h n

द्रौपदी पांडव से द्रौपदी मुर्मू तक

यदि मंडल आंदोलन नहीं हुआ होता तो आरएसएस और भाजपा, जो कि मूलतः ब्राम्हण-बनिया जमावड़ा हैं, किसी भी स्थिति में द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति पद का अपना उम्मीदवार नहीं बनाते। ब्राम्हणवाद में गले तक धंसी कांग्रेस और वामपंथियों ने आरएसएस-भाजपा को एक ऐतिहासिक सुअवसर प्रदान कर दिया है, बता रहे हैं कांचा इलैया शेपर्ड

संथाली आदिवासी द्रौपदी मुर्मू का भारत के 15वें राष्ट्रपति के तौर पर निर्वाचन, देश में मंडल आयोग के बाद की संघर्षयात्रा में एक मील का पत्थर है, विशेषकर आदिवासियों की दमन से मुक्ति की राह का। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को इस चुनाव से जबरदस्त लाभ होगा। यदि मंडल आंदोलन नहीं हुआ होता तो आरएसएस और भाजपा, जो कि मूलतः ब्राम्हण-बनिया जमावड़ा हैं, किसी भी स्थिति में द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति पद का अपना उम्मीदवार नहीं बनाते। ब्राम्हणवाद में गले तक धंसे कांग्रेस और वामपंथियों ने आरएसएस-भाजपा को ऐतिहासिक सुअवसर प्रदान कर दिया है।

पूरा आर्टिकल यहां पढें : द्रौपदी पांडव से द्रौपदी मुर्मू तक

लेखक के बारे में

कांचा आइलैय्या शेपर्ड

राजनैतिक सिद्धांतकार, लेखक और सामाजिक कार्यकर्ता कांचा आइलैया शेपर्ड, हैदराबाद के उस्मानिया विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान के प्राध्यापक और मौलाना आजाद राष्ट्रीय उर्दू विश्वविद्यालय, हैदराबाद के सामाजिक बहिष्कार एवं स्वीकार्य नीतियां अध्ययन केंद्र के निदेशक रहे हैं। वे ‘व्हाई आई एम नॉट ए हिन्दू’, ‘बफैलो नेशनलिज्म’ और ‘पोस्ट-हिन्दू इंडिया’ शीर्षक पुस्तकों के लेखक हैं।

संबंधित आलेख

बिहार : 65 प्रतिशत आरक्षण पर हाई कोर्ट की रोक, विपक्षी दलों की सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की मांग
राजद के राज्यसभा सदस्य प्रो. मनोज झा और भाकपा माले के राष्ट्रीय महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में...
किसानों की नायिका बनाम आरएसएस की नायिका
आरएसएस व भाजपा नेतृत्व की मानसिकता, जिसमें विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों को खालिस्तानी बताना शामिल है, के चलते ही कंगना रनौत की इतनी...
जानिए, मोदी के माथे पर हार का ठीकरा क्यों फोड़ रहा आरएसएस?
इंडिया गठबंधन भले ही सरकार बनाने में कामयाब नहीं हुआ हो, लेकिन उसके एजेंडे की जीत हुई है। सामाजिक न्याय और संविधान बचाने के...
अमेरिका के विश्वविद्यालयों में हिंदू पाठ्यक्रम के मायने
यदि हिंदू दर्शन, जिसे वेदांतवादी दर्शन का नाम भी दिया जाता है, भारत की सरहदों से बाहर पहुंचाया जाता है तो हमें इसके विरुद्ध...
लाला हरदयाल का दृष्टि दोष (संदर्भ : भगत सिंह के दस्तावेज)
ऐसा क्या कारण था कि भारतीय समाज-व्यवस्था को जितनी गहराई से पेरियार रामासामी नायकर और डॉ. आंबेडकर जैसे दलित-बहुजन विचारकों ने समझा, उतनी गहराई...