h n

उपेक्षित हैं कोरोना के कारण शहीद हुए सफाईकर्मियों के परिजन

दिल्ली में सफाईकर्मी समुदाय के कम से कम 50 लोगों की मौत कोरोना के कारण हुई है। इनमें से कई थे जो अपने परिवार का पेट चलाने वाले एकमात्र थे। उनकी मौत के उनके परिजन बेहाल हैं। उन्हें कोई सहायता नहीं दी जा रही है। बता रहे हैं राज वाल्मीकि

दिल्ली में कोरोना की दूसरी लहर भले ही उतार पर है। लेकिन अकेले केवल दिल्ली में सफाईकर्मी समुदाय के कम से कम 50 लोगों की मौत कोरोना काल में हो गई है। उनके परिजनों का आज हाल-बेहाल है। कई परिवार तो ऐसे हैं, जिनमे कमाने वाला शख्स ही कोरोना का शिकार हो गया। वहीं सरकार की तरफ से ऐसे परिवारों को कोई राहत नहीं दी जा रही है। हालांकि केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार दोनों के द्वारा अखबारों में दावे किए जा रहे हैं। दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने तो विज्ञापनों में स्पष्ट रूप से कहा है– “कोविड से जो दुनिया छोड़ गए, उनके परिवारों के साथ है दिल्ली सरकार”। लेकिन हकीकत में शहीद सफाई कर्मियों के परिजनों को किसी प्रकार की मदद नहीं दी जा रही है।

पूरा आर्टिकल यहां पढें : उपेक्षित हैं कोरोना के कारण शहीद हुए सफाईकर्मियों के परिजन

लेखक के बारे में

राज वाल्मीकि

'सफाई कर्मचारी आंदोलन’ मे दस्तावेज समन्वयक राज वाल्मीकि की रचनाएं विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं। इन्होंने कविता, कहानी, व्यग्य, गज़़ल, लेख, पुस्तक समीक्षा, बाल कविताएं आदि विधाओं में लेखन किया है। इनकी अब तक दो पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं कलियों का चमन (कविता-गजल-कहनी संग्रह) और इस समय में (कहानी संग्रह)।

संबंधित आलेख

समावेशी शासक शिवाजी के बारे में झूठ फैला रहा आरएसएस
शिवाजी के जीवन और कार्यों का अध्ययन करने पर ब्राह्मणवाद के पैरोकारों का नैरेटिव पूरी तरह गलत साबित होता है। उन्हें सर्वाधिक चिंता गरीब...
पश्चिम बंगाल चुनाव में आदिवासी महिलाओं का प्रतिनिधित्व और अश्वमेधी राजनीति
2014 के बाद के राष्ट्रीय परिदृश्य को देखें, तो यह प्रवृत्ति और अधिक स्पष्ट रूप से सामने आती है, जहां बहुसंख्यक धर्म पर आधारित...
मुस्लिम पहचान के निहितार्थ एक सच्चाई यह भी
एक उच्च जाति और खेती की जमीन पर मिल्कियत रखने वाले मुसलमान के लिए मुस्लिम पहचान और मजदूर या पसमांदा तबके से आने वाले...
कारपोरेट ‘विकास’ के निशाने पर अंडमान-निकोबार और उसके वाशिंदे
निकोबार द्वीप में करीबन 90,000 करोड़ का ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट शुरू हो चुका है और वहां के समुद्र तट, भौगोलिकी, लाखों की संख्या में...
कब तक दलित सहते रहेंगे जाति के नाम पर अपमानजनक शब्द?
ऐसी स्थिति में जब अनुसूचित जातियों के लोग उच्च शिक्षित हो रहे हैं, तरक्की कर रहे हैं, ऊंचे ओहदों पर काबिज हो रहे हैं।...