फूलन देवी की हत्या के मामले में सजा काट चुके शेर सिंह राणा के साथ मिलकर सत्ता की कैसी चाबी खोज रहे शिवपाल सिंह यादव?

सवाल उठता है कि क्या शिवपाल सिंह यादव यह नहीं जानते हैं कि वह जिसके साथ मंच साझा कर रहे हैं, वह कौन है और वह फूलन देवी कौन थीं, जिन्हें उनके बड़े भाई मुलायम सिंह यादव ने अपनी बहन माना था? नवल किशोर कुमार की खबर

बीते 10 अगस्त को दस्यु सुंदरी व राजनेता रहीं फूलन देवी की जयंती थी। उनका जन्म 10 अगस्त, 1963 को हुआ था। यदि 25 जुलाई, 2001 को उन्हें गोली मारकर हत्या नहीं की गयी होती तो वह अपने जीवन के 59वें साल में होतीं। 14 फरवरी, 1981 को कानपुर के सिकंदरा इलाके के बेहमई गांव में 22 ठाकुरों की हत्या करने के बाद फूलन देवी किवदंती बन चुकी थीं। बताया जाता है कि ये वे लोग थे, जिन्होंने फूलन देवी का बलात्कार किया था। उन दिनों उत्तर प्रदेश और बिहार के ग्रामीण इलाकों में गीत भी गाए जाते थे। वर्ष 1983 में फूलन देवी ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया। वह 1990 का दशक था। पूरे देश में ओबीसी आरक्षण और भाजपा की रथयात्रा को लेकर राजनीतिक गहमागहमी परवान पर थी। वर्ष 1994 में उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुलायम सिंह यादव सरकार ने फूलन देवी के खिलाफ दर्ज सभी 48 मुकदमों को वापस ले लिया और मुलायम सिंह यादव ने उन्हें मिर्जापुर लोकसभा क्षेत्र से उम्मीदवार बनाकर लोकसभा पहुंचाया। वह दो बार चुनाव जीतने में कामयाब रहीं।

मुलायम सिंह यादव फूलन देवी को अपनी बहन मानते थे। फूलन देवी ने भी राखी बांधकर उन्हें अपना भाई माना था। अब हालात बदल गए हैं। अब मुलायम सिंह यादव वृद्ध हो चुके हैं और कई रोगों से ग्रस्त भी हैं। उनकी पार्टी की कमान अब उनके बेटे अखिलेश सिंह यादव ने संभाल ली है और वे योगी आदित्यनाथ के पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं। फूलन देवी अखिलेश यादव की शादी में परिवार के एक सदस्य के रूप में शामिल हुई थीं। वे उन्हें बुआ कहते थे। अखिलेश यादव ने 25 जुलाई, 2018 को फूलन देवी को श्रद्धांजलि देते हुए फेसबुक पर एक तस्वीर को शेयर किया, जिसमें फूलन उनके और उनकी पत्नी डिंपल के सिर पर हाथ रखकर आर्शीवाद दे रहीं हैं। इस तस्वीर के साथ अखिलेश ने लिखा कि– “फूलन देवी जी की पुण्यतिथि पर श्रद्धासुमन. अगर हर स्त्री को सम्मान, सुरक्षा और न्याय मिले तो उनके चेहरों पर भी सच्ची मुस्कान आ सकेगी.”

बीते 25 जुलाई को अपनी इसी बुआ की बरसी पर अखिलेश यादव ने फेसबुक पर श्रद्धांजलि देते हुए एक वीडियो भी शेयर किया है, जिसमें फूलन देवी के जीवन को दिखाया गया है। 

वहीं फूलन देवी शिवपाल सिंह यादव को भैया कहती थीं। पत्रिका न्यूज के द्वारा प्रकाशित एक खबर के मुताबिक, स्वयं शिवपाल भी यह श्रेय लेने से गुरेज नहीं करते थे कि उन्होंने ही पहल करके फूलन देवी के उपर दर्ज सारे मुकदमे वापस करवाये और उन्हें पार्टी का उम्मीदवार बनाया।

अखिलेश यादव और डिंपल यादव को आशीर्वाद देतीं फूलन देवी। यह तस्वीर अखिलेश यादव ने अपने फेसबुक और ट्वीटर पर 25 जुलाई, 2018 को जारी किया

अब मुलायम सिंह यादव के परिवार में दरारें आ चुकी हैं। उनके छोटे भाई शिवपाल सिंह यादव, जो कि एक समय अपने भाई मुलायम सिंह यादव के दाहिने हाथ माने जाते थे, आज समाजवादी पार्टी से अलग प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के नाम से अलग पार्टी चला रहे हैं। उनकी पार्टी को चुनाव आयोग द्वारा चाबी चिन्ह प्रदान किया गया है। इन सबके पहले 2019 में वे सपा के टिकट पर फिरोजाबाद से लोकसभा चुनाव क्षेत्र से निर्वाचित हुए।

जाहिर तौर पर गंगा नदी में पानी बहुत बह चुका है। हालात इतने बदल चुके हैं कि बीते 17 जुलाई, 2021 को मुलायम सिंह यादव के भाई शिवपाल सिंह यादव शेर सिंह राणा के साथ नजर आए। वही शेर सिंह राणा जो फूलन देवी की हत्या के मामले में 13 साल तक जेल की सजा काट चुका है। जेल से बाहर आने के बाद वह इन दिनों राष्ट्रवादी जनलोक पार्टी बनाकर सियासत कर रहा है। फिरोजाबाद में उसकी पार्टी के कार्यक्रम में शिवपाल सिंह यादव ने शिरकत की। शिवपाल सिंह यादव और शेर सिंह राणा के बीच राजनीतिक संबंध को लेकर खबर भी प्रकाशित किया गया। इस संबंध में न्यूज-18 ने अपनी वेबसाइट पर खबर प्रकाशित किया है– शिवपाल की PSP लोहिया और शेर सिंह राणा की राजपा में हुआ गठजोड़, फिरोजाबाद में आज दिखाएंगे दम

अब सवाल उठता है कि क्या शिवपाल सिंह यादव यह नहीं जानते हैं कि वह जिसके साथ मंच साझा कर रहे हैं, वह कौन है और वह फूलन देवी कौन थीं, जिन्हें उनके बड़े भाई मुलायम सिंह यादव ने अपनी बहन माना था?

17 जुलाई, 2021 को फिरोजाबाद में शेर सिंह राणा के साथ मंच साझा करते शिवपाल सिंह यादव

हालांकि इस बारे में समाजवादी पार्टी कुछ भी बोलने से कतरा रही है। पार्टी में अखिलेश यादव के करीबी माने जाने वाले पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव राजेंद्र चौधरी से जब फारवर्ड प्रेस ने दूरभाष पर पूछा तो उन्होंने यह कहकर कुछ भी कहने से इंकार किया कि उन्हें कोई जानकारी ही नहीं है। 

इससे पहले 10 मार्च, 2021 को शेर सिंह राणा बेहमई गया था। वही बेहमई गांव जहां फूलन देवी ने अपने गैंग के साथ मिलकर 22 ठाकुरों की हत्या कर दी थी। वहां राणा के पहुंचने पर लोगों ने महानायक की तरह उसका स्वागत किया। उसके आगमन पर स्थानीय अखबारों में बड़ी-बड़ी खबरें प्रकाशित की गयीं। बीते 25 जुलाई, 2021 को ही शेर सिंह राणा ने अपने लोगों को राजपूत स्वाभिमान दिवस के रूप में मनाने का आह्वान किया। 

सवाल है कि क्या उसे उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में भाजपा की सरकारों का संरक्षण मिला हुआ है? 

अभी हाल ही में बीते 6 अगस्त, 2021 को एक स्थानीय यूट्यूब चैनल “दी परफेक्ट पिक्चर” के द्वारा प्रसारित इंटरव्यू में उसने बताया है कि वह राष्ट्रवादी जनलोक पार्टी का राष्ट्रीय संयोजक है। उसका जन्म रूड़की, उत्तराखंड के एक जमींदार परिवार में हुआ। उसके मुताबिक, जब वह स्नातक के अंतिम वर्ष का छात्र था और देहरादून में था तब उसका नाम फूलन देवी हत्याकांड से जोड़ा गया। इसके कारण उसे 2001 में तिहाड़ जेल में भेजा गया। इसी बातचीत में वह भारत से फरार होने की बात भी कहता है और अफगानिस्तान से पृथ्वीराज चौहान की कब्र की मिट्टी लाने की बात कहता है। इस बातचीत में वह बताता है कि उसके पक्ष में फूलन देवी की एक बहन मुन्नी देवी और फूलन देवी का पीए कालीचरण ने बयान दिया है। उसके मुताबिक जिस समय फूलन देवी की हत्या हुई, उस दिन वह दिल्ली में फूलन देवी के आवास में पहले से मौजूद था और हत्यारे नकाबपोश थे।

बीते 19 जून, 2021 को शिवपाल सिंह यादव से उनके घर पर मिलने गया शेर सिंह राणा (बाएं से तीसरा)

बड़बोलेपन का आदी हो चुका शेर सिंह राणा कहानियां गढ़ने में आगे रहा है। हकीकत यह है कि शेर सिंह राणा 2001 में गिरफ्तार किए जाने के करीब तीन साल बाद 17 फरवरी 2004 को तिहाड़ जेल से फरार बता दिया गया था। यह आज भी सवाल ही है कि तिहाड़ जैसे अति सुरक्षित जेल से शेर सिंह राणा यदि भागने में कामयाब हुआ तो कैसे हुआ या फिर उसे भगाने में किसने उसकी मदद की? फिर करीब दो साल के बाद 17 मई, 2006 को शेर सिंह राणा कोलकाता के एक गेस्ट हाउस में पकड़ा गया। इसके पहले वह बिहार के गया जिले में भी कुछ दिनों तक रणवीर सेना के एक कमांडर के घर पर मुंह छिपाकर रह रहा था।

खैर, यह सवाल यह भी है कि आखिर कानून के किन प्रावधानों के कारण फूलनदेवी की हत्या का मुख्य आरोपी जो सरेआम हत्यारा होने का गौरव स्वीकार करता है और जेल से बाहर है? एक सवाल यह भी है कि शेर सिंह राणा के साथ मिलकर शिवपाल सिंह यादव सत्ता की कैसी चाबी खोजते फिर रहे हैं?

(संपादन : अनिल)


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