बहुजन साप्ताहिकी : पांडे सरनेम वाले युवक ने पहले प्रो. रविकांत के पैर छुए और फिर किया हमला

बहुजन साप्ताहिकी के तहत इस बार पढ़ें राजद प्रमुख लालू प्रसाद से संबंधित 17 स्थानों पर सीबीआई की छापेमारी के अलावा प्रो. रविकांत और डॉ. रतनलाल के खिलाफ मुकदमे की दास्तान

लखनऊ विश्वविद्यालय में हिंदी के प्रोफेसर रविकांत चंदन के उपर बीते 18 मई, 2022 को एक सप्ताह में दूसरी बार हमला किया गया। प्रो. रविकांत के मुताबिक, हमलावर ने पहले उन्हें दूर से प्रणाम किया, फिर नजदीक आकर पांव छुए और फिर हमला कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया है कि हमलावर का नाम कार्तिक पांडेय है और उसके खिलाफ उन्होंने एक मुकदमा स्थानीय हसनगंज थाने में दर्ज कराया है। इस बीच प्रो. रविकांत के खिलाफ दर्ज किये गये मुकदमे में इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। इस आशय की सूचना प्रो. रविकांत ने दूरभाष पर दी।

वहीं अपने उपर एक सप्ताह के अंदर दूसरी बार हमला के संबंध में प्रो. रविकांत ने बताया कि बीते 18 मई, 2022 को वे विश्वविद्यालय में कक्षा लेने जा रहे थे। इसी क्रम विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर के कार्यालय के सामने कार्तिक पांडेय नामक एक छात्र, जो कि समाजवादी छात्र सभा से संबद्ध है, ने उन्हें दूर से प्रणाम किया और बाद में उसने पैर छुआ। इसके बाद उसने अचानक से हमला कर दिया। इस दौरान वह जातिसूचक गाालियां दे रहा था। अपने उपर हुए इस हमले के खिलाफ प्रो. रविकांत ने स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज करायी। लेकिन उनका कहना है कि थाने में पुलिस ने कार्तिक पांडेय के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज तो कर लिया, लेकिन धारा 151 में जमानत भी दे दी। 

बताते चलें कि इससे पहले 10 मई, 2022 को प्रो. रविकांत के उपर हमला किया गया था। उनके उपर आरोप था कि ज्ञानवापी मस्जिद प्रकरण में एक यूट्यूब चैनल पर दिये गये बयान से सामाजिक सौहार्द्र को नुकसान पहुंचा है। यह मामला भी हसनगंज थाने में दर्ज कराया गया। लेकिन थाने में प्रो. रविकांत की शिकायत पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की। इसके बाद उन्होंने स्थानीय जिला नयायालय में मामला दर्ज कराया है।

प्रो. रविकांत, लखनऊ विश्वविद्यालय व डॉ. रतनलाल, दिल्ली विश्वविद्यालय

प्रो. रतनलाल के मामले में पुलिस सार्वजनिक नहीं कर रही है एफआईआर

दलित-बहुजन कार्यकर्ता व दिल्ली विश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रतनलाल के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। यह मामला दर्ज तो 17 मई, 2022 को हुआ लेकिन इसे सार्वजनिक नहीं किया जा रहा है। बस इतना बताया जा रहा है कि डॉ. रतनलाल के द्वारा सोशल मीडिया पर जारी एक पोस्ट के खिलाफ विनीत जिंदल नामक व्यक्ति ने मुकदमा दर्ज कराया है कि उनके पोस्ट से उनकी भावना आहत हुई है। वहीं डॉ. रतनलाल के खिलाफ मुकदमा दर्ज किये जाने के बाद देश भर के दलित-बहुजनों ने आक्रोश व्यक्त किया है।

इस संबंध में पुलिस उपायुक्त (उत्तरी) सागर सिंह कलसी ने कहा है कि धर्म और धार्मिक मान्यताओं को अपमानित करने के इरादे से फेसबुक पर जानबूझकर की गई एक दुर्भावनापूर्ण पोस्ट के सिलसिले में लाल के खिलाफ बीते 17 मई की रात एक शिकायत मिली थी। उन्होंने कहा कि इस सिलसिले में कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। प्रो. रतनलाल के खिलाफ किन धाराओं में मामला दर्ज कराया गया है, तो जवाब में सागर सिंह कलसी ने कहा कि भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 153 ए (विभिन्न समूहों के बीच धर्म, नस्ल, जन्मस्थान, निवास, भाषा आदि के आधार पर वैमनस्य को बढ़ावा देना) और धारा 295ए (किसी वर्ग के धर्म या धार्मिक मान्यताओं को अपमानित कर भावनाएं आहत करने के इरादे से किए गए जान-बूझकर एवं दुर्भावनापूर्ण कृत्य) के तहत एक मामला दर्ज किया गया है।

वहीं इस संबंध में पूछने पर डॉ. रतनलाल ने दूरभाष पर जानकारी दी है कि उन्हें पुलिस द्वारा दर्ज प्राथमिकी प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें और उनके बीस वर्षीय बेटे को ट्रोल कर गालियां व जान से मारने की धमकी दी जा रही है। इस संबंध में उन्होंने भारत सरकार से सुरक्षा प्रदान करने की मांग की है। 

गौर तलब है कि उत्तरी दिल्ली जिले के मौरिस नगर थाने में उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। प्राथमिकी के संबंध में पूछने पर मौरिस नगर थाना के अधिकारी ने कोई जवाब नहीं दिया। 

फिर सीबीआई के निशाने पर लालू, एक साथ 17 जगहों पर छापा

चारा घोटाला मामले में जमानत मिलने पर आराम फरमा रहे राजद प्रमुख लालू प्रसाद को सीबीआई चैन से नहीं रहने देना चाहती है। आज 20 मई, 2022 को सुबह-सुबह सीबीआई ने उनसे जुड़े 17 स्थानों पर एक साथ छापा मारा। खबर लिखे जाने तक छापेमारी जारी है। उधर कयासबाजियों का दौर जारी है कि यह सब भाजपा के इशारे पर इसलिए किया जा रहा है, क्योंकि बिहार में तेजस्वी और नीतीश के बीच रिश्ते बेहतर बने हैं।

हालांकि छापेमारी के संबंध में मिली जानकारी के अनुसार लालू प्रसाद के खिलाफ सीबीआई ने पहले रेलवे में भर्ती में अनियमितता को लेकर प्राथमिकी दर्ज की थी। अब उसे उसने एफआईआर में बदल दिया है। इसी क्रम में यह छापेमारी की जा रही है। इसके तहत पटना में राबड़ी देवी के सरकारी आवास, दिल्ली में उनकी बेटी मीसा भारती के आवास, गोपालगंज में उनके पैतृक आवास के अलावा उनलोगों के घरों पर भी छापेमारी की जा रही है, जिनके बारे में यह कहा जा रहा है कि उन्हें लालू प्रसाद ने 2008-09 के दौरान रेलवे में नौकरी दी।

ईडब्ल्यूएस आरक्षण के तहत 8 लाख की आयसीमा की वैधता पर जुलाई में होगी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट अगले महीने से आर्थिक आधार पर कमजोर वर्गों (ईडब्ल्यूएस) की वार्षिक आयसीमा 8 लाख रुपए तय करने के मामले सुनवाई शुरू करेगी। इस संबंध में दायर सभी मामलों की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़ की की अध्यक्षता में एक खंडपीठ करेगी। इनमें ईडब्ल्यूएस को दिया जानेवाला दस प्रतिशत आरक्षण का सवाल भी शामिल है। बताते चलें कि वर्ष 2019 में लोकसभा चुनाव के पहले भारत सरकार ने ईडब्ल्यूएस के लिए 10 फीसदी आरक्षण का प्रावधान किया था। इसे लागू करने के लिए 17 जनवरी, 2019 को एक ऑफिस मेमोरेंडम के जरिए यह घोषित किया गया था कि ईडब्ल्यूएस कोटे का लाभ केवल उन्हें ही मिलेगा जिनकी वार्षिक आय 8 लाख रुपए से कम हो। इसके अलावा ओबीसी संगठनों के द्वारा इस आरक्षण की वैधता को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। 

(संपादन : अनिल)


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