h n

शिवराज सिंह चौहान के केवल जुबान पर ‘आदिवासी’

पिछले साल 18 सितंबर, 2021 को शंकर शाह-रघुनाथ शाह के बलिदान दिवस के मौके पर जबलपुर में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आदिवासियों के लिए अनेक घोषणाएं की थीं। उन घोषणाओं का क्या हुआ, इस संबंध में आरटीआई के तहत मिली अपर्याप्त जानकारी के बारे में बता रहे हैं मनीष भट्ट मनु

क्या शिवराज सिंह चौहान एक घोषणावीर मुख्यमंत्री हैं? दरअसल, मध्य प्रदेश का प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस की ओर से अक्सर ही मुख्यमंत्री पर यह आरोप लगाया जाता रहता है। हालांकि, सत्ताधारी भाजपा और सरकार की तरफ से हमेशा ही ऐसे आरोपों का खंडन यह कह कर किया जाता रहा है कि अपने खत्म होते वजूद की हताशा में कांगेस इस तरह के आरोप लगाती रहती है। मगर, उतना ही सच यह भी है कि प्रायः अपनी प्रत्येक सभा में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान कोई न कोई घोषणा करते पाए गए हैं। इन दिनों तो उनकी जुबान पर आदिवासी समुदाय है। इसके लिए नियमित तौर पर न केवल आयोजन वरन् उन आयोजनों में इस समुदाय के कल्याण के लिए घोषणाएं भी की जा रही हैं। मध्य प्रदेश में आदिवासियों की बड़ी आबादी और राजनीति में उनके प्रभाव को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी आदिवासी समाज को लुभाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे।

इस कड़ी में एक दिलचस्प वाकया पिछले साल की है जब शंकर शाह-रघुनाथ शाह के बलिदान दिवस पर 18 सितंबर, 2021 को जबलपुर में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी मौजूद थे। ऐसे में इस बात पर यकीन करना स्वाभाविक सा था कि भाजपा के चाणक्य कहे जाने वाले और प्रधानमंत्री के सबसे विश्वासी व्यक्ति की मौजूदगी में जो भी घोषणाएं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की होंगी, उनको अमलीजामा तो जरुर ही पहना दिया गया जाएगा। सनद रहे है कि मध्य प्रदेश के आदिवासी समाज के लिए शंकर शाह-रघुनाथ शाह एक विशिष्ट स्थान रखते हैं। इस आयोजन के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने निम्नलिखित घोषणाएं की थीं।

  1. शंकर शाह-रघुनाथ शाह का बलिदान दिवस हर वर्ष मनाया जाएगा।
  2. बिरसा मुंडा जयंती जनजातीय गौरव दिवस के रुप में मनाई जाएगी। 
  3. छिंदवाड़ा विश्वविद्यालय का नामकरण राजा शंकर शाह के नाम पर होगा।
  4. पेसा कानून की भावना के अनुरुप जंगल का प्रबंधन किया जाएगा।
  5. जनजातीय बहुल इलाकों में ‘राशन आपके द्वार योजना’ की शुरूआत की जाएगी।
  6. मछली, मुर्गी एवं बकरी पालन के लिए एकीकृत योजना लागू की जाएगी।
  7. जनजातीय वर्ग के बैकलॉग पदों पर नियुक्ति एक वर्ष के भीतर की जाएगी।

उपरोक्त घोषणाओं को अमलीजामा पहनाया गया या नहीं, इसके लिए सूचना का अधिकार कानून, 2005 के तहत राज्य सरकार से 6 दिसंबर, 2021 को जानकारी मांगी गई। लेकिन सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत अधिकतम तीस दिनों के भीतर सूचना प्रदान करने संबंधी प्रावधान होने के बावजूद राज्य सरकार ने मांगी गई सूचनाएं उपलब्ध नहीं कराया।

शिवराज सिंह चौहान, मुख्यमंत्री, मध्य प्रदेश

इस संबंध में प्रथम अपीलीय अधिकारी, सूचना का अधिकार अधिनियम, मध्य प्रदेश शासन, सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा 22 फरवरी, 2022 को आदेश जारी कर यह तो माना गया कि लोक सूचना अधिकारी द्वारा आवेदक को कोई जानकारी उपलब्ध नहीं करायी गई है। साथ ही यह भी स्वीकार किया गया है कि आवेदक द्वारा चाही गई जानकारी मुख्यमंत्री कार्यालय से अप्राप्त है तथा आवेदक को निशुल्क सूचनाएं उपलब्ध कराने व वस्तुस्थिति से अवगत कराने का निर्देश दिया गया। इसके बाद सहायक लोक सूचना अधिकारी, सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा आवेदक को 4 अप्रैल, 2022 को पत्र लिखकर सूचित किया गया कि संबंधित कार्यालय – मुख्यमंत्री कार्यालय – द्वारा अवगत करवाया गया है कि आवेदक द्वारा चाही गई जानकारी विभिन्न विभागों से संबंधित होने के कारण उनसे प्राप्त की जा सकती है। यही तथ्य उनके द्वारा न केवल राज्य सूचना आयोग के समक्ष द्वितीय अपील क्रमांक ए-1441/2022 में प्रस्तुत किया गया, वरन् ऐसी कोई जानकारी मुख्यमंत्री कार्यालय में संधारित नहीं होने की बात भी स्वीकारी गई।

जानकार बतलाते है कि राज्य के किसी भी जिले में मुख्यमंत्री द्वारा किसी भी आयोजन में घोषणा करने पर संबंधित जिले का कलेक्टर उस बाबत बकायदा एक नोट बना कर उसकी जानकारी सामान्य प्रशासन विभाग को भेजता है, जिसकी प्रति मुख्यमंत्री कार्यालय को भी प्रेषित की जाती है। ऐसे में इस बात पर यकीन कर पाना मुश्किल है कि सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी सामान्य प्रशासन विभाग व मुख्यमंत्री सचिवालय में संधारित नहीं होगी। और यदि संबंधित कलेक्टर द्वारा मुख्यमंत्री की घोषणाओं बाबत कोई नोट राज्य सरकार को नहीं भेजा गया है तो इसका अर्थ यही है कि नौकरशाहों ने शिवराज सिंह चौहान और उनकी घोषणाओं को गंभीरता से लेना बंद कर दिया है। और यदि स्वयं मुख्यमंत्री कार्यालय में ही मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणाओं की जानकारी संधारित नहीं की जा रही हो तो ऐसे में मुख्यमंत्री को घोषणावीर ही कहा जाएगा।

(संपादन : नवल/अनिल)


फारवर्ड प्रेस वेब पोर्टल के अतिरिक्‍त बहुजन मुद्दों की पुस्‍तकों का प्रकाशक भी है। एफपी बुक्‍स के नाम से जारी होने वाली ये किताबें बहुजन (दलित, ओबीसी, आदिवासी, घुमंतु, पसमांदा समुदाय) तबकों के साहित्‍य, सस्‍क‍ृति व सामाजिक-राजनीति की व्‍यापक समस्‍याओं के साथ-साथ इसके सूक्ष्म पहलुओं को भी गहराई से उजागर करती हैं। एफपी बुक्‍स की सूची जानने अथवा किताबें मंगवाने के लिए संपर्क करें। मोबाइल : +917827427311, ईमेल : info@forwardmagazine.in

फारवर्ड प्रेस की किताबें किंडल पर प्रिंट की तुलना में सस्ते दामों पर उपलब्ध हैं। कृपया इन लिंकों पर देखें 

मिस कैथरीन मेयो की बहुचर्चित कृति : मदर इंडिया

बहुजन साहित्य की प्रस्तावना 

दलित पैंथर्स : एन ऑथरेटिव हिस्ट्री : लेखक : जेवी पवार 

महिषासुर एक जननायक’

महिषासुर : मिथक व परंपराए

जाति के प्रश्न पर कबी

चिंतन के जन सरोकार

लेखक के बारे में

मनीष भट्ट मनु

घुमक्कड़ पत्रकार के रूप में भोपाल निवासी मनीष भट्ट मनु हिंदी दैनिक ‘देशबंधु’ से लंबे समय तक संबद्ध रहे हैं। आदिवासी विषयों पर इनके आलेख व रपटें विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से प्रकाशित होते रहे हैं।

संबंधित आलेख

गोरखपुर : दलित ने किया दलित का उत्पीड़न, छेड़खानी और मार-पीट से आहत किशोरी की मौत
यह मामला उत्तर प्रदेश पुलिस की असंवेदनशील कार्यशैली को उजागर करता है, क्योंकि छेड़खानी व मारपीट तथा मौत के बीच करीब एक महीने के...
फुले-आंबेडकरवादी आंदोलन के विरुद्ध है मराठा आरक्षण आंदोलन (पहला भाग)
महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण आंदोलन राजनीतिक और सामाजिक प्रश्नों को जन्म दे रहा है। राजनीतिक स्तर पर अब इस आंदोलन के साथ दलित राजनेता...
ब्रह्मेश्वर मुखिया हत्याकांड : बिहार की भूमिहार राजनीति में फिर नई हलचल
भोजपुर जिले में भूमिहारों की राजनीति अब पहले जैसी नहीं रही। एक समय सुनील पांडे और उसके भाई हुलास पांडे की इस पूरे इलाके...
मध्य प्रदेश : विकास से कोसों दूर हैं सागर जिले के तिली गांव के दक्खिन टोले के दलित-आदिवासी
बस्ती की एक झोपड़ी में अनिता रहती हैं। वह आदिवासी समुदाय की हैं। उन्हें कई दिनों से बुखार है। वह कहतीं हैं कि “मेरी...
लोकसभा चुनाव के बाद उपचुनावों में भी मिली एनडीए को हार
अयोध्या लोकसभा क्षेत्र में हार के सदमे से अभी भाजपा उबरी भी नहीं थी कि उपचुनाव में बद्रीनाथ विधानसभा सीट हारने के बाद सोशल...