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हाथरस में फिर एक दलित की हत्या या महज दुर्घटना, उठ रहे सवाल

मृतक के पिता का कहना है कि उनके बेटे सनी की हत्या मुख्य आरोपी बनी सिंह की लापरवाही की वजह से नहीं हुई। यह उसकी साजिश थी। उसने जानबूझकर सनी को मारा है। फारवर्ड प्रेस के साथ मोबाइल पर बातचीत में उन्होंने यह कहा कि जिस दिन उनके बेटे की मौत हुई, उस दिन स्थानीय पुलिस ने अपने मन से एफआईआर तैयार किया और कागज पर उनके हस्ताक्षर ले लिये। पढ़ें, यह खबर

मामला उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले के बूलगढ़ी गांव का है। वही बूलगढ़ी गांव, जहां 14 सितंबर, 2020 को एक दलित युवती के साथ गांव के ठाकुरों ने बलात्कार किया था और उसे इस कदर मारा था कि इलाज के दौरान 29 सितंबर, 2020 को उसकी मौत हो गई थी। लगभग छह साल के बाद मृतका के एक परिजन सनी की मौत बीते 10 जुलाई, 2026 को हो गई। उसके पिता संतोष कुमार का कहना है कि उनके बेटे की हत्या की गई है। जबकि चंदपा थाने की पुलिस के मुताबिक यह महज दुर्घटना है।

मृतक के पिता संतोष कुमार द्वारा व्हाट्सएप के जरिए भेजी गई एफआईआर की कॉपी में वर्णित तथ्य भी बताते हैं कि सनी की मौत की वजह ट्रैक्टर का पलटना है। एफआईआर के मुताबिक, “मैं संतोष कुमार, पुत्र इंद्रपाल, निवासी बूलगढ़ी, थाना चंदपा, हाथरस का मूलनिवासी हूं। आज दिनांक 10.07.2026 को मेरे गांव के बनी सिंह, पुत्र फतेह सिंह ने मेरे लड़के सनी, उम्र करीब 19 वर्ष, को ट्रैक्टर चलाने के लिए बुलाया था। मेरा लड़का गांव के अन्य लोगों का भी ट्रैक्टर चलाता था। बनी सिंह का ट्रैक्टर खेत में फंस गया था तो बनी सिंह ने मेरे लड़के को ट्रैक्टर चलवाकर निकलवाने के लिए बुलाया। मेरा लड़का ट्रैक्टर चला रहा था। बनी सिंह की लापरवाही से ट्रैक्टर पलट गया, जिसके नीचे दबकर मेरे लड़के की मृत्यु हो गई। बनी सिंह मेरे लड़के सनी को ट्रैक्टर के नीचे दबा छोड़कर मौके से भाग गया।” इसके साथ ही संतोष कुमार ने अपने आवेदन में चंदपा थाने के अध्यक्ष से बनी सिंह के खिलाफ कानूनी कार्यवाही करने की मांग की।

मृतक की तस्वीर व जेसीबी के जरिए ट्रैक्टर के नीचे से मृतक की लाश निकालते लोग

एफआईआर के अगले हिस्से में एक और अभियुक्त का नाम सुनील कुमार सिंह, पुत्र फतेह सिंह को जोड़ा गया है। साथ ही, यह कि उच्चाधिकारी गण के मौखिक आदेश के आधार पर मुकदमा उपरोक्त में बीएनएस की धारा 103(1) व एससी-एसटी एक्ट के प्रावधान की धारा जोड़ी गई। सनद रहे कि इस मामले में पूर्व में बीएनएस की धारा 106 के तहत दर्ज किया गया था, जिसे उच्चाधिकारी के आदेश के आधार पर विलोपित कर दिया गया।

सनद रहे कि बीएनएस की धारा 103(1) हत्या के मामले में लागू होता है। यह पूर्व में आईपीसी की धारा 302 के समान है। इसमें सामान्य हत्या और पांच या अधिक लोगों द्वारा की जाने वाली भीड़ आधारित हत्या के लिए कड़ी सजा का प्रावधान है। वहीं बीएनएस की धारा 106 लापरवाही से होने वाली किसी व्यक्ति की मृत्यु के मामले में लागू होती है।

मृतक के पिता का कहना है कि उनके बेटे सनी की हत्या मुख्य आरोपी बनी सिंह की लापरवाही की वजह से नहीं हुई। यह उसकी साजिश थी। उसने जानबूझकर सनी को मारा है। फारवर्ड प्रेस के साथ मोबाइल पर बातचीत में उन्होंने यह कहा कि जिस दिन उनके बेटे की मौत हुई, उस दिन स्थानीय पुलिस ने अपने मन से एफआईआर तैयार किया और कागज पर उनके हस्ताक्षर ले लिये। इसके बाद जब वे उच्चाधिकारी से मिले और अपनी बात कही तब जाकर एफआईआर में बदलाव किया गया।

पुलिस द्वारा एफआईआर में किया गया संशोधन

क्या आपके बेटे की आरोपी के साथ कोई व्यक्तिगत अदावत थी? इसके जवाब में संतोष कुमार का कहना है कि करीब एक महीने पहले आरोपी पक्ष से मजदूरी को लेकर उनकी बकझक हो गई थी। आरोपी पक्ष ने जातिसूचक गालियां दी थी।

आपको ऐसा क्यों लगता है कि आपके बेटे की हत्या की गई है? इस सवाल के जवाब में संतोष कुमार का कहना है कि जोगेंद्र के खेत में हरा चारा लगा था और ऐसे खेत की जुताई में ट्रैक्टर कैसे पलट गया। यदि यह हत्या नहीं थी तो बनी सिंह अपना ट्रैक्टर छोड़कर जिसके नीचे मेरा बेटा दबा था, क्यों भाग गया था।

बहरहाल, इस मामले में मुख्य आरोपी बनी सिंह की गिरफ्तारी हो चुकी है और दूसरा आरोपी सुनील कुमार सिंह अभी तक फरार है। यह मामला एससी-एसटी कोर्ट में लंबित है। लेकिन संतोष कुमार का कहना है कि इस मामले में कोर्ट में बीएनएस की धारा 105 के तहत कार्यवाही की जा रही है। यह धारा गैर-इरादतन हत्या से संबंधित है। जबकि एफआईआर में बीएनएस की धारा 106 और 103(1) का उल्लेख है।

भोपाल के वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष भट्ट मनु इस मामले में कहते हैं कि यदि थाना डायरी में विवेचक द्वारा यह लेख किया गया है कि उक्त प्रकरण बीएनएस की धारा 103 (1) – जो कि हत्या से संबंधित है – के साथ ही अनुसूचित जाति और जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 की धारा (3) (2) (5), जो कि एससी/एसटी समुदाय के सदस्य के साथ किए गए ऐसे अपराध से संबंधित है जिसमें 10 या अधिक वर्षों की सजा का प्रावधान है, होने के चलते उक्त धाराएं जोड़ी गईं तथा बीएनएस की धारा 106(1) तथा बीएनएस की धारा 281 को विलोपित किया जाता है तो ऐसी स्थिति में बीएनएस की धारा 105 यानी गैर इरादतन हत्या के तहत न्यायालय में कार्यवाही हैरत में डालने वाला है। यह पुलिस द्वारा संभावित लापरवाही का प्रतीक भी है।

(संपादन : अनिल)


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लेखक के बारे में

नवल किशोर कुमार

नवल किशोर कुमार फॉरवर्ड प्रेस के संपादक (हिन्दी) हैं।

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