ओबीसी आरक्षण के पक्ष में संसद में दिखी एकजुटता, पढ़ें किसने क्या कहा?

कल 10 अगस्त, 2021 को लोकसभा का नजारा बदला-बदला था। 127वें संविधान संशोधन, विधेयक-2021 पर चर्चा के दौरान सभी ओबीसी के सवाल पर एकमत थे। अधीर रंजन ने कहा कि जैसे तमिलनाडु में 69 फीसदी आरक्षण है उसी तरह दूसरे राज्यों को भी ये ताक़त दी जाए कि वो आरक्षण की व्यवस्था को 50 फीसदी से ज्यादा बढ़ा सकें। पढ़ें सांसदों ने जो कुछ कहा

कल 10 अगस्त, 2021 को लोक सभा ने सर्वसम्मति से 127वां संविधान संशोधन विधेयक पारित कर दिया है। इसके ज़रिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की अपनी अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) सूची तैयार करने का अधिकार दिया गया है। राज्य सभा ने इस विधेयक को 09 अगस्त, 2021 को ही पारित कर दिया था। बड़ी बात यह रही कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच पेगासस और कृषि कानूनों के संबंध में तमाम गतिरोधों के बावजूद इस विधेयक पर सभी दल एक मत नज़र आए और बिना किसी विरोध के यह विधेयक दोनों सदनों में पारित हो गया। लोकसभा में मतविभाजन कराया गया और विधेयक के पक्ष में कुल 385 वोट पड़े और विरोध में शून्य। चर्चा के दौरान जातिगत जनगणना करवाने और आरक्षण की सीमा 50 फीसदी से बढ़ाये जाने की मांग भी उठी।

दरअसल यह विधेयक केंद्र सरकार ने भूल सुधार के उद्देश्य से लेकर आयी थी। इसके पहले सरकार ने 123वें संशोधन विधेयक के जरिए यह प्रावधान कर दिया था कि ओबीसी में कौन-सी जाति रहेगी अथवा नहीं रहेगी, इसका निर्धारण का अधिकार केंद्र के पास रहेगा। इसे लेकर सवाल उठाए जा रहे थे। इसी के आधार पर 5 मई, 2021 को सुप्रीम कोर्ट ने मराठा आरक्षण के मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी की थी और उसने मराठा आरक्षण को खारिज करने के कारणों में से एक बताया था। 

बीते 8 अगस्त को केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने संविधान संशोधन (127वां) विधेयक, 2021 लोकसभा में पेश किया था। विधेयक पर चर्चा के लिए 4 घंटे का समय आवंटित किया गया। विधेयक के उद्देश्य में कहा गया है कि संविधान के अनुच्छेद 342क का संशोधन करने और अनुच्छेद 338 (ख) एवं अनुच्छेद 366 में संशोधन करने की ज़रुरत है। इस बीच तमाम विपक्षी पार्टियां 9 अगस्त को ही इस विधेयक का पूरी तरह समर्थन करने का ऐलान कर चुकी थीं। प्रस्तुत है इस विधेयक को लेकर हुई चर्चा के दौरान विभिन्न सदस्यों की राय। 

विधेयक पेश करते वक़्त डॉ. वीरेंद्र कुमार ने कहा कि ओबीसी से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक देश के संघीय ढांचे और ओबीसी सूची से जुड़े राज्यों के अधिकार को सशक्त बनाएगा। उन्होंने इस मौक़े को देश के लिए ऐतिहासिक दिन बताते हुए कहा कि हम ऐसे महत्वपूर्ण संशोधन विधेयक पर चर्चा कर रहे हैं जो ओबीसी की सूची के निर्धारण के राज्यों के अधिकार को बहाल करने वाला है। केंद्रीय मंत्री ने दावा किया कि मोदी सरकार ने ओबीसी वर्गों के कल्याण के लिए इसके अलावा भी कई ऐतिहासिक क़दम उठाए हैं।  

127वें संविधान संशोधन विधेयक-2021 के मसले पर बैठक करते विपक्षी दलों के सदस्य

चर्चा में हिस्सा लेते हुए प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि, “सवाल ये है कि आख़िर आज ओबीसी विधेयक में संशोधन करने की नौबत क्यों आई?” उन्होने केंद्र सरकार से पूछा कि, “2018 में 102वां संविधान संशोधन लाया गया। आपने ओबीसी कमीशन बनाया लेकिन आपने राज्यों के अधिकारों का हनन किया। अब यूपी, उत्तराखंड में चुनाव है तो आप लोगों को ख़ुश करने के लिए ये संशोधन लाए हो। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने यह क़दम मजबूरी में उठाया है और कांग्रेस पार्टी जनहित के लिए हम इस बिल का समर्थन कर रही है। उन्होंने मांग की, “आरक्षण में 50 फीसदी की बाध्यता पर भी कुछ किया जाए। अधीर रंजन ने कहा कि जैसे तमिलनाडु में 69 फीसदी आरक्षण है उसी तरह दूसरे राज्यों को भी ये ताक़त दी जाए कि वो आरक्षण की व्यवस्था को 50 फीसदी से ज्यादा बढ़ा सकें।”

जदयू सांसद व जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह ने कहा कि “सरकार की नीयत एकदम साफ है।” उन्होंने केंद्र सरकार से 2022 में जातिगत जनगणना कराने की अपनी पार्टी की मांग भी दोहराई। राजीव रंजन ने दावा किया कि ओबीसी को आप पूरी तरह से तब तक न्याय नहीं दिलाया जा सकता, जब तक कि जातिगत जनगणना नहीं हो जाएगी। 

विधेयक का समर्थन करते हुए समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा, “पिछड़े वर्गों को तब फायदा होगा जब आरक्षण की सीमा 50 फीसदी से ज़्यादा बढ़ायी जाए, और हमारी सबसे बड़ी मांग है कि जाति के आधार पर भी जनगणना की जाए।” उन्होंने आगे कहा कि “जाति जनगणना उनकी पार्टी की बहुत पुरानी मांग रही है। जातिगत जनगणना न होने से हर जाति को लेकर बेहद कंफ्यूज़न हुआ है।”

भाजपा सांसद डॉ. संघमित्रा मौर्य ने आरोप लगाया कि, “कांग्रेस ने आरक्षण को ख़त्म करने की शुरुआत साल 2010 में कर दी थी। कांग्रेस चाहती तो 2014 से पहले तक इस विधेयक में संशोधन कर सकती थी।”

विधेयक के समर्थन में निर्दलीय सांसद नवनीत राणा ने कहा कि केंद्र सरकार ने ये बिल लाकर ऐतिहासिक निर्णय लिया है। उन्होंने महाराष्ट्र सरकार से अपील की कि दो दिन का अविधेशन बुलाकर ओबीसी समुदाय के साथ न्याय किया जाए।

वहीं डीएमके सांसद दयानिधि मारन ने चर्चा के दौरान आरोप लगाया कि सरकार के सारे अधिकार पीएम और गृहमंत्री अपने पास रखना चाहते हैं, इसलिए ऐसे हालात पैदा हुए हैं। उन्होंने आगे कहा कि वीपी सिंह ने मंडल आयोग लागू किया और बीजेपी ने उनकी कुर्सी ही छिनवा दी। दयानिधि मारन ने ओबीसी बिल को चुनाव से जोड़ते हुए कहा कि मैं उम्मीद करता हूं कि यूपी चुनाव हर साल हो, ताकि ज्यादा ओबीसी मंत्री बनाए जाएं और अन्य राज्यों में तमिलनाडु की तरह ओबीसी आरक्षण की सीमा 50 फीसदी से बढ़ाकर 69 फीसदी कर दी जाए।

बीएसपी सांसद मलूक नागर ने कहा कि कांग्रेस हमेशा पिछड़ों का वोट लेती रही लेकिन उनके लिए कुछ नहीं किया। उन्होंने आरोप लगाया कि आज अगर पिछड़ों को कुछ मिल रहा है तो कांग्रेस वाले समर्थन तो कर रहे हैं लेकिन वह भी शर्तों के आधार पर कर रहे हैं।

एमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि जो मुसलमानों में पिछड़ी जातियां हैं, उन्हें तेलंगाना में आरक्षण मिलता है लेकिन केंद्र में नहीं मिलता। उन्होंने आरोप लगाया कि मुसलमानों की वे 50 जातियां जो पिछड़ी हैं, उनकी कोई बात नहीं करता। मुसलमानों को सिर्फ इफ्तार की दावत और खजूर मिलेगा, लेकिन आरक्षण नहीं मिलेगा।

विधेयक का समर्थन करते हुए नेशनल कॉन्फ्रेंस सांसद हसनैन मसूदी ने कहा कि इस सरकार ने राज्यों के तमाम अधिकार छीन लिए हैं और अब अपनी ग़लतियों को यह बिल लाकर सुधारा जा रहा है।

सीपीएम सांसद ए.एम आरिफ ने भी अपनी पार्टी की तरफ से संविधान संशोधन विधेयक का समर्थन किया। आरिफ ने कहा कि अगर अगले साल यूपी में चुनाव न होते तो सरकार यह क़दम नहीं उठाती।

(संपादन : नवल/अनिल)


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