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जानती हूं कि सरकार एक दिन या तो जेल में बंद करेगी या गोली मार देगी : सोनी सोरी

पैगासस प्रकरण में दलित-बहुजन विचारों को लेकर काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता और पत्रकारों की जासूसी कराए जाने का मामला सामने आया है। फारवर्ड प्रेस ने सोनी सोरी, डिग्री प्रसाद चौहान, अशोक भारती और रूपेश कुमार सिंह व ईप्सा शताक्षी से दूरभाष पर बातचीत की

“मैं जानती हूं कि मैं जो बस्तर में अपने लोगों के हक-हुकूक के लिए कर रही हूं, इसके लिए सरकार हमें जेल भी भेज सकती है और चाहे तो गोली भी मार सकती है। जासूसी कराने के पीछे उनका मकसद यही रहा होगा कि सोनी सोरी के खिलाफ कुछ सबूत मिल जाय ताकि उसके आधार पर उसे जेल भेजा जाय और अंतत: उसे काम करने से रोका जाय। और क्या कारण हो सकता है मेरी जासूसी का?” ये बातें फारवर्ड प्रेस से दूरभाष पर बातचीत में छत्तीसगढ़ की प्राख्यात सामाजिक कार्यकर्ता सोनी सोरी ने कही।

पेगासस स्पाईवेयर के जरिए देश के जिन नेताओं, अधिकारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और पत्रकारों के मोबाइलों की जासूसी कराए जाने संबंधी रपटें प्रकाश में आई हैं, उनमें से एक सोनी सोरी भी हैं। वे कहती हैं कि “एक महिला होने के बावजूद भारत सरकार के द्वारा हर तरह के जुल्म मुझ पर ढाए गए। जेल में मेरे साथ जघन्य दुर्व्यवहार किया गया। आए दिन एनआईए और पुलिस के लोग मुझसे पूछताछ करने आते हैं। तो यह तो उनका पहले से चलता रहा है। मैं यह जानना चाहती हूं कि क्या आदिवासियों के हक का सवाल उठाना गलत है? आज कितना जुल्म ढाया जा रहा है। हमारे लोगों को विस्थापित किया जा रहा है। फर्जी एनकाउंटर के मामले सामने आते ही रहते हैं। पहाड़ों को लूटा जा रहा है। ऐसे में हमारे सामने लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष के अलावा कोई विकल्प नहीं है। हम तो संघर्ष करते ही रहेंगे। अब सारकार चाहे हमारी जासूसी कराए या फिर पहरे लगा दे। हम संघर्ष करते रहेंगे।”

जातिगत भेदभाव और दलित उत्पीड़न आदि के खिलाफ लड़ता रहूंगा : डिग्री प्रसाद चौहान

पैगासस प्रकरण में छत्तीसगढ़ के सामाजिक कार्यकर्ता और पीयूसीएल के राज्य अध्यक्ष डिग्री प्रसाद चौहान का नाम भी शामिल है। यह पूछने पर कि क्या उन्हें कभी ऐसा लगा कि उनके मोबाइल की जासूसी की जा रही है, चौहान ने बताया कि उनहें इसकी जानकारी 2019 से ही थी। तब सिटीजन लैब के द्वारा उन्हें इसकी सूचना दी गयी थी कि मेरे व्हाट्सअप आदि में छेड़छाड़ की जा रही है। इसके पहले एमनेस्टी की रिपोर्ट में भी जिन लोगों के ईमेल हैक किए जाने की बात सामने आयी थी, उनमें एक ईमेल अकाउंट उनका भी था।

बाएं से – सोनी सोरी, डिग्री प्रसाद चौहान, अशोक भारती तथा रूपेश कुमार सिंह व ईप्सा शताक्षी

यह जानते हुए कि आप पर सरकार निगरानी रख रही है, क्या आप किसी तरह का भय महसूस करते हैं? इसके जवाब में चौहान ने कहा कि “भय जैसा तो कुछ नहीं लगता है। लेकिन सरकार की इस साजिश को समझने की आवश्यकता है। सरकार चाहती है कि ऐसे लाेग जो समतामूलक समाज के पक्षधर हैं, जातिवाद के खिलाफ हैं, शोषण व उत्पीड़न के खिलाफ हैं, उन्हें लोगों की नजर में संदेहास्पद बना दिया जाय। इसके पहले सरकार की ओर से मुझे भीमा-कोरेगांव मामले में फांसने की कोशिश की गयी। तब पिछले साल सितंबर महीने में जबकि काेरोना चरम पर था, मुझे एनआईए द्वारा मुंबई बुलाया गया और वहां साढ़े आठ घंटे तक मुझसे पूछताछ की गयी।”

आप पेशे से वकील हैं तो क्या आप भारत सरकार के खिलाफ कोई कानूनी पहल करेंगे? यह पूछने पर चौहान ने कहा कि “निस्संदेह यह मामला भारतीय संविधान में उल्लेखित निजता के अधिकार का उल्लंघन करती है। लेकिन इससे हम सभी वाकिफ हैं। आप ही देखिए कि आज सरकार ने मेरी निजता का एक बार नहीं, हर दिन उल्लंघन करती रहती है। यहां तक कि रायपुर में मेरे घर के नीचे पुलिस वाले तैनात कर दिए जाते हैं। असली बात तो यह है कि सरकार अपनी कोशिशें करती रहती है और एक सामाजिक कार्यकर्ता होने के नाते जो मुझे करना है, मैं करता रहूंगा। हां, मैं इसे पहले जनता की अदालत में ले जाऊंगा।”

सरकार को जो करना है, करती रहे, समाज की बेहतरी का काम हम करते रहेंगे : अशोक भारती

“हमारी निजता क्या है। हम तो सार्वजनिक तौर पर पहले से रहे हैं। जब आप समाज के लिए काम करते हैं तो निजता जैसी कोई बात नहीं होती है। रही बात निगाह रखने की या फिर जासूसी करवाने की तो सरकार अपने तंत्र के माध्यम से पहले भी करती रही है।” यह कहना है आल इंडिया आंबेडकर महासभा से संबद्ध अशोक भारती का, जिनके मोबाइल की जासूसी पैगासस स्पाईवेयर के जरिए कराए जाने के संबंध में मामला प्रकाश में आया है। फारवर्ड प्रेस से दूरभाष पर बातचीत में उन्होंने कहा कि “सरकार अपने स्तर से निगरानी करती है, यह उसका काम है। हमारे कार्यक्रमों में गुप्तचर विभाग के कर्मचारी पहले से आते रहे हैं। इसके अलावा भी सरकार के पास निगरानी के कई तरीके हैं। अब वह हमारी जासूसी करवाए भी तो क्या फर्क पड़ता है। हम जानते हैं कि हम कोई गलत काम नहीं कर रहे हैं। हमारा काम वंचित समाज के लोगों को जागरूक करना है। हम बेखौफ अपना काम करते रहेंगे।”

केंद्र के कुकृत्य को सुप्रीम कोर्ट में देंगे चुनौती : रूपेश कुमार सिंह

झारखंड में स्वतंत्र पत्रकार रूपेश कुमार सिंह और उनकी पत्नी ईप्सा शताक्षी दोनों यह मानते हैं कि केंद्र सरकार के द्वारा पैगासस स्पाईवेयर के माध्यम से उनके उपर जासूसी से उनके हौसले पर कोई असर नहीं हुआ है। रूपेश ने बताया कि वह इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सरकार के खिलाफ याचिका दायर करेंगे। इस संबंध में वे अपने वकील से सलाह ले रहे हैं। उनके मुताबिक, पैगासस स्पाईवेयर के जरिए उनके मोबाइल की जासूसी कर सरकार ने निजता के उनके अधिकार का उल्लंघन किया गया है। 

यह पूछे जाने पर कि क्या उन्हें पहले ऐसा कभी कि उनके मोबाइल पर निगाह रखी जा रही है, रूपेश ने बताया कि “वर्ष 2017 में गिरिडीह में एक घटना घटी थी। एक आदिवासी सामाजिक कार्यकर्ता को पुलिस ने फर्जी एनकाउंटर में मार गिराया था। तब इसके खिलाफ बड़ा आंदोलन हुआ था। इस आंदोलन में तब झारखंड के तीन पूर्व मुख्यमंत्री भी शामिल हुए थे। इनमें शिबू सोरेन, हेमंत सोरेन और बाबूलाल मरांडी शामिल थे। इस घटना की रिपोर्टिंग मैंने की जो अलग-अलग पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई। उन दिनों मोबाइल पर बात करने के दौरान बीच-बीच में बीप की आवाज आती थी। इससे लगता था कि कोई है जो मेरे मोबाइल की बातचीत को सुन रहा है। इसे ध्यान में रखते हुए मैं कई बार अपनी पत्नी का मोबाइल अपने साथ ले जाता था। उस फोन से भी बीप की आवाज आती थी। बाद में जब पुलिस ने माओवादी के आरोप में फंसाने की पूरी कोशिश की। यहां तक कि छह महीने तक जेल में रखा गया।” 

(संपादन : अनिल)


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लेखक के बारे में

नवल किशोर कुमार

नवल किशोर कुमार फॉरवर्ड प्रेस के संपादक (हिन्दी) हैं।

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