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बहस तलब : ‘राम’ से किनको हुआ मुनाफा, किनकी हुई हकमारी?

इस मंदिर आंदोलन का सबसे ज्यादा नुकसान दलित जातियों और ओबीसी को हुआ है। मंदिर आंदोलन में चंदा खाने में भले ही सवर्ण आगे रहे हों और आगे भी मंदिर की कमाई ब्राह्मणों को ही मिलेगी, मंदिर आंदोलन में मरने वाले दलित और ओबीसी बड़ी संख्या में हैं।मंदिर के शोर की आड़ में आरक्षण पर हमला किया गया। सवर्णों को भी आरक्षण लागू किया गया। ओबीसी आरक्षण में लगातार कटौती और उसे छीनने के समाचार आते रहते हैं। पढ़ें, हिमांशु कुमार का विश्लेषण

छह दिसंबर को बाबा साहब का परिनिर्वाण दिवस के रूप में मनाया जाता है। भारत के मनुवादियों ने इसी दिन को 1992 में बाबरी मस्जिद तोड़ने के लिए षड्यंत्रपूर्वक चुना और अब वे इसे शौर्य दिवस के रूप में मनाते हैं। यह सामाजिक समता के प्रतीक दिन को सांप्रदायिक नफरत के दिन से प्रतिस्थापित करने की सोची समझी योजना के तहत किया गया है।

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लेखक के बारे में

हिमांशु कुमार

हिमांशु कुमार प्रसिद्ध मानवाधिकार कार्यकर्ता है। वे लंबे समय तक छत्तीसगढ़ में आदिवासियों के जल जंगल जमीन के मुद्दे पर काम करते रहे हैं। उनकी प्रकाशित कृतियों में आदिवासियों के मुद्दे पर लिखी गई पुस्तक ‘विकास आदिवासी और हिंसा’ शामिल है।

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