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बहुजन साप्ताहिकी : झारखंड में गैर-सवर्णों के लिए अब 67 फीसदी आरक्षण

हेमंत सरकार के महत्वपूर्ण फैसले के अलावा इस सप्ताह पढ़ें ईडब्ल्यूएस मामले में सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई की सीधे प्रसारण संबंधी इंदिरा साहनी की मांग व पसमांदा मुसलमानों के हितों को लेकर दिल्ली में होनेवाले एक महत्वपूर्ण आयोजन के बारे में

गत 14 सितंबर, 2022 को झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार ने इतिहास रचा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट में दो बड़े फैसले लिये गये। इनमें एक गैर सवर्णों के लिए राज्याधीन नौकरियों व उच्च शिक्षण संस्थानों में दाखिले में आरक्षण की सीमा 50 फीसदी से बढ़ाकर 67 फीसदी किया जाना है। इस फैसले के बाद झारखंड उत्तर भारत का पहला राज्य बन गया है जहां गैर-सवर्णों के लिए 50 फीसदी से अधिक आरक्षण है। दक्षिण के राज्य यथा तमिलनाडु में यह पहले से है। 

वहीं दूसरा फैसला राज्य की डोमिसाइल नीति से जुड़ा है। इसके मुताबिक अब वही राज्य के मूल निवासी माने जाएंगे, जिनके पास 1932 में हुए सर्वे पर आधारित खतियान होंगे। हालांकि ये दोनों निर्णय अभी राज्य मंत्रिपरिषद के द्वारा लिया गया है, जिन्हें लागू कराने के लिए अब सरकार को विधानसभा में विधेयक पेश करने होंगे। वहां पारित किये जाने के बाद राज्य सरकार दोनों विधेयकों को केंद्र के पास संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल करने हेतु अनुरोध करेगी।

दरअसल, वर्तमान में झारखंड में पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को 14 प्रतिशत, अनुसूचित जाति (एससी) को 10 प्रतिशत, और अनुसूचित जनजाति (एसटी) को 26 प्रतिशत आरक्षण दिया जाता है। इसके अलावा आर्थिक आधार पर कमजोर वर्गों के लिए 10 फीसदी आरक्षण का प्रावधान है। इस प्रकार झारखंड में वर्तमान में कुल 60 प्रतिशत आरक्षण है। राज्य मंत्रिपरिषद के निर्णय के बाद अब वहां ओबीसी को 27 फीसदी, एससी को 12 फीसदी और एसटी को 28 फीसदी आरक्षण दिया जाएगा। इस प्रकार गैर-सवर्णों के लिए कुल आरक्षण अब 67 फीसदी हो जाएगा।

हेमंत सोरेन, मुख्यमंत्री, झारखंड

हालांकि यह उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा इंदिरा साहनी बनाम भारत सरकार मामले में दिये गये फैसले में आरक्षण की अधिकतम सीमा 50 फीसदी तय कर दी गई थी। वर्ष 2019 में केंद्र सरकार द्वारा आर्थिक आधार पर कमजोर वर्गों के लिए दस फीसदी आरक्षण का प्रावधान किये जाने के फैसले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में गत 13 सितंबर, 2022 से जनहित अभियान एवं अन्य 32 याचिकाकर्ताओं की याचिका पर सुनवाई जारी है। इस लिहाज से हेमंत सरकार के फैसले का महत्व बढ़ गया है।

ईडब्ल्यूएस मामले की सुनवाई का हो सीधा प्रसारण, इंदिरा साहनी ने की मांग

1990 के दशक में मंडल कमीशन के तहत ओबीसी आरक्षण को सुप्रीम कोर्ट में इंदिरा साहनी ने चुनौती दी थी। उनकी ही याचिका की सुनवाई के दौरान सात सदस्यीय पीठ ने आरक्षण की अधिकतम सीमा 50 फीसदी तय कर दी थी। 

अब इस मामले में और आर्थिक आधार पर कमजोर वर्गों के लिए केंद्र सरकार 103वें संविधान संशोधन को चुनौती दिये जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में पांच सदस्यीय संविधान पीठ सुनवाई कर रही है। 

इस संबंध में वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा साहनी ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश यू. यू. ललित व अन्य सभी जजों को पत्र लिखकर मांग किया है कि इस सुनवाई का सीधा प्रसारण हो। 

उन्होंने कहा है कि यह राष्ट्रीय महत्व का मसला है और समाज के सभी वर्गों को प्रभावित करनेवाला है, इसलिए इसके बारे में सभी को जानने का अधिकार है। 

बताते चलें कि यह सुनवाई गत 13 सितंबर से जारी है। अबतक इस सुनवाई के दौरान प्रो. मोहन गोपाल, राज्यसभा सांसद व अधिवक्ता पी. विल्सन आदि जिरह कर चुके हैं और लगभग सभी ने 103वें संविधान संशोधन को गैर-संवैधानिक करार दिया है। उनका कहना है कि आरक्षण की मूल अवधारणा जो कि संविधान के अनुच्छेद 46 में वर्णित है, सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ापन है ना कि आर्थिक स्तर पर पिछड़ापन।

पसमांदा समाज की स्थिति चिंतन को जुटेंगे दिग्गज

आगामी 18 सितंबर, 2022 को पसमांदा मुसलमानों की स्थिति पर चिंतन हेतु एक कार्यक्रम का आयोजन दिल्ली के कंस्टीट्यूशन क्लब में किया जाना है। इस आशय की जानकारी जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में शोधार्थी वीरेंद्र कुमार ने दी है। उनके द्वारा दी गई सूचना के अनुसार इस कार्यक्रम की अध्यक्षता ऑल इंडिया पसमांदा महाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व राज्यसभा सांसद अली अनवर करेंगे। वहीं मुख्य वक्ताओं में प्रो. अभय कुमार दूबे, प्रो. दिलीप मंडल, प्रो. हिलाल अहमद, प्रो. रतनलाल, रमजान चौधरी, अनिल चमड़िया, डॉ. तनवीर एजाज, अधिवक्ता दीपक सिंह, डॉ. सूरज मंडल, लेखिका व पत्रकार शिबा असलम फहमी और पत्रकार सिद्धार्थ रामू शामिल रहेंगे।

उषाकिरण आत्राम को साहित्य सम्मान

गोंडी भाषा व साहित्य की अध्येता उषाकिरण आत्राम को महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिला के सूर्यांश साहित्य व सांस्कृतिक मंच के द्वारा सम्मानित किया जाएगा। उनके अलावा पुरस्कृत होनेवाले रचनाकारों में मेघराज मेश्राम, विश्वास ठाकुर, रमेश रावलकर, रमेश तांबे, डॉ. विद्याधर बंसोड़ आदि शामिल रहेंगे। उल्लेखनीय है कि सूर्यांश साहित्य व सांस्कृतिक मंच, चंद्रपुर के द्वारा पिछले एक दशक से दलित-बहुजन रचनाकारों को उनके साहित्यिक अवदानों के लिए पुरस्कृत किया जाता है।


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चिंतन के जन सरोकार

लेखक के बारे में

नवल किशोर कुमार

नवल किशोर कुमार फॉरवर्ड प्रेस के संपादक (हिन्दी) हैं।

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