कोविड-19 : अभी जांच का ही मुकम्मल इंतज़ाम नहीं, सरकार के दावों पर सवाल

भारत में अबतक कुल 724 कोरोना संक्रमितों की पहचान हुई है और मृतकों की संख्या बढ़कर 17 हो गई है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि 130 करोड़ की आबादी के लिए सरकार के पास पर्याप्त संख्या में जांच केंद्र ही नहीं हैं। जैगम मुर्तजा की खबर

दुनिया भर में कोरोना वायरस के बढ़ते ख़तरे के बीच भारत में इस महामारी से निबटने की तैयारियों पर तमाम तरह के सवाल उठ रहे हैं। हालांकि भारत की इतनी बड़ी आबादी के अनुपात में दुनिया के बाक़ी देशों के मुक़ाबले कोरोना के जितने मामले अभी तक सामने आए हैं उन्हें लेकर सरकार अपनी पीठ थपथपा सकती है लेकिन इसका एक दूसरा पहलू भी है। भारत में कोविड-19 की जांच निजी लैब के सहारे है और देश भर में कुल सौ सरकारी केंद्र भी नहीं हैं। 

कोविड-19 वायरस से लड़ने के लिए अगर सरकारी क़दम गिने जाएं तो एक दिन के जनता कर्फ्यू और 21 दिन के लॉकडाउन को सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि के रूप में माना जाएगा। लेकिन लॉकडॉउन का फैसला लेने में जितनी देरी हुई है वह सरकार की इच्छाशक्ति पर सवाल खड़ा करती है। सरकार को देश में पहला केस मिलने के बाद लॉकडाउन करने में 52 दिन लग गए जो तक़रीबन तीस दिन की देरी है। 

बहरहाल, इस महामारी के बहाने देश की स्वास्थ्य सुविधाएं भी सवालों के घेरे में हैं। देश भर में फिलहाल क़रीब 70 सरकारी या सैन्य अस्पताल हैं जिनमें कोरोना की जांच की सुविधा है। आबादी के लिहाज़ से सबसे घनत्व वाले और देश का दिल कहे जाने वाली हिंदी पट्टी में संसाधन सरकार की तैयारी की चुग़ली करते नज़र आते हैं।

दिल्ली में एक जांच केंद्र की तस्वीर

फिलहाल आबादी के लिहाज़ से देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में कोरोना की जांच महज़ पांच जगहों पर उपलब्ध है। इनमें तीन राजधानी लखनऊ में हैं। बाक़ी एक अलीगढ़ और एक बनारस में है। फिलहाल लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज के अलावा संजय गांधी पीजीआई और आर्मी कमांड अस्पताल कोरोना वायरस की जांच की सुविधा दे रहे हैं। इसके अलावा ये जांच सिर्फ एएमयू अलीगढ़ के जवाहर लाल नेहरु मेडिकल कॉलेज और बीएचयू वाराणसी के इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस में उपलब्ध है। हालांकि सरकार जल्द ही गोरखपुर मेडिकल कॉलेज और मेरठ मेडिकल कॉलेज में भी कोरोना जांच शुरु करने का दावा कर रही है।

उत्तराखंड में यह जांच महज़ गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, हल्दवानी में ही उपलब्ध है जबकि राजस्थान में कोरोना जांच की सुविधा सवाई मान सिंह, जयपुर, डॉक्टर एसएन मेडिकल कॉलेज, जोधपुर, आरएनटी मेडिकल कॉलेज, उदयपुर, झालावाड़ मेडिकल कॉलेज. झालावाड़ औऱ एसपी मेडिकल कॉलेज, बीकानेर में कराई जा सकती है।

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मध्य प्रदेश में कोरोना जांच के लिए दो सरकारी केंद्र हैं। यहां ये जांच ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, भोपाल और  नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रिसर्च इन ट्राइबल हेल्थ, जबलपुर में करवाई जा सकती है। छत्तीसगढ़ में ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, रायपुर, झारखंड में एमजीएम मेडिकल कॉलेज, जमशेदपुर, आर्मी कमांड हॉस्पिटल कोलकाता (यह जांच केंद्र झारखंड के लिए भी अधिसूचित है), हरियाणा में पंडित बीडी शर्मा पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, रोहतक और बीपीएस गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, सोनीपत में कोरोना की जांच की सुविधा है। जबकि चंडीगढ़ में पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजूकेशन एंड रिसर्च, चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश में इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज, शिमला और डॉ. राजेंद्र प्रसाद गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, कांगड़ा, टांडा, कोरोना जांच की सुविधा मुहैया करा रहे हैं।

वहीं देश की राजधानी दिल्ली में नेशनल सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल और एम्स में कोरोना जांच केंद्र हैं। इसके अलावा लेड़ी हार्डिंग हास्पिटल, और आर्मी हास्पिटल में भी कोरोना की जांच की सुविधा उपलब्ध है।

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इन सबके अलावा देश भर में 12 निजी लैब को कोरोना जांच के लिए सरकार से अनुमति मिली है। इनमें लाल पैथ लैब, रोहिणी सेक्टर 18,  स्टैंडर्ड लाइफ साइंस सेक्टर 34 गुड़गांव, एसआरएल लिमिटेड सेक्टर 18 गुड़गांव को कोरोना जांच के लिए अधिकृत किया गया है। इन निजी केंद्रों पर मुफ्त जांच की सुविधा नहीं है। सरकार ने निजी केंद्रों पर जांच के लिए 4500 रुपए फीस निर्धारित की है।

डा. हर्षवर्द्धन, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री

कुल मिलाकर देश भर में अभी तक महज़ 27 हज़ार लोगों की ही कोरोना जांच हो पाई है। ज़ाहिर तौर पर जबतक व्यापक स्तर पर जांच ही नहीं हो पाएगी तो कुल मामलों की संख्या का अंदाज़ा कैसे लगाया जा सकता है। जितनी अधिक संख्या में जांच होगी और संक्रमितों की पहचान होगी तब संक्रमण को सीमित करने में सफलता मिलेगी। मसलन दक्षिण कोरिया जिसकी आबादी भारत की आबादी का 26वां हिस्सा है। यहां लॉकडाउन के बजाय अधिक से अधिक जांच पर जोर दिया जा रहा है। यहां जांच के लिए 600 से ज़्यादा केंद्र बनाए गए हैं और करीब साढ़े तीन लाख लोगों की जांच की गई है। इस क्रम में वहां अबतक 9332 संक्रमित सामने आए हैं। वहां की सरकार के इस प्रयास से संक्रमण को सीमित करने में सफलता मिल रही है।

इस लिहाज़ से देखें तो भारत में कोरोना का ख़तरा बाक़ी दुनिया से बड़ा नज़र आता है। हालांकि स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन का कहना है कि जांच किट पर्याप्त संख्या में उपलब्ध कराने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है और देश इस महामारी से सफलतापूर्वक निपट पाएगा।

वहीं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डा. हर्षवर्धन ने कहा है कि कोविड -19 के बढ़ते ख़तरों के मद्देनजर सरकार 17 राज्यों में विशेष अस्पताल बनाने पर विचार कर रही है। फारवर्ड प्रेस से फोन पर बात करते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने सरकार की अब की कोशिशों की सराहना की और उम्मीद जताई कि जल्द ही इस गंभीर महामारी को हराने में देश और दुनिया के लोग कामयाब होंगे। देश में करोना टेस्टिंग की सुविधाओं पर उन्होंने कहा कि देश में करीब 70 केंद्र हैं जहां इसकी जांच हो सकती है सरकार इनका विस्तार करने की लगातार कोशिश कर रही है है।

(संपादन : नवल)

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