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छत्तीसगढ़ : सोनी सोरी-मनीष कुंजाम ने बीजापुर मुठभेड़ को बताया फर्जी, न्यायिक जांच की मांग

सोनी सोरी ने दूरभाष पर कहा कि पुलिस जिसे माओवादी नक्सलियों से मुठभेड़ बता रही है, वह फर्जी है। उन्होंने कहा कि मारे गए सभी आदिवासी तेंदू पत्ता तोड़ने गए थे। उन्होंने पुलिस पर आरोप लगाया है उसने लोगों को घेर कर गोली मार दी। पढ़ें, यह रिपोर्ट

लोकसभा चुनाव के दरमियान छत्तीसगढ़ में एक बार फिर निर्दोष आदिवासियों को नक्सली के नाम पर मारने की घटना प्रकाश में आई है। यह घटना गत 10 मई, 2024 को सूबे के बीजापुर जिले में घटित हुई। छत्तीसगढ़ पुलिस इसे मुठभेड़ बता रही है। उसके मुताबिक इस मुठभेड़ में 12 नक्सली मारे गए। जबकि छत्तीसगढ़ की सामाजिक व मानवाधिकार कार्यकर्ता सोनी सोरी ने मुठभेड़ को फर्जी बताया है और कहा है कि सभी मृतक तेंदू पत्ता तोड़ने गए थे।

बताते चलें कि घटना के तीन सप्ताह पहले सूबे के कांकेर जिले में 29 आदिवासियों की मौत पुलिस मुठभेड़ में हुई थी। पुलिस ने उन्हें भी नक्सली करार दिया था।

बीजापुर में तथाकथित मुठभेड़ गंगालूर इलाके में हुई, जो पिडिया थाने के तहत आता है। और पुलिस के मुताबिक यह इलाका माओवादी नक्सलियों का मजबूत गढ़ रहा है।

पुलिस का दावा, नक्सली थे सारे मृतक

प्रकाशित खबरों के मुताबिक बीजापुर के पुलिस अधीक्षक जितेंद्र यादव ने बयान दिया है कि पिडिया के जंगल में डेढ़ सौ माओवादियों के एकजुट होने की उन्हें सूचना मिली थी, जिसके बाद की कार्रवाई में यह मुठभेड़ हुई।

पुलिस की इस कार्रवाई की सराहना करते हुए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि जबसे हमारी सरकार बनी है, हमने नक्सलियों के खिलाफ मजबूत कदम उठाया है। उनका यह बयान भी खबरों में प्रकाशित है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह नक्सलवाद को जल्द से जल्द खत्म कर देना चाहते हैं और अब सूबे में डबल इंजन की सरकार होने से यह काम जल्दी होगा।

बीजापुर में पीड़ित परिवारों के साथ सोनी सोरी

वहीं इस मामले में सोनी सोरी ने दूरभाष पर कहा कि पुलिस जिसे माओवादी नक्सलियों से मुठभेड़ बता रही है, वह फर्जी है। उन्होंने कहा कि मारे गए सभी आदिवासी तेंदू पत्ता तोड़ने गए थे। उन्होंने पुलिस पर आरोप लगाया है उसने लोगों को घेर कर गोली मार दी। इस मामले में बीजापुर जिला मुख्यालय के सामने एक प्रदर्शन को संबोधित करते हुए सोनी सोरी ने कहा कि अभी भी कई लोग लापता हैं, जिनके बारे में पुलिस कोई सूचना नहीं दे रही है कि वे मार दिए गए हैं या फिर उन्हें जेल में रखा गया है। उन्होंने स्थानीय प्रशासन पर पीड़ित परिवारों की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए कहा कि इस भीषण गर्मी में भी औरतें अपने बच्चों को लेकर पहुंची हैं, लेकिन यह न तो स्थानीय प्रशासन को नजर आ रहा है और न ही सूबे के मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृहमंत्री को ही।

न्यायिक आयोग गठित कर निष्पक्ष जांच की मांग

सोनी सोरी ने इस मामले में सरकार से न्यायिक आयोग गठित कर निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि पुलिस स्वयं इसकी जांच करेगी तो इसका नतीजा कुछ भी नहीं निकलेगा। इसलिए सरकार को चाहिए कि वह न्यायाधीशों द्वारा इस मामले की जांच कराए। इसके साथ ही सोनी सोरी ने पिडिया जंगल में रहनेवाले आदिवासियों के लिए बुनियादी सुविधाओं की कमी का सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि इस पूरे इलाके में खनन कंपनियां उत्खनन का कार्य कर रही हैं, जिसके कारण वहां के वातावरण पर प्रतिकूल असर पड़ा है। यहां हालात यह है कि बच्चें कुपोषित हैं, उनके के लिए न तो स्कूल है और न ही वहां इलाज के लिए अस्पताल। ऐसे में सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि यहां रह रहे आदिवासियों को कम से कम जीने का अधिकार तो मिले।

सोनी सोरी ने सरकार से यह मांग भी किया कि घटना के दिन अन्य जितने आदिवासियाें को पुलिस ने नक्सली के नाम पर गिरफ्तार किया है, उन्हें बिना किसी शर्त रिहा किया जाय तथा जो घायल हैं, उनका समुचित इलाज हो और जो आदिवासी मारे गए हैं, सरकार उनके आश्रितों को मुआवजा दे।

मनीष कुंजाम ने भी उठाया सवाल

वहीं पूर्व भाकपा विधायक मनीष कुंजाम ने घटनास्थल का दौरा करने के बाद दूरभाष पर बताया कि पुलिस ने मामले की प्राथमिकी में मारे गए लोगों को नक्सली करार दे दिया है। जबकि स्थानीय लोगों के मुताबिक वे तेंदू पत्ता तोड़ने गए थे। यह उनकी आजीविका का माध्यम रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले की न्यायिक जांच तो होनी ही चाहिए। लेकिन मौजूदा सरकार से कोई उम्मीद नहीं दिखती है। इसके पहले भी ऐसे ही मुठभेड़ों की न्यायिक जांच कराई गई। भूपेश बघेल की जब सरकार थी तब रिपोर्ट आई भी। रिपोर्ट में मृतकों को निर्दोष बताया गया, लेकिन उसकी रिपोर्ट को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। 

(संपादन : राजन/नवल/अनिल)


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