छत्तीसगढ़ : बघेल को भाने लगे भाजपा के ‘राम’, विरोध में उतरे आदिवासी

कांकेर प्रखंड के सर्व आदिवासी समाज युवा प्रभाग के ज्ञापन में उल्लेख है कि बस्तर संभाग एक आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है, जहां के आदिवासियों की अपनी संस्कृति व पहचान है, जो किसी और धर्म या संस्कृति से मेल नहीं खाती है। लेकिन सरकार के द्वारा जबरन ब्राह्मणवादी धर्म का प्रचार-प्रसार कर आदिवासियों की संस्कृति को खत्म करने की साजिश रची जा रही है। तामेश्वर सिन्हा की खबर

राम वन गमन पथ योजना के बाद अब छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की भूपेश बघेल सरकार ने रामायण मंडली प्रोत्साहन योजना प्रारंभ किया है। सूबे के आदिवासी संगठन सरकार के इस कदम का विरोध कर रहे है। इससे पहले भी राज्य सरकार की राम वन गमन पथ योजना का आदिवासियों ने पुरजोर विरोध किया था। 

बताते चलें कि छत्तीसगढ़ के उत्तर बस्तर के कांकेर जिला अंतर्गत कांकेर और दुर्गुकोंदल प्रखंड में सर्व आदिवासी समाज युवा प्रभाग ने राज्यपाल को अलग-अलग ज्ञापन सौंपा है। 

कांकेर प्रखंड के सर्व आदिवासी समाज युवा प्रभाग के ज्ञापन में उल्लेख है कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष राज्य है, जहां सभी धर्म को एक समान स्थान मिला है। बस्तर संभाग एक आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है, जहां के आदिवासियों की अपनी संस्कृति व पहचान है, जो किसी और धर्म या संस्कृति से मेल नहीं खाती है। लेकिन सरकार के द्वारा जबरन ब्राह्मणवादी धर्म का प्रचार-प्रसार कर आदिवासियों की संस्कृति को खत्म करने की साजिश रची जा रही है। 

ज्ञापन में कहा गया है कि बस्तर संभाग पांचवी अनुसूची में शामिल क्षेत्र है, जिसमें ग्राम सभा की सहमति किसी भी तरह के आयोजन के लिए अनिवार्य मानी गई है। इसके बावजूद बिना ग्राम सभा की सहमति के रामायण प्रतियोगिता का आयोजन राज्य सरकार द्वारा कराया जा रहा है। इसके लिए सरकार के द्वारा आदिवासियों के विकास के पैसों का दुरुपयोग किया जा रहा है। इस पर तत्काल रोक लगाई जाय।

इसी प्रकार कांकेर जिले के दुर्गुकोंदल प्रखंड में राज्यपाल के नाम सौपे गए ज्ञापन में उल्लेख है कि दुर्गुकोंदल आदिवासी बाहुल्य विकासखंड है। यह पांचवी अनुसूची अनुसूचित क्षेत्र में आता है। हिंदू विवाह अधिनियम-1955, हिंदू उत्तराधिकारी अधिनियम-1956, हिंदू दत्तक व भरण पोषण अधिनियम-1956 की धारा 2 (2) हिंदू वयस्कता और संरक्षण अधिनियम-1956 की धारा 3 (2) के अनुसार अनुसूचित जनजाति वर्ग के नागरिकों पर ऐसे तमाम प्रावधान लागू नहीं होते हैं। 

भूपेश बघेल, मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़

गौर तलब है कि केंद्रीय जनजाति कार्य मंत्रालय के मुताबिक देश के 30 राज्यों में कुल 705 जनजातियों रहते हैं। भारत में 1871 से लेकर 1941 तक हुई जनगणना में आदिवासियों को अन्य धर्मों से अलग धर्मों में गिना गया। बाद में यह बंद कर दिया गया। वे अब अपने लिए अलग धर्म कोड की मांग करते हैं। ज्ञापन में कहा गया है कि, “संवैधानिक दायरे में रहकर तो हम हिंदू धर्म के थोपे हुए पंचायत व ब्लॉक स्तरीय पर रामायण मंडली प्रतियोगिता आयोजित करने पर अफसरशाही फरमान मानने को तैयार नहीं है और पांचवी अनुसूची क्षेत्र में रामायण प्रतियोगिता का विरोध करते हैं। राज्य सरकार के निर्देश पर पंचायत विकासखंड और जिला स्तरीय रामायण प्रतियोगिता आयोजन पर रोक लगाई जाए।” 

क्या है सरकार की योजना? 

बताते चलें कि छत्तीसगढ़ के भूपेश बघेल सरकार के निर्देश पर संस्कृति विभाग द्वारा छत्तीसगढ़ की रामायण मंडलियों के कलाकारों के संरक्षण, संवर्धन और कलाकारों के दलों को प्रोत्साहित करने के दावे के साथ ‘रामायण मंडली प्रोत्साहन योजना 2021’ प्रारंभ की गई है। इस योजना के तहत ग्राम पंचायत स्तर से लेकर राज्य स्तर तक रामायण मंडलियों की प्रतियोगिता का आयोजन प्रारंभ हो गया है। ग्राम पंचायत स्तर पर 10 से 15 मार्च तक प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इसी तरह ब्लॉक स्तर पर 15 से 31 मार्च तक प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं। जिला स्तर पर अगामी 3 अप्रैल से लेकर 5 अप्रैल तक प्रतियोगिता आयोजित की जाएंगीं।  

इस योजना के तहत ग्राम पंचायत स्तर पर प्रथम स्थान पर आने वाली 12 हजार मंडलियों में से प्रत्येक को 5-5 हजार रुपए मिलेंगे। जबकि ब्लॉक स्तरीय प्रतियोगिता की विजेता 146 मंडलियों को 10-10 हजार और जिला स्तर पर प्रथम स्थान पाने वाली 28 रामायण मंडलियों को 50-50 हजार रुपए का पुरस्कार दिया जाएगा। वहीं राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में पहला स्थान हासिल करने वाली मानस मंडली को 5 लाख रुपए का नकद पुरस्कार मिलेगा। जबकि दूसरे स्थान पर रही मंडली को 3 लाख रुपए और तीसरे स्थान पर आई मंडली को 2 लाख रुपए नकद पुरस्कार के तौर पर दिए जाएंगे।

(संपादन : नवल/अनिल)


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