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इमरान मसूद की वापसी से ‘दलित-मुस्लिम’ पर मायावती की निगाह

भाजपा और सपा पर समान रूप से हमला कर मायावती ने यह संकेत तो दे ही दिया है कि वह अपनी पार्टी को फिर से स्थापित करने की कोशिशों में जुट गई हैं। इस क्रम में उन्होंने इमरान मसूद को आगे किया है। बता रहे हैं असद शेख

इस साल हुआ उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव अब इतिहास है। इसे इसलिए भी याद रखा जाएगा क्योंकि बहुजन समाज पार्टी (बसपा) को केवल एक सीट पर जीत मिल सकी। यह वही दल है जिसने 2007 में पूर्ण बहुमत से सरकार का गठन किया था। यहां तक कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश जो कि एक समय बसपा का गढ़ माना जाता था, वहां भी वह औंधे मुंह गिरी। अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में कुछ हलचलें दिखने लगी हैं। इसकी वजह इमरान मसूद का बसपा में शामिल होना है। 

माना यह जा रहा है कि बसपा प्रमुख मायावती 2024 में होनेवाले लोकसभा चुनाव की तैयारियों में अभी से जुट गई हैं। इसी क्रम में उन्होंने इमरान मसूद का अपने दल में शामिल किया। इसे मायावती की दलित-मुसलमान की रणानीति का आगाज भी माना जा रहा है।

बसपा के लिए महत्वपूर्ण है पश्चिमी उत्तर प्रदेश

पश्चिमी उत्तर प्रदेश का इलाक़ा दिल्ली से जुड़ा हुआ है,और इसमें गाज़ियाबाद से लेकर मथुरा और रामपुर से लेकर मुजफ्फरनगर का उपजाऊ इलाक़ा आता है। यह वह इलाका है, जहां बड़ी संख्या में मुस्लिम आबादी और दलित समुदाय की मौजूदगी है। वहीं अगर इतिहास की बात करें तो खुद मायावती भी पहली बार इसी पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बिजनौर लोकसभा से सांसद बन कर ही लोकसभा पहुंची थीं। इसके पहले सहारनपुर के हरोड़ा विधानसभा क्षेत्र से विधायक भी निर्वाचित हुई थीं। इसके अलावा बसपा के संस्थापक कांशीराम ने भी सहारनपुर लोकसभा से चुनाव लड़ा था। 

कौन हैं इमरान मसूद?

इमरान मसूद सहारनपुर के मसूद परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके चाचा रशिद मसूद दिग्गज राजनेता थे और उनकी ही राजनीतिक विरासत इमरान को मिली है। इमरान 2007 से लेकर 2012 तक सहारनपुर की मुज़फ़्फ़राबाद विधानसभा से विधायक रहें हैं और 2014 के लोकसभा चुनावों में भाजपा के उम्मीदवार के सामने कांग्रेस के टिकट पर 4 लाख वोट लेकर चर्चा में आये थे। हालांकि वे यह चुनाव हार गये थे।

वर्ष 2012 के बाद उन्होंने दो बार लोकसभा और दो बार विधानसभा चुनाव लड़ा है। लेकिन उन्हें जीत नहीं मिल सकी। वे हर बार जीतते-जीतते हार जाते हैं। 

इमरान मसूद के सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद देतीं बसपा प्रमुख मायावती

2022 में विधानसभा चुनाव के ठीक पहले इमरान कांग्रेस छोड़ सपा में शामिल हुए थे। लेकिन उन्हें विधानसभा का टिकट भी नहीं दिया गया और अखिलेश यादव ने एमएलसी भी नहीं बनाया। अब इमरान ने बसपा की शरण ली है। 

बसपा के निशाने पर दलित-मुसलमान

दरअसल, इस साल मिली पराजय के बाद बसपा अब सक्रिय हुई है। इस क्रम में उसने अपने कैडर को फिर से खड़ा करने का प्रयास शुरू किया है। इसके अलावा भाजपा और सपा पर समान रूप से हमला कर उन्होंने यह संकेत तो दे ही दिया है कि वह अपनी पार्टी को फिर से स्थापित करने की कोशिशों में जुट गई हैं। इस क्रम में उन्होंने इमरान मसूद को आगे किया है। मायावती इमरान का प्रभाव जानती हैं, इस कारण ही उन्होंने उन्हें पश्चिमी उत्तर प्रदेश का संयोजक भी मनोनीत कर दिया है।

सियासी विश्लेषक यह मानते हैं कि मुस्लिम मतदाता बसपा से दूर हुए हैं और अखिलेश यादव के ऊपर उनका विश्वास बढ़ा है। इसके अलावा जयंत चौधरी ke RLD के साथ उनका गठबंधन मायावती के लिए परेशानी का सबब है। 

बहरहाल, इमरान मसूद पश्चिमी यूपी के तीन जिलों सहारनपुर, बिजनौर और शामली में अच्छा प्रभाव रखते हैं। लेकिन देखना यह है कि वे बसपा के लिए कितना काम आएंगे।

(संपादन : नवल/अनिल)


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लेखक के बारे में

असद शेख

असद शेख दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद स्वतंत्र पत्रकार के रूप में विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं के लिए स्वतंत्र लेखन में सक्रिय हैं

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