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आंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में ‘शिवलिंग’

आंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर केंद्रीय सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्रालय के अधीन है और इसकी देख-रेख इसी मंत्रालय के द्वारा की जाती है। सवाल यह है कि परिसर में कर्मकांडी आयोजन की अनुमति कैसे दी गई?

गत 18 फरवरी, 2023 को शनिवार को दिल्ली के आंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर परिसर में वह नजारा सामने आया, जिसके विरोध में डॉ. आंबेडकर ने आजीवन संघर्ष किया। दरअसल परिसर में डॉ. आंबेडकर की प्रतिमा के ठीक सामने महाशिवरात्रि का आयोजन किया गया और प्रतीक स्वरूप फूल का शिवलिंग स्थापित किया गया। 

बताते चलें कि आंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर केंद्रीय सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्रालय के अधीन है और इसकी देख-रेख इसी मंत्रालय के द्वारा की जाती है। सवाल यह है कि परिसर में कर्मकांडी आयोजन की अनुमति कैसे दी गई? इस संबंध में सेंटर के आधिकारिक वेबसाइट पर दिए गए टेलीफोन नंबरों पर संपर्क किये जाने पर पल्ला झाड़ने की कवायद सामने आयी। 

खैर, इस मामले में जो जानकारी सामने आ रही है, उसके अनुसार गत शनिवार को आंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर परिसर का सभागार धार्मिक नाम वाले एक संगठन के द्वारा बुक कराया गया था। संगठन ने अपनी स्थापना के दस साल पूरे होने पर यह आयोजन किया था और आयोजकों ने ही परिसर के प्रवेशारंभ में बने हॉल में, जहां कुर्सी पर आसीन डॉ. आंबेडकर की प्रतिमा स्थापित है, के सामने शिवलिंग बना दिया।

आंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर, नई दिल्ली परिसर में डॉ. आंबेडकर की प्रतिमा के सामने स्थापित प्रतीकात्मक शिवलिंग

वैसे आंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में भीम, नालंदा और समरेष्ठ नामक तीन सभागार हैं और इन्हें विभिन्न संस्थाओं और संगठनों द्वारा बुक कराया जाता है और इसकी पूरी प्रक्रिया परिसर के प्रबंधकों द्वारा किया जाता है। जाहिर तौर पर उक्त संगठन ने जब सभागार बुक कराया होगा तब उसने आयोजन के संबंध में जानकारी पूर्व में प्रबंधकों को दी होगी। फिर इसके बावजूद कि डॉ. आंबेडकर की पूरी विचारधारा में कर्मकांड और आडंबरवाद नहीं है, उस संगठन को आयोजन की अनुमति कैसे दी गई।

इस संबंध में पूर्व सांसद उदित राज का कहना है कि यह आंबेडकर की पूरी वैचारिकी को पलट देने की आरएसएस-भाजपा की साजिश है। यह बेहद निंदनीय है कि जिस महामानव ने समाज को पाखंड मुक्त और समातामूलक बनाने के अपना पूरा जीवन लगा दिया, आज उनके ही नाम पर बने संस्थान में उनकी ही प्रतिमा के आगे इस तरह का आयोजन किया जा रहा है।

वहीं प्रसिद्ध दलित साहित्यकार व समालोचक कंवल भारती अपना आक्रोश व्यक्त करते हुए कहते हैं कि इस तरह की गतिविधि करने की अनुमति आंबेडकर इंटरनेशनल परिसर में कैसे दे दी गई और दिल्ली में जो तथाकथित आंबेडकरवादी हैं, उन्होंने इसका विरोध क्यों नहीं किया। भारती ने यह भी कहा कि यह डॉ. आंबेडकर के विचारों को पलट देने की साजिश है। उन्होंने आगे कहा कि “डॉ. आंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में शिवलिंग की स्थापना डॉ. आंबेडकर के प्रति एक अपमानजनक कार्य है। उन्होंने शिवलिंग पूजा को एक घृणित और अनैतिक कृत्य कहा था। पर यह हिंदुओं की सरकार है, आंबेडकर विरोधी भी है। मैं इस शर्मनाक शरारत की घोर निंदा करता हूं।”

दिल्ली के वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता रघुबीर सिंह ने कहा कि यह आंबेडकरवादी विचारधारा को दूषित करने की साजिश है। इसका विरोध किया जाना चाहिए। डॉ. आंबेडकर ने हिंदूवादी कर्मकांडों का हमेशा विरोध किया और मानवता विरोधी बताया था। 

बहरहाल, इस संबंध में आंबेडकर प्रतिष्ठान के संपादक सुधीर हीलस्यान का कहना है कि वे इस बारे में कुछ भी नहीं कह सकते हैं, क्योंकि वे अधिकृत अधिकारी नहीं हैं।

(संपादन : अनिल)


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लेखक के बारे में

नवल किशोर कुमार

नवल किशोर कुमार फॉरवर्ड प्रेस के संपादक (हिन्दी) हैं।

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