आदिवासी युवक की हत्या को लेकर फिर कटघरे में छत्तीसगढ़ पुलिस

छत्तीसगढ़ पुलिस का जवान और मृतक के भाई रेनुराम नुरेटी ने कहा है कि उसका भाई तो पुलिस में भर्ती होने की तैयारी कर रहा था। वह नक्सली नहीं था। उसने 9 नवंबर, 2021 को छत्तीसगढ़ पुलिस के तहत बस्तर फाइटर्स में भर्ती के लिए आवेदन भी किया था। वह उसकी तैयारी में लगा था। फिर उसे नक्सली क्यों बताया जा रहा है? मनीष भट्ट मनु की खबर

एक बार फिर छत्तीसगढ़ की पुलिस पर एक आदिवासी युवक की हत्या फर्जी नक्सली मुठभेड़ बताकर किए जाने का आरोप लगा है। मामला नारायणपुर ज़िले के भरंडा गांव का है, जहां गत 23 जनवरी 2022 को एक युवक की मौत पुलिस की गोलीबारी में हो गई। मृतक की पहचान सिगोड़ी तराई गांव के निवासी मानू राम नुरेटी के रूप में हुई है। इस घटना के बारे में छत्तीसगढ़ पुलिस ने सफाई दी है कि मृतक नक्सली था और उसके पास से आपत्तिजनक सामग्रियां बरामद हुई हैं।

वहीं इस मामले की पोल मृतक के भाई रेनुराम नुरेटी ने खोल दी है। वह छत्तीसगढ़ पुलिस के ही एक अंग डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (डीआरजी) बल का जवान है। रेनुराम नुरेटी ने कहा है कि उसका भाई तो पुलिस में भर्ती होने की तैयारी कर रहा था। वह नक्सली नहीं था। उसने 9 नवंबर, 2021 को छत्तीसगढ़ पुलिस के तहत बस्तर फाइटर्स में भर्ती के लिए आवेदन भी किया था। वह उसकी तैयारी में लगा था। फिर उसे नक्सली क्यों बताया जा रहा है?

मृतक ने बस्तर फाइटर्स की नौकरी के लिए दिया था आवेदन

बताते चलें कि वर्ष 2021 से छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा बस्तर संभाग में नक्सलियों पर नियंत्रण के लिए आदिवासी युवकों को पुलिस बल में शामिल कर रही है। इसका स्वरूप कमोबेश सलवा जुडूम के जैसा है। इसे बस्तर फाइटर्स कहा गया है।

इस संबंध में नारायणपुर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नीरज चंद्राकर ने मीडियाकर्मियों को बताया कि बीते 23 जनवरी की रात करीब डेढ़ बजे भरंडा गांव के पास डीआरजी फोर्स की टीम सर्च अभियान पर निकली हुई थी। मुख्य मार्ग की पुलिया के पास 10-15 नक्सलियों ने पुलिस टीम पर फायरिंग की। करीब 10-15 मिनट तक चली फायरिंग में डीआरजी की टीम ने भी जवाबी फायरिंग की। चंद्राकर ने आगे बताया कि फायरिंग बंद होने के बाद सुबह-सुबह जब क्षेत्र में वापस सर्च अभियान शुरू किया गया तो एक शव मिला, जिसके पास से एक भरी हुई बंदूक और नक्सली सामग्री भी मिली, जिसमें एक तीन लीटर का कुकर बम, तार, नक्सली साहित्य और कुछ बैनर-पोस्टर भी मिले हैं।

मुठभेड़ के फर्जी होने की शिकायत करते मृतक के परिजन

वहीं, मृतक मानू राम नुरेटी की पत्नी ने कहा है कि “मेरे पति एक किसान थे। उनके पास कभी कोई हथियार नहीं था। रविवार रात करीब 10 बजे मेरे पति पक्षियों के शिकार के लिए एक गुलेल के साथ घर से बाहर गए थे। उन्होंने मेरा स्वेटर और चप्पल भी पहना हुआ था, लेकिन पुलिस ने फर्जी मुठभेड़ में उन्हें मार दिया।”

हालांकि मानु राम के फर्जी मुठभेड़ में मारे जाने के आरोप का भी नारायणपुर पुलिस ने जवाब दिया है। मृतक के परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नीरज चंद्राकर ने कहा कि मुठभेड़ के फर्जी होने का आरोप पूरी तरह निराधार है। भले ही मारे गए नक्सली का भाई डीआरजी का जवान है, मगर पहले वह भी एक नक्सली संगठन में था। मानू राम ने शायद अपने भाई को यह नहीं बताया था कि वह नक्सली है। मुठभेड़ के दौरान वहां मानू राम अन्य नक्सलियों के साथ मौजूद था।

बहरहाल, छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में पुलिस पर फर्जी मुठभेड़ों के आरोप लगते रहे हैं। जून 2012 में सरकेगुडा में सात नाबालिग सहित 17 आदिवासियों की हत्या के आरोप सुरक्षा बलों पर लगाए गए थे। इसी तरह मई 2013 में एड़समेटा में तीन नाबालिग सहित आठ आदिवासियों को फर्जी मुठभेड़ में मारे जाने को लेकर प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन है। ऐसे ही बुरगम (2016), तिम्मापुर (2017) और गमपुर (2019) की मुठभेड़ों में भी स्थानीय नागरिकों ने सुरक्षा बलों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं।

(संपादन : नवल/अनिल)

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