यूपी चुनाव : बनारस की श्रमजीवी जनता की राय

बीएचयू के पास डोसा का दुकान चलानेवाली झरना कहती हैं कि दोनों बार लॉकडाउन के समय सरकार की तरफ से हमें एक किलो गेहूं तक नहीं मिला। दूसरी बार लॉकडाउन के दौरान हमने जान जोखिम में डालकर ठेला लगाया था। हम ठेला नहीं लगाएंगे तो खाएंगे क्या? हम भूखे मरते रहे। जरूरत के समय प्रधानमंत्री कहां थे? आकांक्षा आजाद की प्रस्तुति

प्रधनमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र बनारस में विधानसभा चुनाव की सरगर्मी तेज़ है। नुक्कड़ों पर चाय-नाश्ते की दुकानों से लेकर घर के आंगनों तक चुनाव चर्चा के केंद्र में है। आम जन जो श्रमजीवी हैं और कहना न होगा कि रोज कमाने और खानेवाले लोग हैं, वे इस चुनाव के संबंध में क्या सोचते हैं? जिस तरह के दावे आज भाजपा के लोग कर रहे हैं, क्या उनमें कोई सच्चाई है? समाजवादी पार्टी व बहुजन समाज पार्टी तथा कांग्रेस के संबंध में वे क्या सोचते हैं? 

पांच सालों में बिगड़ गई स्थिति

करीब 55 वर्षीय झरना सरकार बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से सटे हैदराबाद गेट के पास डोसा का ठेला लगाती हैं। मूलत: कोलकाता की रहने वाली झरना शादी के बाद बनारस आ गयी थीं। उनसे सवाल पूछने पर बेहद गुस्से में वह कहतीं हैं– “हमारा जवाब आपको बहुत बेकार लगेगा। हम 10 साल से वोट देना छोड़ चुके हैं। जब सरकार से हमको कोई मदद ही नहीं मिलती है तो हम क्यों वोट दें? साल 2020 और 2021 दोनों बार लॉकडाउन लगा और सरकार की तरफ से हमें एक किलो गेहूं तक नहीं मिला। दूसरी बार लॉकडाउन के दौरान भी हमने जान जोखिम में डालकर ठेला लगाया था। हमारी ऐसी परिस्थिति है। हम ठेला नहीं लगाएंगे तो खाएंगे क्या? हम भूखे मरते रहे और नेता सिर्फ वोट मांगते आते है। जरूरत के समय प्रधानमंत्री कहां थे?  

“मेरे हिसाब से इन पांच सालों में स्थिति और ज्यादा खराब हो गयी है। सरकार गरीबी नहीं, गरीबों को खत्म कर रही है। अभी मंहगाई की स्थिति और खराब हो चुकी है। सब्ज़ी से लेकर गैस सिलिंडर के दाम बढ़े हुए हैं। पहले तो गैस सब्सिडी के रूप में कुछ रुपए भी मिल जाते थे, अब तो वो भी नहीं मिलते हैं। दूसरे लॉकडाउन में भी सब चीज़े बहुत महँगी हो गयी थी। हमलोगों ने अपने बेटे-बेटियों को किसी तरह पढा लिया। अब इतनी मंहगाई हो चुकी है कि पढ़ा पाना भी मुश्किल है। अगर कोई प्रतिनिधि मेरे सामने आए तो हम उनसे यही सब सवाल करेंगे।”

योगी सरकार के कारण बहुत कुछ झेलना पड़ा

वहीं बनारस में ऑटो चलाकर जीवनयापन करने वाले जुबैर कहते हैं कि “पिछले 5 सालों में योगी सरकार ने कोई नई योजना शुरू नहीं की। वह पिछले सरकारों द्वारा चलाई गई योजनाओं को पूरा करके उनका श्रेय लेने की कोशिश कर रही है। इस सरकार ने वास्तव में लोगों को धर्म और जाति के नाम पर बांटकर उन्हें सांप्रदायिक बना दिया। अपने वोट के लिए भाजपा बस दंगे कराना जानती है। हम ऑटो वालों को इस सरकार के कार्यकाल में बहुत कुछ झेलना पड़ रहा। ई-चालान के नाम पर ऑटो वालों से 10-15 हज़ार रुपये जुर्माना के तौर पर वसूले जा रहे हैं। पहले ऑटो स्टैंड के नाम पर रोजाना 5 रुपए नगर निगम को देने पड़ते थे। अब यह दोगुना होकर 10 रुपए हो चुके हैं। महीने के 300 रुपये तो सिर्फ ऑटो स्टैंड के नाम पर वसूल किया जाता है। और अगर ई-चालान कट जाए तो उसकी भरपाई करने में ही महीने भर की पूरी कमाई लग जाती है। बनारस में कई सड़कों पर ऑटो के आने-जाने पर भी रोक लगा दी गई है, जिससे हमारी कमाई बहुत प्रभावित हुई है। लॉकडाउन के कारण ऑटो बंद कर दिये गये थे। तब हमारी बची-खुची कमाई भी खत्म हो गयी। इन मुद्दों पर पर बात करने के बजाय योगी सरकार हिन्दू-मुस्लिम की राजनीति कर रही है।”

बनारस में एक चाय दुकानदार

कमियों के बावजूद योगी सरकार ही ठीक

कपड़े धोने का काम करने वाले पूरन बताते हैं कि “भाजपा के सत्ता में आने के बाद कुछ कुछ चीजें तो खराब हुई हैं, लेकिन कुछ चीजें अच्छी हुई है। भाजपा ने पहले सरकारों द्वारा चलाई गई पेंशन को बंद कर दिया है। योगी सरकार अभी राशन बांट रही है। राशन तो हर सरकार देती है, इसमें नया नहीं है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि भाजपा ने कुछ अच्छा काम नहीं किया। उज्ज्वला योजना के तहत सिलेंडर मिलने से कई परिवारों को फायदा हुआ है। पहले बहुत कम ही लोगों के पास सिलिंडर मौजूद था। आज लोग खुश है कि भाजपा के कारण उन्हें यह सुविधा मिल पाई है।

“अगर हम पिछली सरकारों से तुलना करें तो हम पाते हैं कि सपा के कार्यकाल में गुंडागर्दी काफी बढ़ी हुई थी, जिसे भाजपा की सरकार ने कम किया है। महंगाई कुछ बढ़ी है, जिससे जनता को नुकसान हो रहा है। हमारे धंधे को भी 5 सालों में नुकसान हुआ है। मुझे तो बिना वैक्सीन लगवाए ही दोनों डोज के मैसेज मोबाइल पर आ गए। मैसेज आने के बाद मैंने वैक्सीन के दोनों डोज़ लगवाए। एक दिक्कत यह थी कि कोरोना वायरस और लॉकडाउन के कारण बच्चों की पढ़ाई पूरी तरीके से बर्बाद हो गई है। उन्हें बिना पढ़ाए ही एग्जाम में पास कर दिया गया। अगर इसी तरह बच्चों को पास कर दिया जाता रहेगा और जब उनके स्कूल भी बंद हैं तो बच्चों को नॉलेज कहां से मिलेगा? इन सब कमियों के बावजूद मुझे लगता है कि भाजपा ही फिलहाल सबसे बेहतरीन काम करने वाली पार्टी है।”

झूठ फैला रहे भाजपा के लोग

दूध कारोबारी प्रदीप यादव कहते हैं कि “मेरे एक रिश्तेदार आर्मी में थे। उनकी पोस्टिंग पठानकोट में थी, अभी 3 दिन पहले उनकी मृत्यु हो गई। लेकिन उनके परिवार को सूचना तक नहीं दी गई। भाजपा सरकार बस झूठ फैलाती है कि उन्हें जवानों की चिंता है। इतने सारे जवान बॉर्डर पर मारे जा रहे हैं। एक दो जवान की मौत पर तो खबर भी नहीं बनती हैं। आज पूरे यूपी में महिला सुरक्षा की हालत देख लीजिए। योगी सरकार तो खूब ढिंढोरा पीट रही है कि उत्तर प्रदेश में महिलाएं सुरक्षित हैं। जबकि असलियत तो कुछ और ही दिख रही है। हाथरस में जिस तरीके से एक दलित लड़की के साथ बलात्कार करने वाले आरोपियों को बचाया गया और पुलिस द्वारा उसकी लाश को चुपचाप जला दिया गया, इससे साफ है कि योगी सरकार की क्या मंशा है। पुलिस तंत्र की जिम्मेदारी प्रदेश के मुखिया की होती है, पुलिस इतना बड़ा कदम बिना उनके इज़ाज़त के नहीं कर सकती है। वहीं शिक्षा की बात करें तो पूरी शिक्षा व्यवस्था ही बर्बाद हो चुकी है। बच्चों के स्कूल से लेकर के यूनिवर्सिटी तक बंद है। सब की पढ़ाई चौपट हो गई है। दो साल से शिक्षण संस्थाओं को बंद करके बच्चों को घर बैठा दिया गया है। पहले की सरकारों ने जिन प्रोजेक्ट को लागू किया उसे पूरा करके योगी सरकार खुद से खुद अपनी पीठ थपथपा रही है।” 

भाजपा ने दिया हिंदुत्व को बढ़ावा

बनारस में चाय की रेहड़ी लगाने वाले 45 वर्षीय बाबू सोनकर पहले फल बेचते थे। यही उनकी आजीविका का साधन था। बिक्री कम होने के बाद उन्होंने चाय की रेहड़ी खोल दी। बाबू सोनकर मानते हैं कि “योगी-मोदी समाज के लिए बहुत काम कर रहे हैं। बीजेपी हिंदुत्व की राजनीति लेकर आगे बढ़ रही है, वही वास्तव में हिंदुओं को एकजुट बना रही है। हालांकि जब भी योगी-मोदी बनारस आतें हैं ठेले को पुलिस लाठी का डर दिखा हटवा देती है, जिससे बहुत नुकसान होता है। कभी पुलिस ठेले-खोमचे वाले को उठाकर लंका थाने लेकर चली जाती है और रुपए नहीं देने पर एफआईआर की भी धमकी देती है।” 

(संपादन : नवल/अनिल)

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