h n

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रद्द की 18 पिछड़ी जातियों को एससी में शामिल करने की अधिसूचना

उच्च न्यायालय के ताज़ा फैसले के बाद उत्तर प्रदेश में नया राजनीतिक घमासान शुरु होने का आशंका जताई जा रही है। उत्तर प्रदेश सरकार में शामिल संजय निषाद, भाजपा से दोबारा नज़दीकी बना रहे ओमप्रकाश राजभर जैसे नेता भाजपा पर संसद के ज़रिए इस मामले में हस्तक्षेप की मांग करेंगे। सैयद जैगम मुर्तजा की खबर

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आज 31 अगस्त, 2022 को 18 पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने के उत्तर प्रदेश सरकार की अधिसूचना को रद्द कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल और न्यायाधीश जे.जे. मुनीर की खंडपीठ ने इस मामले में फैसला सुनाते हुए कहा है कि इस मामले में प्रदेश सरकार की तरफ से समय समय पर जारी तीनों अधिसूचना अनुच्छेद 341 के अनुपालन में नहीं हैं।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि किसी भी समूह को अनुसूचित जाति की सूची में संविधान के अनुच्छेद 341 के तहत ही शामिल किया जा सकता है। इसमें राष्ट्रपति को यह अधिकार दिया गया है कि वह विभिन्न जातियों या क़बीलों के नाम इस विशेष सूची में शामिल कर सकें। लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार ने इसकी अनदेखी करके अधिसूचनाएं जारी कर दीं।

ग़ौरतलब है कि 2005 में सबसे पहले मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी सरकार ने इस संबध में नोटिफिकेशन जारी किया था। हालांकि बाद में यह नोटिफिकेशन वापस ले लिया गया। इसके बाद 21 और 22 दिसंबर 2016 को अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली तत्कालीन समाजवादी पार्टी सरकार ने एक सरकारी आदेश जारी किया। इसके ज़रिए मझवार, कहार, कश्यप, केवट, मल्लाह, निषाद, कुम्हार, प्रजापति, धीवर, बिंद, भर, राजभर, धीमार, बाथम, तुरहा, गोडिया, मांझी और मछुआ जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने का फैसला किया था।

इलाहाबाद हाईकोर्ट

2016 में तत्कालीन प्रमुख सचिव (समाज कल्याण) मनोज सिंह की ओर से जारी की गई अधिसूचना के ख़िलाफ डॉ. बी. आर. आंबेडकर ग्रंथालय एवं जन समिति, गोरखपुर ने एक जनहित याचिका दाख़िल की। इस मामले में याचिकाकर्ता हरिशरण गौतम का कहना है कि “उत्तर प्रदेश सरकार का यह फैसला राजनीति से प्रेरित है। ओबीसी जातियों को अनुसूचित जाति की सूची में शामिल करने का अधिकार केवल भारत की संसद को है और राज्यों को इस मामले में हस्तक्षेप का कोई अधिकार प्रदत्त नहीं है।”

जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 24 जनवरी 2017 को इन 18 ओबीसी जातियों को एससी सर्टिफिकेट जारी करने पर रोक लगा दी थी। इस बीच उत्तर प्रदेश में सरकार बदल गई। राज्य में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भजपा सरकार में भी इन्हीं जातियों को एससी सर्टिफिकेट जारी करने का आदेश पारित हुआ। इस फैसले के ख़िलाफ गोरख प्रसाद की तरफ से हाईकोर्ट में एक रिट याचिका दाखिल की गई। 16 सितंबर, 2019 को इस मामले में भी जस्टिस सुधीर अग्रवाल व जस्टिस राजीव मिश्रा की डिवीजन बेंच ने सुनवाई करते हुए स्टे आर्डर जारी कर दिया था।

उच्च न्यायालय के ताज़ा फैसले के बाद उत्तर प्रदेश में नया राजनीतिक घमासान शुरु होने का आशंका जताई जा रही है। उत्तर प्रदेश सरकार में शामिल संजय निषाद, भाजपा से दोबारा नज़दीकी बना रहे ओमप्रकाश राजभर जैसे नेता भाजपा पर संसद के ज़रिए इस मामले में हस्तक्षेप की मांग करेंगे। इसके अलावा इन जातियों से संबंधित तमाम नेताओं पर भी दबाव होगा कि वह भाजपा से इस मामले में दख़ल दिलाकर आरक्षण की व्यवस्था क़ायम कराएं।

(संपादन : नवल/अनिल)


फारवर्ड प्रेस वेब पोर्टल के अतिरिक्‍त बहुजन मुद्दों की पुस्‍तकों का प्रकाशक भी है। एफपी बुक्‍स के नाम से जारी होने वाली ये किताबें बहुजन (दलित, ओबीसी, आदिवासी, घुमंतु, पसमांदा समुदाय) तबकों के साहित्‍य, सस्‍क‍ृति व सामाजिक-राजनीति की व्‍यापक समस्‍याओं के साथ-साथ इसके सूक्ष्म पहलुओं को भी गहराई से उजागर करती हैं। एफपी बुक्‍स की सूची जानने अथवा किताबें मंगवाने के लिए संपर्क करें। मोबाइल : +917827427311, ईमेल : info@forwardmagazine.in

फारवर्ड प्रेस की किताबें किंडल पर प्रिंट की तुलना में सस्ते दामों पर उपलब्ध हैं। कृपया इन लिंकों पर देखें 

मिस कैथरीन मेयो की बहुचर्चित कृति : मदर इंडिया

बहुजन साहित्य की प्रस्तावना 

दलित पैंथर्स : एन ऑथरेटिव हिस्ट्री : लेखक : जेवी पवार 

महिषासुर एक जननायक’

महिषासुर : मिथक व परंपराए

जाति के प्रश्न पर कबी

चिंतन के जन सरोकार

लेखक के बारे में

सैयद ज़ैग़म मुर्तज़ा

उत्तर प्रदेश के अमरोहा ज़िले में जन्मे सैयद ज़ैग़़म मुर्तज़ा ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से लोक प्रशासन और मॉस कम्यूनिकेशन में परास्नातक किया है। वे फिल्हाल दिल्ली में बतौर स्वतंत्र पत्रकार कार्य कर रहे हैं। उनके लेख विभिन्न समाचार पत्र, पत्रिका और न्यूज़ पोर्टलों पर प्रकाशित होते रहे हैं।

संबंधित आलेख

अंकिता हत्याकांड : उत्तराखंड में बढ़ता जनाक्रोश और जाति का सवाल
ऋषिकेश के जिस वनंतरा रिजार्ट में अंकिता की हत्या हुई, उसका मालिक भाजपा के ओबीसी प्रकोष्ठ का नेता रहा है और उसके बड़े बेटे...
महाकाल की शरण में जाने को विवश शिवराज
निश्चित तौर पर भाजपा यह चाहेगी कि वह ऐसे नेता के नेतृत्व में चुनाव मैदान में उतरे जो उसकी जीत सुनिश्चित कर सके। प्रधानमंत्री...
आदिवासी दर्जा चाहते हैं झारखंड, बंगाल और उड़ीसा के कुर्मी
कुर्मी जाति के लोगों का यह आंदोलन गत 14 सितंबर, 2022 के बाद तेज हुआ। इस दिन केंद्रीय मंत्रिपरिषद ने हिमालच प्रदेश की हट्टी,...
ईडब्ल्यूएस आरक्षण : सुनवाई पूरी, दलित-बहुजन पक्षकारों के तर्क से संविधान पीठ दिखी सहमत, फैसला सुरक्षित
सुनवाई के अंतिम दिन डॉ. मोहन गोपाल ने रिज्वांडर पेश करते हुए कहा कि सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़ा वर्ग एक ऐसी श्रेणी...
पसमांदा अब राजनीतिक ब्रांड, संघ प्रमुख कर रहे राजनीति
“अहम बात यह है कि पसमांदा समाज किसी भी तरह की सांप्रदायिक राजनीति को या उसके विचार को नही मान सकता है। इसलिए ये...