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बिहार में जातिगत जनगणना की सियासत का हुआ पटापेक्ष, कार्य योजना को मिली मंत्रिपरिषद की मंजूरी

बहुजन साप्ताहिकी के तहत इस बार पढ़ें बिहार में जातिगत जनगणना के लिए राज्य सरकार द्वारा कार्य योजना की मंजूरी तथा तमिलनाडु में राज्य सरकार द्वारा केंद्र की नई शिक्षा नीति के समानांतर राज्य की अपनी शिक्षा नीति तय करने के लिए किये गये पहल के बारे में

बहुजन साप्ताहिकी

केंद्रीय स्तर पर नरेंद्र मोदी हुकूमत ने भले ही जातिगत जनगणना से इंकार कर दिया हो, लेकिन बिहार में नीतीश कुमार की हुकूमत ने इसे कराने का निर्णय लिया है। इस संबंध में गत 2 जून को राज्य मंत्रिमंडल ने एक प्रस्ताव पारित कर दिया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में निर्णय लिया गया कि इसके लिए 500 करोड़ रुपए की राशि खर्च की जाएगी और इसे अगले नौ महीने के अंदर यानी फरवरी, 2023 तक पूरा कर लिया जाएगा। वहीं दूसरी ओर जातिगत जनगणना को लेकर अलग-थलग दीख रही भाजपा भी बैकफुट पर नजर आयी। 

बताते चलें कि बीते 1 जून, 2022 को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में उनके सरकारी आवास पर हुए सर्वदलीय बैठक में भाजपा सहित सूबे के नौ राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया था। इसी बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने इसकी घोषणा कर दी थी कि सरकार जल्द ही इसके लिए एक कार्य योजना मंत्रिपरिषद के समक्ष लाएगी। इस पूरे मामले में सियासती हलचलें भी खूब तेज रहीं। यहां तक कि सरकार गिराने से लेकर नयी सरकार बनाने तक की कवायदों संबंधी कयासबाजियां भी खूब लगाई गयीं। हालांकि इस सवाल को लेकर किसी भी भाजपा नेता ने स्पष्ट तौरपर इसका विरोध नहीं किया था।

बहरहाल, जातिगत जनगणना की कार्य योजना के संबंध में राज्य के मुख्य सचिव आमिर सुबहानी ने जानकारी देते हुए बताया है कि इसके लिए ग्रामीण कार्य विभाग, समाज कल्याण विभाग और पंचायती राज विभाग आदि के बीच समन्वय कायम किया जाएगा तथा प्रत्येक जिलाधिकारी को जिला स्तर पर नोडल अधिकारी बनाया जाएगा।

राज्य द्वारा जातिगत जनगणना पर्याप्त नहीं, केंद्र पर दबाव बनाएं नीतीश

ऑल इंडिया इम्प्लॉयज फेडरेशन ऑफ ओबीसी के राष्ट्रीय महासचिव जी. करुणानिधि ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि वे केंद्र सरकार पर जातिगत जनगणना कराने का दबाव बनाएं। अपने पत्र में करुणानिधि ने कहा है कि राज्य द्वारा जातिगत जनगणना यदि कराया भी जाता है तो इसका वैधानिक महत्व नहीं होगा। इससे बेहतर है कि नीतीश कुमार केंद्र सरकार से कहें कि वह इसे राष्ट्रीय स्तर पर कराये ताकि लाभ देश भर के ओबीसी वर्ग के लोगों को हाे।

प्रेमकुमार मणि ने त्यागी राजद की सदस्यता, लालू पर लगाया गंभीर आरोप

प्राख्यात बहुजन चिंतक व बिहार विधान परिषद के पूर्व सदस्य प्रेमकुमार मणि ने राष्ट्रीय जनता दल की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। वे राजद के मुखपत्र ‘राजद समाचार’ के संपादक भी थे। उनका इस्तीफा ऐसे समय पर आया है जब राजद की ओर से राज्यसभा और विधान परिषद के लिए पांच उम्मीदवारों की घोषणा की गयी। बताते चलें कि राजद ने राज्यसभा के लिए डा. मीसा भारती, फैयाज अहमद तथा विधान परिषद के लिए कारी सोहैब, मुन्नी देवी और अशोक कुमार पांडे को उम्मीदवार बनाया है। विधान परिषद के लिए चुनाव आगामी 20 जून काे होगा।

इस बीच प्रेमकुमार मणि ने अपना इस्तीफा एक पत्र के रूप में राजद प्रमुख लालू प्रसाद को भेज दिया। इस पत्र में उन्होंने लालू प्रसाद पर टिकटों की खरीद-फरोख्त करने का आरोप लगाया और यह टिप्पणी की कि “आप में सुधार की कोई गुंजाइश नहीं है”।। हालांकि प्रेमकुमार मणि ने लालू प्रसाद के बेटे तेजस्वी यादव को महत्वपूर्ण नेता माना है और उनमें संभावनाएं व्यक्त की है। 

तमिलनाडु सरकार लाएगी केंद्र के समानांतर अपनी शिक्षा नीति, प्रारूप बनाएगी जस्टिस गुरूदेसन कमिटी 

केंद्र सरकार की नई शिक्षा नीति-2020 को लेकर तमिलनाडु की एम. के. स्टालिन सरकार ने अपने इरादे स्पष्ट कर दिये हैं। मुख्यमंत्री स्टालिन ने अप्रैल में इसके लिए एक 13 सदस्यीय कमेटी का गठन किया था। इसके अध्यक्ष दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीश रहे जस्टिस डी. मुरूगेसन को बनाया गया था। स्टालिन सरकार ने आयोग से राज्य शिक्षा नीति का प्रारूप तैयार करने को कहा है। बताते चलें कि मुख्यमंत्री ने यह कहकर केंद्र सरकार की शिक्षा नीति का विरोध किया था कि इससे देश का संघीय ढांचा कमजोर होगा और केंद्र का हस्तक्षेप बढ़ेगा। साथ ही केंद्र की नई शिक्षा नीति में हिंदी को एक भाषा के रूप में लागू करने की बात भी शामिल है। वहीं उन्होंने केंद्रीय विश्वविद्यालयों में स्नातक पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए सीयूईटी परीक्षा लिये जाने का विरोध किया था। हालांकि बीते 1 जून, 2022 को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इसकी घोषणा की थी कि यदि कोई राज्य केंद्र की नई शिक्षा नीति से असंतुष्ट है तो राज्य सरकार अपने हिसाब से शिक्षा नीति बना सकती है।

(संपादन : अनिल)


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लेखक के बारे में

नवल किशोर कुमार

नवल किशोर कुमार फॉरवर्ड प्रेस के संपादक (हिन्दी) हैं।

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