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‘द वायर’ प्रकरण : सरकार पर उठे रहे सवाल

भाजपा आईटी सेल प्रमुख की शिकायत भर पर जांच के लिए बेचैन एजेंसियों को इस मामले में विस्तृत जांच करनी चाहिए। इसके बावजूद कि ‘द वायर’ ने माफी मांगते हुए अपनी रपट हटा ली है, लेकिन उस रपट में किए गए दावों की जांच भला क्यों नहीं होनी चाहिए? बता रहे हैं सैयद जैगम मुर्तजा

गत 31 अक्टूबर, 2022 को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने न्यूज़ पोर्टल ‘द वायर’ के संपादक सिद्धार्थ वरदराजन और सह-संस्थापक एम.के. वेणु के घर में छापेमारी की। यह कार्रवाई भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय की तरफ से दर्ज कराई गई एफआईआर के बाद हुई है। हालांकि अभी तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है, लेकिन इस कार्रवाई के बाद भाजपा आईटी सेल की ताक़त और मीडिया पर सरकार के साथ सीधी लाइन में चलने के दबाव को लेकर एक बार फिर चर्चा छिड़ गई है। इस संबंध में प्रेस क्लब ऑफ इंडिया एवं अन्य मीडिया संगठनों चिंता व्यक्त की है।

भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने ‘द वायर’ पर अपनी छवि बिगाड़ने का आरोप लगाते हुए दिल्ली पुलिस के विशेष आयुक्त ‘अपराध’ को एक शिकायत सौंपी थी। 

इस शिकायत पर त्वरित कार्रवाई करते हुए दिल्ली पुलिस ने गत 29 अक्टूबर, 2022 को भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी); 468, 469 (फर्जीवाड़ा); 471 (ठगी); 500 (मानहानि); 120बी (आपराधिक साजिश); और 34 (आपराधिक गतिविधि में शामिल होने) के तहत मामला दर्ज कर लिया। 

अमित मालवीय की शिकायत में ‘द वायर’ के संस्थापक संपादकों सिद्धार्थ वरदराजन और सिद्धार्थ भाटिया, एम.के. वेणु, एक्जीक्यूटिव न्यूज प्रोड्यूसर जाह्नवी सेन, फाउंडेशन फॉर इंडिपेंडेंट जर्नलिज्म, और कुछ अज्ञात लोगों को प्रतिवादी बनाया गया है। भाजपा आईटी सेल प्रमुख ने ‘द वायर’ के पूर्व सलाहकार देवेश कुमार के ख़िलाफ भी पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। 

छापेमारी के बाद पुलिस सिद्धार्थ वरदराजन और एम.के. वेणु के घर से कंप्यूटर, स्टोरेज डिवाइस व अन्य इलेक्ट्रानिक उपकरणें को ले गई है। दिल्ली पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि बरामद इलेक्ट्रानिक उपकरणों की जांच की जा रही है। यानी अभी किसी की गिरफ्तारी भले ही नहीं हुई है लेकिन जांच के बाद, या जांच के दौरान किसी की गिरफ्तारी की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।

बाएं से- सिद्धार्थ वरदराजन, एम.के. वेणु, जाह्नवी सेन व सिद्धार्थ भाटिया

ध्यातव्य है कि प्रेस क्लब ऑफ इंडिया द्वारा ‘द वायर’ के हवाले से दी गई सूचना के अनुसार दिल्ली पुलिस जिन कंप्यूटर एवं अन्य उपकरणों को अपने साथ ले गई है, उसका हैश वैल्यू रिकार्ड नहीं कराया गया है। इससे उन उपकरणें में दर्ज सूचनाओं के साथ छेड़छाड़ की संभावना बढ़ गई है।

यह पूरा मामला ‘द वायर’ में एक रपट के छपने के बाद शुरु हुआ। इस रपट में दावा किया गया था कि भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय को मेटा प्लेटफार्म पर विशेष सुविधा हासिल है। वह भाजपा के हितों के ख़िलाफ समझी जाने वाली किसी भी पोस्ट को तुरंत हटवा सकते हैं। मेटा फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर मालिकाना हक़ रखने वाली मार्क जुकरबर्ग के नेतृत्व वाली कंपनी का नाम है।

हालांकि यह पहली बार नहीं है कि अपनी ख़बरों में सरकार की आलोचना करने के लिए ‘द वायर’ किसी भाजपाकर्मी, नेता या समर्थकों के निशाने पर आया है। ‘द वायर’ अकेला ऐसा संस्थान भी नहीं है, जो सरकारी एजेंसियों और भाजपा आईटी सेल के निशाने पर आया है। हाल के दिनों में ‘नेशनल हेराल्ड’, ‘न्यूज़ लॉन्ड्री’, ‘न्यूज़ क्लिक’ के दफ्तरों पर आयकर विभाग और ईडी जैसी ऐजेंसियों की छापेमारी के बाद भी तमाम तरह के सवाल उठे थे।

मगर ‘द वायर’ का मामला थोड़ा अलग है। मेटा ने ‘द वायर’ में छपे दावे का खंडन किया तो पोर्टल ने अमित मालवीय पर छपी अपनी रिपोर्ट को माफीनामे के साथ हटा लिया था। लेकिन भाजपा आईटी सेल प्रमुख के अहम की तुष्टि इतने भर से नहीं हुई। इस बात को एक हद तक माना जा सकता है कि मेटा के प्लेटफार्म भाजपा आईटी सेल की हुक्म के पाबंद नहीं हैं। मगर इस बात से कोई इंकार भी नहीं कर सकता है कि फेसबुक और इंस्टाग्राम पर नफरती या राजनीतिक पोस्ट हटाने, पहुंच ख़त्म करने की कार्रवाई सवालों के घेरे में हैं। कम से कम सरकार की आलोचना से जुड़े पोस्ट के मामले में फेसबुक का अल्गारिदम, कम्यूनिटी स्टैंडर्ड, और अकाउंट ब्लॉक करने की कार्रवाई कई बार बेहद एकतरफा और नियमहीन होती हैं। 

बहरहाल, ‘द वायर’ के माफीनामे और रिपोर्ट हटा लेने के बाद मामला ख़त्म हो जाना चाहिए था। लेकिन मामला सिर्फ एक रिपोर्ट भर का नहीं है। द वायरऔर स्वतंत्र पत्रकारिता का दावा करने वाले तमाम संस्थान भाजपा आईटी सेल की नाराजगी की वजह रहे हैं। एक तरफ सरकार की लाइन न लेने, सरकारी नीतियों की आलोचना करने और नोटबंदी, लॉकडाउन जैसे सरकारी फैसलों से हुए नुक़सान की तथ्यपूर्ण रिपोर्टिंग करने का मसला है तो दूसरी सत्ता की हनक और सत्ता के दुरुपयोग के सवाल हैं।

ख़ैर, भाजपा आईटी सेल प्रमुख की शिकायत भर पर जांच के लिए बेचैन एजेंसियों को इस मामले में विस्तृत जांच करनी चाहिए। इसके बावजूद कि ‘द वायर’ ने माफी मांगते हुए अपनी रपट हटा ली है, लेकिन उस रपट में किए गए दावों की जांच भला क्यों नहीं होनी चाहिए

(संपादन : नवल/अनिल)


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लेखक के बारे में

सैयद ज़ैग़म मुर्तज़ा

उत्तर प्रदेश के अमरोहा ज़िले में जन्मे सैयद ज़ैग़़म मुर्तज़ा ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से लोक प्रशासन और मॉस कम्यूनिकेशन में परास्नातक किया है। वे फिल्हाल दिल्ली में बतौर स्वतंत्र पत्रकार कार्य कर रहे हैं। उनके लेख विभिन्न समाचार पत्र, पत्रिका और न्यूज़ पोर्टलों पर प्रकाशित होते रहे हैं।

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