंने अपने गांव सुबनसिटी जिले के होंन्ग गांव में कई पहल किये हैं। मसलन, अपने घर को भी दान कर वहां महात्मा गांधी के नाम से लाइब्रेरी की शुरुआत कर दी है। इसके अलावा गांव में हेल्थ सेंटर की स्थापना भी की है, जहां वे दिल्ली से दवाइयां आदि नियमित तौर पर भेजते हैं।

आगे की योजनाओं के बारे में उन्होंने बताया कि आगामी 15 अगस्त को आजादी की लड़ाई में शामिल हुए नॉर्थ-ईस्ट के शहीदों की याद में दिल्ली सहित अरुणाचल प्रदेश में ब्लड बैंक कैंप लगाया जाएगा। दिल्ली में संग्रहित ब्लड को एम्स के ब्लड बैंक में जमा कराया जाएगा ताकि दिल्ली में रह रहे लगभग 12 लाख नार्थ-ईस्ट के लोगों को जरूरत पड़ने पर ब्लड के लिए भटकना नहीं पड़े। इसके साथ-साथ उन्होंने यह भी बताया कि उनकी संस्था नॉर्थ-ईस्ट के अनाथ बच्चों के लिए स्कॉलरशिप की भी व्यवस्था करती है ताकि ये बच्चे भी अपनी पढ़ाई जारी रख सके। ऐसे चार अनाथ बच्चों को उनकी संस्था हर साल गोद लेती है और उसके रहने, खाने, पठन-पाठन आदि पर होने वाले खर्चे आदि का सारा खर्च उठाती है।

एक पुलिस अधिकारी के रूप में रॉबिन हिबू ने सफलता के कई सोपान तय किया है। उन्हें पुलिस सेवा के साथ-साथ समाज सेवा के लिए दो बार वर्ष 2009-10 और 2017-18 में राष्ट्रपति के पुलिस मेडल से सम्मानित किया जा चुका है। वहीं वर्ष 2009 में उत्कृष्ट सेवाओं के लिए और 2017-18 में विशिष्ट सेवाओं के लिए सम्मानित किया गया। इसके साथ ही बोस्निया और कोसोवो में संयुक्त राष्ट्र के पुलिस कमांडर के तौर पर उत्कृष्ट कार्य करने पर संयुक्त राष्ट्र के तत्कालीन सेक्रेटरी जनरल कोफी अन्नान ने दो बार शांति मेडल देकर इन्हें सम्मानित किया। इसके पहले अरुणाचल प्रदेश सरकार उन्हें 2003 और 2009 में गोल्ड मेडल से सम्मानित कर चुकी है।

वर्तमान में रॉबिन हिबू पूर्वोत्तर राज्यों के विशेषज्ञ के तौर पर भी स्थापित हो चुके हैं। उन्हें केंद्र सरकार के कार्मिक व प्रशिक्षण विभाग में पूर्वोत्तर राज्यों के मामलों के विशेषज्ञ के तौर पर स्थायी व्याख्याता तक नियुक्त किया गया है। इतना ही नहीं वह लंबे समय तक पूर्वोत्तर राज्यों के मामलों के लिए दिल्ली पुलिस के नोडल अधिकारी भी रह चुके हैं।  वे पूर्वोत्तर के युवाओं की सहायता के लिए हेल्पिंग हैंड नामक संस्था भी चला रहे हैं। उनकी संस्था का मुख्य उद्देश्य पूर्वोत्तर के राज्यों से आये नौजवानों की हरसंभव सहायता करना है।

(कॉपी संपादन : नवल)


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लेखक के बारे में

कुमार समीर

कुमार समीर वरिष्ठ पत्रकार हैं। उन्होंने राष्ट्रीय सहारा समेत विभिन्न समाचार पत्रों में काम किया है तथा हिंदी दैनिक 'नेशनल दुनिया' के दिल्ली संस्करण के स्थानीय संपादक रहे हैं

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