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छत्तीसगढ़ : सावित्रीबाई फुले की जीवनी पढ़ेंगे सरकारी स्कूलों के बच्चे

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने घोषणा की थी कि सावित्रीबाई फुले समाज सुधारक थीं और उनकी जीवनी और उनके संघर्ष की कहानियों को पाठ्यपुस्तक में शामिल किया जाय। एससीईआरटी ने इसे ध्यान में रखते हुए यह पहल किया है। बता रहे हैं तामेश्वर सिन्हा

छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में बच्चों को सावित्रीबाई फुले की जीवनी को पढ़ाया जाएगा। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की घोषणा को अमलीजामा पहनाते हुए स्टेट काउंसिल ऑफ एडुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एससीईआरटी) ने इसके लिए सावित्रीबाई फुले के जीवन पर आधारित पठन सामग्री तैयार कर लिया है। हालांकि अभी यह तय नहीं हुआ है कि किस सामग्री को किस कक्षा वर्ग के छात्रों के पाठ्यम्रम में शामिल किया जाएगा। जल्द ही इसके लिए शिक्षा विभाग के अधिकारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक होनी है। 

ध्यातव्य है कि महाराष्ट्र के सतारा जिले के नया गांव में 3 जनवरी 1831 को जन्मी सावित्रीबाई फुले देश की पहली महिला शिक्षिका थीं। सन् 1848 में अपने जीवनसाथी जोतीराव फुले के साथ मिलकर लड़कियों के लिए पहला स्कूल खोला था। 

एससीईआरटी के संयुक्त संचालक डॉ. योगेश शिवहरे ने बताया कि “छत्तीसगढ़ में कई महान विभूतियां रही हैं। उन सबने समर्पण के साथ अलग-अलग क्षेत्रों में काम किया है। फिर चाहे वह स्वतंत्रता संग्राम सेनानी हों, महिला जागरूकता या बाल विवाह रोकने वाले हों या साहित्य-शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देनेवाले। ऐसी विभूतियों की जानकारी हम छत्तीसगढ़ के बच्चों को देना चाहते हैं। इसके प्रथम चरण में हमने ‘छत्तीसगढ़ की विभूतियां’ नाम की एक सहायक पुस्तिका तैयार की है। उसमें 36 महान विभूतियों के जीवन को शामिल किया गया है। बच्चे इसे अपनी पाठ्यपुस्तकों के साथ-साथ सहायक पुस्तक के रूप में पढ़ेंगे।”

महाराष्ट्र के पूना जिले के फुलेवाड़ा स्थित जोतीराव फुले व सावित्रीबाई फुले स्मृति संग्रहालय परिसर में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल (दाएं) और महाराष्ट्र सरकार के वरिष्ठ मंत्री छगन भुजबल

उन्होंने आगे बताया कि “मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने घोषणा की थी कि सावित्रीबाई फुले समाज सुधारक थी और उनकी जीवनी और उनके संघर्ष की कहानियों को पाठ्यपुस्तक में शामिल किया जाय। एससीईआरटी ने इसे ध्यान में रखते हुए यह पहल किया है।

बताते चलें कि एससीईआरटी ने ‘छत्तीसगढ़ की विभूतियां’ नाम से सहायक पुस्तक तैयार की है। इस पुस्तक में 36 विभूतियों के नाम शामिल हैं– गुरु घासीदास, क्रांतिवीर नारायण सिंह, शहीद गैंदसिंह, हीरालाल काव्योपाध्याय, तुलाराम जी परगनिहा, माधव राव सप्रे, वामन राव लाखे, वीर गुंडाधूर, राधाबाई, दाऊ कल्याण सिंह, रविशंकर शुक्ल, सुंदरलाल शर्मा, घनश्याम सिंह गुप्ता, लोचन प्रसाद पांडे, बैरिस्टर छेदीलाल, छोटेलाल श्रीवास्तव, राघवेंद्र राव, प्यारे लाल सिंह, पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी, मुकुटधर पांडे, डॉ बलदेव प्रसाद मिश्र, डॉ खूबचंद बघेल, राजा चक्रधर सिंह, संत गहिरा गुरु, दाऊ मंदराजी, मिनीमाता, राजमोहिनी देवी, रामचंद्र देशमुख, गजानन माधव मुक्तिबोध, रामप्रसाद पोटाई, चंदूलाल चंद्राकर, हबीब तनवीर, झाड़ू राम देवांगन, स्वामी आत्मानंद, डॉ. नरेंद्र देव वर्मा और पवन दीवान।

(संपादन : नवल/अनिल)


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लेखक के बारे में

तामेश्वर सिन्हा

तामेश्वर सिन्हा छत्तीसगढ़ के स्वतंत्र पत्रकार हैं। इन्होंने आदिवासियों के संघर्ष को अपनी पत्रकारिता का केंद्र बनाया है और वे विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर रिपोर्टिंग करते हैं

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