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ओबीसी आरक्षण विरोधियों की मंशा पर फिरा पानी, सुप्रीम कोर्ट ने फिर प्रदान की वैधता

बहुजन साप्ताहिकी के तहत इस बार पढ़ें ओबीसी आरक्षण से जुड़ी दो महत्वपूर्ण खबरें। एक ओर सुप्रीम कोर्ट ने नीट परीक्षाओं में ओबीसी आरक्षण को वैध करार दिया है तो दूसरी ओर राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, नई दिल्ली ने ओबीसी आरक्षण 27 प्रतिशत से घटाकर 22 प्रतिशत कर दिया है। साथ ही एक खबर झारखंड के खरसावां शहीद स्थल के बारे में

एक बार फिर पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को मिलनेवाले 27 फीसदी आरक्षण का विरोध करनेवालों को मुंह की खानी पड़ी है। सुप्रीम कोर्ट ने आज फिर ओबीसी आरक्षण को वैधता प्रदान किया है। दरअसल केंद्र सरकार के अधीन मेडिकल शिक्षण संस्थानाें में दाखिले में ओबीसी और आर्थिक आधार पर कमजोर वर्गो (ईडब्ल्यूएस) को मिलने वाले क्रमश: 27 प्रतिशत और 10 प्रतिशत आरक्षण को चुनौती दी गयी थी। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ और न्यायाधीश एस. बोपन्ना की खंडपीठ ने कल गुरुवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। 

शुक्रवार को यानी आज वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से हुई सुनवाई में खंडपीठ ने ओबीसी को दिए जानेवाले आरक्षण को वैध करार दिया। साथ ही उसने ईडब्ल्यूएस को मिलनेवाले आरक्षण को जारी रखने का फैसला दिया तथा कहा कि आय से संबंधित पांडेय कमीशन की अनुशंसाएं अगले साल लागू होंगी। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नीट पीजी के पाठ्यक्रम के लिए काउंसिलिंग शुरू करने का निर्देश भी दिया।

बताते चलें कि ईडब्लयूएस की पात्रका के लिए आय निर्धारण की सीमा 8 लाख रुपए सलाना निर्धारित है। याचिकाकर्ताओं ने इसके लिए तय मापदंडों को चुनौती दी थी और उनकी मांग थी कि इसे घटाकर ढाई लाख रुपए कर दी जाय। 

आयोग को दरकिनार कर राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय ने घटाया ओबीसी आरक्षण

ओबीसी आरक्षण को कम करने की साजिश एक बार फिर उजागर हुई है। राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय,नई दिल्ली  द्वारा एक विज्ञापन में ओबीसी को दिए जानेवाले आरक्षण को 27 प्रतिशत से घटाकर 22 प्रतिशत कर दिया गया है। विश्वविद्यालय द्वारा जारी यह विज्ञापन राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग द्वारा जून, 2021 में दिए गए दिशा-निर्देशों के विपरीत है। तब आयोग ने देश के सभी विधि विश्वविद्यालयों में ओबीसी की हकमारी को संवैधानिक उल्लंघन करार दिया था और निर्देश दिया था कि ओबीसी अभ्यर्थियों को हर हाल में 27 फीसदी आरक्षण का लाभ मिले।

सुप्रीम कोर्ट, नई दिल्ली

कोलकाता में जुटे दलित साहित्यकार, नई संभावनाओं पर हुआ विमर्श 

बीते 2 जनवरी, 2022 को कोलकाता के बैरकपुर में दलित साहित्यकारों का जुटान हुआ। युवा दलित साहित्यकार मंच द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं काव्य संगोष्ठी का आयोजन किया गया। ‘दलित साहित्य की सृजनधर्मिता और नई संभावनायें’ विषयक गोष्ठी को संबोधित करते हुए विश्वभारती शांति निकेतन विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर डॉ. रणवीर सुमेध भगवान ने अपने बीज वक्तव्य में दलित आंदोलन और लेखन की पूरी परंपरा का जिक्र करते हुए मराठी और हिंदी साहित्य का तुलनात्मक वर्णन किया। वहीं पश्चिम बंगाल दलित साहित्य आकदेमी के सह सभापति डॉ. आशीष हीरा ने सत्र के मुख्य अतिथि के तौर पर अपने वक्तव्य में बांग्ला दलित साहित्य की रचनाधर्मिता में पीड़ा के इतिहास का स्मरण कराते हुए सहानुभूति और स्वानुभूति पर भी दृष्टि इंगित किया। युवा आलोचक डॉ.सुकेश लोहार ने अपने वक्तव्य में दलित समाज का श्रम से रिश्ता बताते हुए श्रमजीवियों के गीत को दलित साहित्य में लाने की आवश्यकता पर जोर दिया या। जबकि वर्धमान विश्वविद्यालय के डॉ. शशि शर्मा अपने वक्तव्य में दलित साहित्य की सम्भावनाओं को वर्तमान से जोड़ा।

गोष्ठी के दौरान जुटे दलित साहित्यकार

डॉ. कार्तिक चौधरी ने चटकल मजदूर इलाके के दलितों की स्थिति की बात की। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में दलित अस्मिता का प्रयोग व्यवसायिक दोहन के लिए भी हो रहा है। दलित आंदोलन एवं अभिव्यक्ति के लिए सोशल मीडिया को वर्तमान समय के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना है। मुख्य वक्ता के रूप में महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अभिलाष गोंड, महाराजा श्रीशचंद्र कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. कार्तिक चौधरी, काजी नजरुल विश्वविद्यालय की असिस्टेंट प्रोफेसर प्रतिमा प्रसाद एवं मानकर कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर मक्केश्वर रजक ने अपने विचार रखे। 

विश्व स्तरीय पर्यटन स्थल बनेगा खरसावां शहीद स्मारक : हेमंत सोरेन

बीते 1 जनवरी, 2022 को झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने खरसावां शहीद स्थल जाकर 1 जनवरी, 1948 को शहीद हुए आदिवासियों को श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर केंद्रीय अनुसूचित जनजाति मंत्री अर्जुन मुंडा भी मौजूद रहे। साथ ही, राज्य सरकार में मंत्री चम्पई सोरेन, बन्ना गुप्ता, जोबा माझी, विधायक दशरथ गागराई, दीपक बिरुआ, निरल पूर्ति, सविता महतो, सुखराम उरांव, सांसद सह कांग्रेस की कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष गीता कोड़ा तथा पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा आदि ने भी वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

सनद रहे कि झारखंड के आदिवासी इस दिन को काला दिवस के रूप में मनाते हैं। हेमंत सोरेन ने कहा कि सरायकेला जिले के खरसावां शहीद स्थल को विश्वस्तरीय पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जायेगा। इसकी पहल शुरू कर दी गयी है। इस पर लगभग सोलह करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसमें बहुद्देशीय भवन के साथ अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध करायी जायेंगी। उन्होंने कहा कि आज के दिन हजारों की संख्या में यहां लोग श्रद्धांजलि देने आते हैं। इसलिए आज का दिन गौरव का दिन होने के साथ-साथ दुख का दिन भी है। आदिवासी समुदाय हमेशा से संघर्षरत रहा है और संघर्ष ही आदिवासियों की पहचान है। 

केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने शहीद स्थल पर शहीदों को श्रद्धांजलि देने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि झारखंड के सरायकेला जिले के खरसावां के शहीद स्थल की विशेष पृष्ठभूमि रही है। यहां बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय के लोगों ने बलिदान दिया है। ऐसे ही देश के विभिन्न क्षेत्रों में आदिवासी समुदाय के लोगों ने कहीं देश के लिए, तो कहीं जल-जंगल-जमीन के लिए अपने प्राणों की आहुति दी है। 

खरसावां के शहीदों को श्रद्धांजलि देते मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन

बताते चलें कि 1947 में आजादी के बाद पूरा देश राज्यों के पुनर्गठन के दौर से गुजर रहा था। तभी अनौपचारिक तौर पर 14-15 दिसंबर, 1947 को ही खरसावां व सरायकेला रियासतों का विलय उड़ीसा में कर दिया गया था। औपचारिक तौर पर 1 जनवरी 1948 को कार्यभार हस्तांतरण करने की तिथि मुकर्रर हुई थी। उसी दिन के लिए आदिवासी नेता जयपाल सिंह ने खरसावां व सरायकेला को ओडिशा में विलय करने के विरोध में खरसावां हाट मैदान में एक विशाल जनसभा का आह्वान किया था। कोल्हान के विभिन्न क्षेत्रों से जनसभा में हजारों की संख्या में लोग पहुंचे थे, परंतु किसी कारणवश जनसभा में जयपाल सिंह नहीं पहुंच सके थे। वहीं ओडिशा सरकार ने काफी संख्या में पुलिस बल की तैनाती कर दी थी। अचानक उड़ीसा पुलिस ने फायरिंग शुरू कर दी, जिसमें हजारों आदिवासी शहीद हो गये थे।

(संपादन : अनिल, इनपुट सहयोग : विशद कुमार)


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लेखक के बारे में

नवल किशोर कुमार

नवल किशोर कुमार फॉरवर्ड प्रेस के संपादक (हिन्दी) हैं।

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