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अर्जक विवाह से साकार हो रहा जगदेव प्रसाद का आह्वान, टूट रहीं शाखा की बेड़ियां

बड़की दांगी और कोइरी (कुशवाहा) के बीच शादियां नहीं होती थीं। जबकि छोटकी दांगी और कोइरी जाति के बीच वैवाहिक संबंध बनते रहे हैं। जगदेव प्रसाद ने अपने जीवन में अंतर्जातीय विवाह का आह्वान किया था और कहा था कि जातिवाद के खात्मे के लिए ऐसे विवाह आवश्यक हैं। पढ़ें, यह खबर

गत 27 जून, 2026 को बिहार के गया जिला के घुघरीटांड स्थित एक मैरेज हॉल में अर्जक विवाह संस्कार के हिसाब से एक विवाह संपन्न हुआ। यह विवाह इस मामले में खास है कि वर और वधु दोनों अलग-अलग जातियों से थे। वर राहुल कुमार कोइरी (कुशवाहा) जाति से हैं और वधु रिंकी कुमारी दांगी जाति की हैं। दांगी जाति को बिहार सरकार द्वारा अति पिछड़ा वर्ग में शामिल किया गया है, जबकि कोइरी जाति पिछड़ा वर्ग में शामिल है। हालांकि सामान्य स्तर पर कुशवाहा और दांगी के बीच अनेक समानताएं रही हैं। यही वजह रही कि एक समय तक दोनों जातियों के लिए एक ही तरह का जाति प्रमाण पत्र बनता था। बाद में राजनीतिक कारणों से दोनों जातियों को अलग-अलग कर दिया गया।

गौर तलब है कि दांगी समाज की दो उपजातियां हैं– बड़की दांगी और छोटकी दांगी। इनमें बड़की दांगी और कोइरी (कुशवाहा) के बीच शादियां नहीं होती थीं। जबकि छोटकी दांगी और कोइरी जाति के बीच वैवाहिक संबंध बनते रहे हैं। जगदेव प्रसाद ने अपने जीवन में अंतर्जातीय विवाह का आह्वान किया था और कहा था कि जातिवाद के खात्मे के लिए ऐसे विवाह आवश्यक हैं। उन्होंने दांगी और काेइरी के बीच शादी-विवाह किए जाने का आह्वान किया था।

इस लिहाज से देखें तो राहुल और रिंकी की शादी उल्लेखनीय रही। इस अंतर्जातीय व अंतरशाखा विवाह की सभी ने मुक्त कंठ से सराहना की। राहुल गया जिले के वजीरगंज प्रखंड के ओरैल गांव के निवासी सीताराम प्रसाद और रामप्यारी देवी के बड़े पुत्र हैं। वहीं रिंकी गया के ही शेरघाटी प्रखंड के नवादा गांव के निवासी विजय सिंह और नीलम देवी की पुत्री हैं।

राहुल और रिंकी की शादी के मौके पर प्रतिज्ञापन कराते उपेंद्र पथिक

वैवाहिक कार्यक्रम अर्जक पद्धति से सम्पन्न हुआ। वर-वधु को विवाह का प्रतिज्ञापन अर्जक संघ सांस्कृतिक समिति के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र पथिक ने कराया। विवाहोपरांत विवाह प्रतिज्ञापन की एक-एक प्रति वर और वधु दोनों को दिया गया। इसमें वर-वधु के अलावा विवाह प्रतिज्ञापन कराने वाले और दोनों पक्ष के दो-दो गवाह का भी हस्ताक्षर कराया गया।

विवाह का प्रतिज्ञापन कराने वाले वरिष्ठ अर्जक नेता उपेन्द्र पथिक ने बताया कि अर्जक संघ विज्ञान और संविधान पर आधारित मानववादी संगठन है। इस पद्धति की विशेषता कम खर्च, कम समय और कम परेशानी है। फिजूलखर्ची पर रोक लगाकर सबों को शिक्षित करने तथा वैज्ञानिक सोच विकसित करने पर जोर दिया जाता है। इसमें स्त्री-पुरुष और समाज में समानता लाने की शपथ दिलाई जाती है। इस कारण समाज के पिछड़े दलित वर्ग में यह पद्धति काफी लोकप्रिय हो गया है।

विवाह कार्यक्रम की अध्यक्षता वजीरगंज के पत्रकार रवि भूषण सिन्हा ने की। इस समारोह में वर-वधु दोनों ने सत्यनिष्ठा के साथ पति-पत्नी के रूप में रहने, समता का व्यवहार और आचरण करने, वैवाहिक जीवन को मधुर और अविच्छिन्न बनाने तथा मानव-मानव की बराबरी वाले समाज के विकास व समृद्धि में योगदान देने का प्रतिज्ञा की। शादी समारोह में उपस्थित रजनीकांत रवि, जितेंद्र कुमार, अविनाश कुमार, बिंदेश्वर कुमार, प्रभाकर कुमार समेत वर-वधु पक्ष के दर्जनों लोगों ने वर-वधु के सुखमय जीवन की मंगलकामना की।

समारोह को अर्जक गायिका सविता कुमारी ने अपने गीतों के जरिए सुरीला बना दिया। अपने गीतों में उन्होंने शादी की अवैज्ञानिक पुरानी रीति-रिवाज को नकार कर मानववादी रीति-रिवाज अपनाने पर बल दिया। जबकि प्रसिद्ध जादूगर बबन सिंह कुशवाहा ने जादू के बहाने वैज्ञानिक खेलों को दिखाया और समाज में व्याप्त अंधविश्वास और कुरीतियों को मिटाने की बात कही।

(संपादन : नवल/अनिल)


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