बहुजन साप्ताहिकी : मायावती के संबंध में अश्लील टिप्पणी मामले में रणदीप हुड्डा के खिलाफ आक्रोश

फिल्म अभिनेता रणदीप हुड्डा और अभिनेत्री युविका चौधरी का आपत्तिजनक बयान सामने आया है। इसे लेकर हरियाणा के हिसार में मामला दर्ज कराया गया है। बिहार के आदिवासी बहुल जमुई के इलाकों में कोरोना को लेकर लोगों में भ्रांतियां हैं। लोगों ने कोरोना का टीका देने गए स्वास्थ्यकर्मियों को खदेड़ दिया। पढ़ें, बहुजन साप्ताहिकी के तहत विशेष प्रस्तुति

बीते 27 मई, 2021 को हरियाणा के हिसार जिले के सामाजिक कार्यकर्ता व अधिवक्ता मलकीज सिंह ने फिल्म अभिनेता रणदीप हुड्डा के खिलाफ पुलिस अधीक्षक को शिकायत दर्ज करायी है। इसके पीछे करीब नौ साल पहले एक टॉक शो के दौरान रणदीप हुड्डा द्वारा अश्लील, जातिवादी व आपत्तिजनक जोक सुनाये जाने संबंधी एक वायरल हुआ वीडियो है। मलकीत सिंह ने फारवर्ड प्रेस को बताया कि उन्होंने एससी-एसटी एक्ट के तहत रणदीप के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने हेतु पुलिस अधीक्षक से अनुरोध किया है।

वहीं रणदीप हुड्डा को संयुक्त राष्ट्र की जंगली जानवरों की प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण संबंधी संधि (सीएमएस) के राजदूत के पद से हटा दिया गया है। बताते चलें कि रणदीप को फरवरी 2020 में तीन साल के लिए राजदूत नियुक्त किया गया था।

रणदीप के बाद युविका चौधरी ने भी बोले ‘कुबोल’, एफआईआर दर्ज

इस बीच एक और फिल्म अभिनेत्री युविका चौधरी के खिलाफ अनुसूचित जाति अधिकार मंच के कार्यकर्ता रजत कलसन ने 26 मई, 2021 को हांसी की पुलिस अधीक्षक नितिका गहलोत को शिकायत की है। उन्होंने अपनी शिकायत में कहा है कि फिल्म अभिनेत्री युविका चौधरी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी किया है। इसमें अभिनेत्री ने अनुसूचित जाति के लिए अपमानजनक व आपत्तिजनक टिप्पणी की है। 

बसपा प्रमुख मायावती और फिल्म अभिनेता रणदीप हुड्डा की तस्वीर

फारवर्ड प्रेस को जानकारी देते हुए रजत कलसन ने बताया कि उक्त वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। इस शिकायत के साथ शिकायतकर्ता ने उक्त वीडियो की सीडी भी दी थी, जिसकी साइबर सेल द्वारा औपचारिक जांच के बाद 28 मई, 2021 को शहर थाने में युविका चौधरी के खिलाफ एक एफआईआर दर्ज कर दी गई। एफआईआर अनुसूचित जाति व जनजाति अत्याचार अधिनियम की धारा 3 (1) (यू) के तहत दर्ज की गई है जो कि गैर जमानती है। 

हालांकि कलसन ने बताया कि इस तरह के मामले में पुलिस एफआईआर दर्ज करने से बचने का प्रयास करती रही है। उन्होंने बताया कि सामान्य तौर पर ऐसे मामलों को पुलिस शिकायत मिलने के उपरांत विधिक परामर्श के लिए अपनी टीम को भेजती है और होता यह है कि सरकारी वकीलों की टीम ऐसे मामलों में नकारात्मक टिप्पणी करते हैं। इसके कारण मुकदमा दर्ज नहीं होता है। 

पुलिस बना रही है लॉकडाउन का बहाना

रणदीप हुड्डा के मामले में कलसन ने बताया कि हिसार पुलिस अधीक्षक ने अभी तक एफआईआर दर्ज नहीं किया है। वहीं युविका चौधरी के मामले में पुलिस का कहना है कि लॉकडाउन के कारण कार्रवाई में देरी हो रही है।

इससे पहले दलित जाति के लिए अपमानजनक शब्द इस्तेमाल करने पर टीवी सीरियल ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ की अभिनेत्री मुनमुन दत्ता के खिलाफ रजत कलसन की शिकायत पर थाना शहर हांसी की पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी। रजत ने बताया कि इस मामले में भी पुलिस कोरोना और लॉकडाउन का राग अलाप रही है। 

बताते चलें कि पिछले साल क्रिकेटर युवराज सिंह ने भी अनुसूचित जाति के लोगों के खिलाफ एक वीडियो में आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इस मामले में रजत कलसन ने मुकदमा दर्ज कराया था। इस संबंध में पूछने पर कलसन ने बताया कि युवराज सिंह को इस मामले में हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी है और उसने मामला खत्म करने की याचना की है। 

यह केवल मायावती जी का अपमान नहीं है, हम सबका है : अनिता भारती

वहीं इस मामले में दलित लेखक संघ की अध्यक्ष अनिता भारती ने फारवर्ड प्रेस को बताया कि रणदीप हुड्डा द्वारा की गई टिप्पणी उनकी द्विजवादी मानसिकता को प्रदर्शित करता है। उन्होंने ऐसी महिला के खिलाफ टिप्पणी की है, जो दलित समाज के लिए सम्मानित हैं और उनके खिलाफ टिप्पणी कर रणदीप हुड्डा ने दलित समाज को अपमानित किया है। उनके खिलाफ एससी-एसटी अत्याचार अधिनियम के तहत मामला चलाया जाना चाहिए और ऐसी मानसिकता रखने वालों को जेल भेजा जाना चाहिए। अनीता भारती ने राष्ट्रीय महिला आयोग के संबंध में कहा कि यह आयोग केवल दल विशेष से जुड़ी महिलाओं के मामले में सक्रिय नजर आती है। उसे अपनी कार्यप्रणाली में बदलाव लाना चाहिए। वजह यह कि यह केवल दलित वर्ग से आनेवाली मायावती जी का सवाल नहीं है, यह सभी महिलाओं के लिए अपमानजनक है।

वहीं बिहार की राजधानी पटना की दलित सामाजिक कार्यकर्ता प्रतिमा पासवान ने फारवर्ड प्रेस को बताया कि वह इस मामले को लेकर एक मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी कर रही हैं। उन्होंने कहा कि रणदीप हुड्डा द्वारा की गयी टिप्पणी दलितों के प्रति द्विज वर्गों के मस्तिष्क में सड़ांध का परिणाम है।

छत्तीसगढ़ में बिना सुरक्षा किट के कोरोना योद्धा 

मामला आदिवासी बहुल राज्य छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले का है। कोरोना महामारी की इस दूसरी भयानक लहर में भी कोरोना योद्धा बिना सुरक्षा किट के काम कर रहे हैं। कोरबा निगम क्षेत्र के अंतर्गत सैकड़ों मितानिनों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, शिक्षकों और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को घर-घर जाकर कोरोना पीड़ितों का सर्वे करने और कोरोना से बचाव के लिए जागरूकता फैलाने का काम दिया गया है, लेकिन ये ‘कोरोना योद्धा’ बिना किसी सुरक्षा किट के मजबूरी में अपनी जान जोखिम में डालकर यह काम कर रहे हैं।

छत्तीसगढ़ के मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव संजय पराते ने फारवर्ड प्रेस को बताया कि यह कड़वी सच्चाई तब उजागर हुई, जब दसियों कोरोना योद्धा निगम के मोंगरा वार्ड में बिना सेनेटाइजर और बिना मास्क और ग्लव्स के सर्वे के लिए पहुंचे। स्थानीय लोगों ने जब सवाल उठाया तब कर्मियों ने बताया कि निगम द्वारा उन्हें सुरक्षा सामग्री नहीं दी जा रही है। बाद में स्थानीय लोगों ने अपने पैसे से कर्मियों को थर्मामीटर, साबुन, सेनेटाइजर, मास्क व दस्ताने आदि शामिल है।

बिहार में कोरोना का टीका लगाने गए डाक्टरों को आदिवासियों ने खदेड़ा

गत 27 मई, 2021 को बिहार के जमुई जिले के लक्ष्मीपुर प्रखंड के जिनहरा गांव में आदिवासियों ने टीकाकरण करने गए स्वास्थ्यकर्मियों को खदेड़ दिया। स्वास्थ्य कर्मियों का नेतृत्व स्थानीय रेफरल अस्पताल के चिकित्सक डॉ. डी. के. धुसिया कर रहे थे। फारवर्ड प्रेस से बातचीत में उन्होंने बताया कि जब वे गांव पहुंचे तब लोग उग्र हो गए। अधिकांश ने कहा कि कोरोना के टीके से लोगों की मौतें हो रही हैं। जबकि यह बेबुनियाद बात है। कोरोना की महामारी से बचने के लिए यह टीका बहुत जरूरी है। वहीं स्थानीय मुखिया ब्रह्मदेव मंडल ने बताया कि वह अपने स्तर से लोगों को समझा रहे हैं।

किसानों ने आंदोलन के छह माह पूरे होने पर काला दिवस मनाया, बुद्ध को किया याद

तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन को बीते 26 मई को छह माह पूरे हो गए। इस मौके पर आंदोलनरत किसानों ने काला दिवस मनाया। सिंघु बार्डर पर कार्यक्रम का आयोजन हुआ और किसानों ने बुद्ध को भी याद किया। आयोजन की जानकारी देते हुए किसान आंदोलन से जुड़े लवप्रीत सिंह ने बताया कि इस मौके पर उन 477 लोगों को याद किया गया जिनकी जान आंदोलन के दौरान चली गई। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसा ही आयोजन गाजीपुर और टिकरी बार्डर भी किया गया।

(संपादन : अनिल)


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