‘मूकनायक’ की सौवीं वर्षगांठ पर दिल्ली में जुटेंगे दलित-बहुजन बुद्धिजीवी

सौ साल पहले 31 जनवरी, 1920 को डॉ. आंबेडकर ने मूकनायक का प्रकाशन किया था। इस ऐतिहासिक पहल को याद करने दिल्ली के डॉ. आंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में देश भर के दलित-बहुजन बुद्धिजीवी जुटेंगे। फारवर्ड प्रेस की खबर

भारतीय संविधान के वास्तुकार डॉ. भीमराव आंबेडकर (14 अप्रैल, 1891 – 6 दिसंबर, 1956) यह जानते थे कि शिक्षा और सही जानकारी के सहारे ही दलितों व शोषितों को जागरूक बनाया जा सकता है। इसलिए उन्होंने राजनीतिक और सामाजिक मोर्चे पर लड़ाई के लिए पत्रकारिता काे अपना माध्यम बनाया था। वह 31 जनवरी, 1920 का ही दिन था जब उन्होंने मराठी पत्रिका मूकनायक का प्रकाशन किया था। आगामी 31 जनवरी, 2020 वह खास मौका है जब देश भर के दलित-बहुजन डॉ. आंबेडकर के उस अति महत्वपूर्ण प्रयास को कृतज्ञतापूर्वक स्मरण करेंगे। देश की राजधानी दिल्ली में इसके लिए एक खास आयोजन किया गया है, जिसमें देश भर के दलित-बहुजन बुद्धिजीवी भाग लेंगे।

बताते चलें कि डॉ. आंबेडकर ने 36 वर्ष तक सामाजिक व राजनीतिक संघर्ष को जारी रखते हुए पत्रकारिता भी की। उनकी पत्रकारिता का काल 1920 से 1956 तक विस्तारित है। ‘मूकनायक’ का पहला अंक 31 जनवरी 1920 को निकला, जबकि अंतिम अखबार ‘प्रबुद्ध भारत’ का पहला अंक 4 फरवरी, 1956 को प्रकाशित हुआ। इसके बीच में ‘बहिष्कृत भारत’ का पहला अंक 3 अप्रैल 1927 को, ‘समता’ का पहला अंक 29 जून 1928 और ‘जनता’ का पहला 24 नवंबर 1930 को प्रकाशित हुआ। 

मूकनायक की पहली प्रति का मस्ट हेड

‘मूकनायक’ का उल्लेख वर्तमान के संदर्भ में इसलिए भी प्रासंगिक है क्योंकि जिन चिंताओं को डॉ. आंबेडकर ने सौ वर्ष पहले रेखांकित किया था, कमोवेश वे आज भी मौजूद हैं। आज भी मीडिया संस्थानों में दलित-बहुजनों का प्रतिनिधित्व बहुत कम है। खासकर अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के लोगों का प्रतिनिधित्व नगण्य मात्र है। उनका प्रतिनिधित्व नहीं रहने के कारण कथित तौर पर मुख्यधारा की मीडिया में उनके विषयों पर विचार ही नहीं किया जाता है। इस संबंध में पहले भी सवाल उठते रहे हैं। इन सवालों पर 31 जनवरी को होने वाले आयोजन में विचार होगा।

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इस मौके को आंबेडकर की पत्रकारिता के 100 साल के उत्सव की संज्ञा दी गई है। दलित दस्तक पत्रिका इसकी मेजबानी कर रही है। यह आयोजन दिल्ली में 15 जनपथ स्थित डॉ. आंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में होगा। मुख्य वक्ताओं में प्रो. विवेक कुमार (विभागाध्यक्ष, सोशल साइंस, जेएनयू), वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश, दिलीप मंडल, मोहनदास नैमिशराय, श्योराज सिंह बेचैन (दिल्ली विश्वविद्यालय, हिंदी) और पत्रकार आरफा खानम शेरवानी शामिल होंगी। अध्यक्षता शांति स्वरूप बौद्ध करेंगे। कार्यक्रम के एंकर राष्ट्रीय कवि मुकेश गौतम और दलित दस्तक की संपादकीय सदस्य और लेखिका पूजा राय होंगे। 

अशोक दास, दलित दस्तक, दिल्ली

कार्यक्रम के बारे में दलित दस्तक के संपादक अशोक दास के मुताबिक, “बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर के जीवन के कई पहलू हैं। उन्होंने संविधान निर्माण के साथ-साथ महिलाओं और श्रमिकों के जीवन की बेहतरी के लिये काफी काम किया। वो एक सक्षम अर्थशास्त्री भी थे। इसी तरह वो एक पत्रकार भी थे। उन्होंने अपने जीवन में चार समाचार पत्र प्रकाशित किया। उस दौर में जब दलितों को तमाम अधिकार से वंचित रखा गया था, यह एक महत्वपूर्ण काम था। उनके द्वारा प्रकाशित पहले पत्र मूकनायक के 100 वर्ष पूरा होने पर हम उन्हें पत्रकार के रूप में श्रंद्धाजलि देना चाहते हैं। हमारी कोशिश है कि बाबासाहेब को एक पत्रकार के रूप में भी याद किया जाए।”

(संपादन : नवल)

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